बेजुबान जानवर जिनके पास इंसानों जैसे सोचने समझने की शक्ति नहीं होती। उन्हें यह तक मालूम नहीं होता कि क्या सही है और क्या गलत। मगर हम इंसान सब समझते-बूझते हुए ऐसा करेंगे वाकयी यह बेहद चौंकाने वाला है।
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एक रिपोर्ट के मुताबिक यूपी के सीतापुर जिले से लगभग 70 किमी दूर स्थित अटवा कुरसठ गांव में बने एक मंदिर की अजीब कहानी है। कहते हैं कि यहां बंदरों को शराब पिलाई जाती है।
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चूंकि मंदिर गांव से भी दूर जंगल के बीच में बना है। यह चारों तरफ से खुला है और उसमें कोई दरवाजा या खिड़की नहीं है।
यहां कोई पुजारी भी नहीं बैठता। यहां आने वाले भक्त बाइक, कार आदि से आते हैं। इस मंदिर के भगवान को प्रसन्न करने के लिए यहां शराब का चढ़ावा चढ़ता है। आपकी जानकारी के लिए बताना चाहेंगे कि यह शिव भगवान का पुराना मंदिर है। यहां शिवलिंग पर भक्तजन अपनी मनोकामना के लिए शराब चढ़ाते हैं।
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ऐसी मान्यता है कि अगर शिवलिंग पर चढ़ने वाली शराब बंदर पी लेते हैं, तो प्रसाद चढ़ाने वाली की मन्नत जरूर पूरी होती है। इस मंदिर में भक्त शिवलिंग पर शराब और लाई का भोग चढ़ाते हैं। इस भोग को वहां रहनेवाले बंदर मजे से पीते और खाते हैं। लेकिन इन जानवरों को इसकी समझ नहीं। यहां आने वाले लोग मिट्टी या प्लास्टिक के ग्लास में बंदरों के लिए शराब भरकर रख जाते हैं। बंदर वहां चढ़ाई गई लाई को शराब के साथ खाते हैं।
मंदिर की छत पर उसे बनवाने वाले का नाम लिखा है। यह मंदिर जिला हरदोई के ग्राम अटवा कुरसठ निवासी राजेश कुमार सिंह ने 1992 में बनवाया था। मंदिर अटवा गांव के प्रतिष्ठित व्यक्ति रहे रामगुलाम सिंह सूर्यवंशी की जन्मभूमि पर बना है। उसके ऊपर उसे बनाने वाले कारीगर परागीलाल सिंह झबरा का भी नाम लिखा है।