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कैंसर से जिंदगी की जंग लड़ रही यह महिला बच्चों को खिलाती है हर दिन मुफ्त में खाना

Wed, 25 Sep 2019 02:54 PM IST
ललित फुलारा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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आंचल - फोटो : सोशल मीडिया
इंसान अपने जीवन में एक बार जीता है और एक बार मरता है। लेकिन जीवन की इस कड़ी के बीच आप क्या कर रहे हैं, यह बहुत ही मायने रखती है। अपने जीवन में किए कर्मों के वजह से ही इंसान लोगों के बीच महान बनता है और उसकी यही महानता लोगों के बीच प्रेरणा का स्रोत बन जाती है। कुछ ऐसा ही महान काम इन दिनों दिल्ली की रहने वाली आंचल शर्मा भी कर रही हैं।
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आंचल - फोटो : सोशल मीडिया
आंचल के जीवन में न जाने कितने उतार-चढ़ाव आए लेकिन हालात के आगे कभी हार नहीं मानी। फिलहाल आंचल शर्मा कैंसर से जिंदगी की जंग लड़ रही हैं। लेकिन बीमारी का शोक मनाने के बजाय वह खुशियां बांट रही हैं। आंचल दिल्ली के रंगपुरी इलाके में 100 से 200 गरीब बच्चों को प्रतिदिन खाना खिलाती हैं। खाना खाते हुए बच्चों की खिलखिलाहट उन्हें किसी भी इलाज से ज्यादा असर कर रही है। 
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आंचल - फोटो : सोशल मीडिया
'द बेटर इंडिया' की रिपोर्ट के अनुसार, आंचल भुखमरी से लेकर घरेलू हिंसा, लाखों की धोखाधड़ी और अपनी छोटी बहन की हत्या जैसे कई बुरे अनुभवों को झेल चुकी हैं। इन सबके बावजूद आंचल को साल 2017 में पता चला कि उन्हें तीसरे स्टेज का ब्रेस्ट कैंसर है। कैंसर एक ऐसी बीमारी जो अच्छे से अच्छे लोगों को तोड़कर रख देती है। लेकिन आंचल आज भी पूरे उत्साह से अपने जीवन का आनंद ले रही हैं।

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आंचल - फोटो : सोशल मीडिया
एक निम्न-मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मीं आंचल के पिता जी ऑटो चालक थे। कुछ लोगों के कहने पर उन्होंने अपने जीवन की पूरी कमाई एक जगह निवेश कर दी। पैसों के डूब जाने से घर की स्थिति बिगड़ने लगी और हालात बदतर हो गए। आंचल की मां मजबूरी में एक कारखाने में मजदूरी करने लगी। लेकिन मजदूरों की छटनी के कारण उनकी भी नौकरी चली गई। इसके बाद आंचल और उनके भाई ने पढ़ाई-लिखाई छोड़ दी। एक दोस्त ने रियल एस्टेट कंपनी में आंचल की एजेंट की जॉब लगवाई, लेकिन वहां भी उनके साथ 2.5 लाख रुपए की धोखाधड़ी हुई।
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आंचल - फोटो : सोशल मीडिया
ऐसे हुई बच्चों को खाना खिलाने की शुरूआत
आंचल एक दिन इलाज करवाकर लौट रही थी तभी ट्रैफिक सिग्नल पर एक बच्चा भीख मांगने आया। वह उस बच्चे को पैसे देने के बजाय एक ढाबे पर खाना खिलाने ले गई। बच्चे के कपड़े को देख ढाबा मालिक ने खाना देने से इंकार कर दिया। ढाबे की इस असमानता वाले रवैये ने आंचल को अंदर से झकझोर दिया। उसी दिन से वह रोज घर से खाना बनाकर रंगपुरी के बस्तियों में बच्चों को खिलाने जाती हैं।
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आंचल - फोटो : सोशल मीडिया
आंचल ने अपने इस प्रयास को आगे बढ़ाने के लिए एक एनजीओ 'मील ऑफ हैप्पीनेस' की शुरूआत किया। उनका सपना है कि वह हर दिन 5000 से अधिक बच्चों को खाना खिलाए। इसके लिए वह क्राउड फंडिंग कर रही हैं। आंचल के इस प्रयास को 'मैक्स अस्पताल' के डॉक्टरों ने 'निडर हमेशा' पुरस्कार से सम्मानित किया है।
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