आदिम युग में झांक कर देखें तो पता चलेगा जानवरों में इंसान का सबसे पहला दोस्त कोई बना है तो वह कुत्ता है। जी हां, युगों-युगों से आज तक यह जानवर अपनी वफादारी का सबूत देते हुए आ रहा है। समय-समय पर हमें कुत्तों की वफादारी से जुड़े किस्से-कहानियां जानने को मिलती रहती है लेकिन आज हम अपने पाठकों के साथ कुत्ते से जुड़ा एक ऐसा मामला शेयर करेंगे जिसे जानकर आपका दिल भी भर आएगा।
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ऐसी वफादारी शायद ही आपने अपने जीवन में कभी देखी होगी। एक रिपोर्ट की मानें तो अर्जेंटीना के विला कार्लो में एक शख्स के पास ऐसा डॉग था जिसने वफादारी के मायने ही बदल दिए। मिगुल गुजमेन नामक शख्स ने कैप्टन नामक एक जर्मन शेफर्ड डॉग को पाला था। वह अपने मालिक का वफादार था।
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लेकिन जब 2006 में गुजमेन की मौत हो गई तो सबसे ज्यादा दुख इस डॉगी को हुआ। वह 12 सालों तक अपने मालिक की कब्र की पहरेदारी करता रहा। उसकी वफादारी की वजह से कैप्टन को पूरा शहर जानने लगा। किसी से उस कुत्ते का हाल नहीं देखा गया। आखिर में कैप्टन नामक उस डॉगी ने अपने मालिक की कब्र पर ही अपने प्राण त्यागे।
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कैप्टन नामक यह कुत्ता 16 वर्ष का हो चुका था। उसका स्वास्थ पिछले कई दिनों से ठीक नहीं था। 20 फरवरी को उसने अपने मालिक की कब्र पर ही अंतिम सांसे ली। बता दें 2005 में मिगुल गुजमेन ने यह डॉग अपने 13 साल के बेटे को दे दिया था।
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जब गुजमेन की मौत हुई तभी से कैप्टन घर से कहीं गायब हो गया। घर वालों ने उसकी खूब तलाश की लेकिन कैप्टन का कुछ पता नहीं चला। एक दिन जब परिवार वाले दोबारा गुजमेन को श्रद्धांजलि देने कब्रिस्तान पहुंचे तो कैप्टन अपने मालिक की कब्र के पास बैठा नजर आया।
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गुजमेन की वाइफ यह देखकर हैरान थी कि आखिर कैप्टन ने गुजमेन की कब्र कैसे खोजी। जबकि उसे अंतिम संस्कार में नहीं ले जाया गया था। कब्रिस्तान में गुजमेन फैमिली को देखकर कैप्टन दूर से ही भौंका और पास जाकर बुरी तरह रोने लगा, गुजमेन फैमिली यह वाकयी बेहद भावुक क्षण था।
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गुजमेन की वाइफ ने कैप्टन को कई बार घर लाने की कोशिश की। एक बार कब्रिस्तान से वह गुजमेन फैमिली के पीछे घर तक गया। घर पर वक्त गुजारा लेकिन रात को फिर कहीं चला गया। अगली सुबह वह गुजमेन की कब्र के पास बैठा था।
कब्रिस्तान के केयरटेकर ने भी इस बात को स्वीकारा कि उसने डॉगी को उसी दिन से देखा जब गुजमेन को यहां दफनाया गया। वह कब्र को कभी नहीं छोड़ता था। अगर दिन में कहीं घूमने भी जाता था, तो शाम तक वापस यहीं आकर बैठ जाता था।