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फैक्ट फाइल: लापरवाही से मरने वाले ज्यादातर हाथी

Sat, 04 Nov 2017 01:16 PM IST
amarujala.com- Presented by: राजेश सैनी
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वे भूगर्भीय हलचलों से बने विशाल गड्ढे में गिरकर मर गए। वे दलदल में फंसकर मर गए। वे बर्फ की सिल्लियों पर गिरकर मर गए। हजारों वर्ष पहले साइबेरिया में अनेक अभागे हाथी इसी तरह मारे गए। उनके संरक्षित फॉसिल के अध्ययन से प्रागैतिहासिक युग के उनके जीवन के बारे में पता चलता है। प्राकृतिक कारणों से मरे उन हाथियों के जैविक विश्लेषण से वैज्ञानिकों की एक टीम चौंकाने वाले निष्कर्ष पर पहुंची है :  असमय मृत्यु को प्राप्त हुए उन हाथियों में से ज्यादातर नर थे। स्वीडिश म्युजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री से जुड़े विकासवादी जीव विज्ञानी लव डेलेन कहते हैं,  ‘अनेक जीवों में पुरुष सदस्यों में ऐसी बेवकूफाना हरकत करने की आदत होती है, जिस कारण कई बार बेहद अजीब तरीके से उन्हें जान गंवानी पड़ती है। ऐसा लगता है कि हजारों वर्ष पहले साइबेरिया के विशाल नर हाथियों की मौत इसी तरीके से हुई थी।’ 

 
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करेंट बायोलॉजी नाम के जर्नल में छपे अध्ययन में उन्होंने और उनके सहयोगियों ने करीब 100 हाथियों की हड्डियों, दांत और सूंड़ का विश्लेषण किया और पाया कि उनमें से दो तिहाई नर थे। उनका आकलन है कि नर हाथियों की संख्या कम होने के कारण बहुत छोटी उम्र में उन्हें मां के संरक्षण से बाहर निकल जाना पड़ता होगा। डेलेन कहते हैं, ​’बुजुर्ग हथिनी ज्यादा समझदार होती है और उन्हें रास्तों की बेहतर जानकारी होती है।’ 

 
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उन हाथियों का जेनेटिक डाटा यह नहीं बताता कि मरने के समय उनकी आयु कितनी रही होगी, डाटा से सिर्फ उनके नर या मादा होने की जानकारी मिलती है। इन फॉसिल के डीएनए लेने के लिए लेवेन और उनकी टीम को बेहद सावधानी बरतनी पड़ी। उन्होंने एक साफ-सुथरी प्रयोगशाला में काम किया और वैसे ही लैब सूट पहने, जैसे इबोला के डॉक्टर पहनते हैं। फिर उन्होंने पाया कि उनमें ​66 नर और 29 मादा हाथी थे। 

इस अध्ययन की सबसे बड़ी सीमा यह है कि हजारों वर्ष पहले हाथियों के कम लिंगानुपात से संबंधित इसका निष्कर्ष आज के हाथियों के व्यवहार से जुड़े अध्ययन पर आधारित है। धारणा यह है कि आज की तरह उस दौर में भी हाथियों का समाज मातृसत्तात्मक था, जिसमें बुजुर्ग हथिनी युवा हाथियों की देखभाल करती थी।

 
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लेकिन चौदह-पंद्रह की उम्र में नर हाथी उस झुंड से निकलकर या तो अकेले रहते होंगे या युवाओं के झुंड में शामिल हो जाते रहे होंगे। उसी समय वे कोई ऐसा खतरनाक काम करते रहे होंगे, जिससे उनकी जान पर बन आई होगी। 

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया से जुड़ी जीव विज्ञानी बेथ शैपिरो कहती हैं कि इस अध्ययन के निष्कर्ष ने उन्हें चौंकाया है। वह कहती हैं कि इस आधार पर यह भी देखना चाहिए कि प्रागैतिहासिक युग में बाइसन और घोड़े जैसे दूसरे पशुओं में भी लिंगानुपात ऐसा ही था या नहीं। न्यूयॉर्क टाइम्स के लिए निकोलस सेंट फ्लेयर ने यह रिपोर्ट लिखी है।
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