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Bihar: अब आयुक्त कार्यालय के मुख्य द्वार के सामने धंसी सड़क, 900 करोड़ की स्मार्ट सिटी परियोजना की खुली पोल

Tue, 17 Dec 2024 04:02 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर

सार

Muzaffarpur News: आयुक्त कार्यालय के मुख्य द्वार के ठीक सामने सड़क अचानक धंस गई। यह घटना उस जगह हुई, जहां लगभग छह महीने पहले भी सड़क धंसी थी। स्थानीयों ने कहा कि अधिकारियों के कार्यालय के पास ऐसी स्थिति है, तो अन्य जगहों की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है।
 
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स्मार्ट सिटी परियोजना की खुली पोल - फोटो : अमर उजाला
मुजफ्फरपुर तिरहुत प्रमंडल मुख्यालय में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत हो रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। आयुक्त कार्यालय के गेट पर मुख्य सड़क धंसने की घटना ने न केवल अधिकारियों की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगाया है, बल्कि स्मार्ट सिटी के बहुप्रचारित प्रोजेक्ट की खामियों को भी उजागर कर दिया है। इस एक वर्ष में आधा दर्जन बार सड़कों के धंसने की घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे स्थानीय लोग परेशान और आक्रोशित हैं।
 
छह महीने में दूसरी बार धंसी सड़क
सोमवार सुबह आयुक्त कार्यालय के मुख्य द्वार के ठीक सामने सड़क अचानक धंस गई। यह घटना उस जगह हुई, जहां लगभग छह महीने पहले भी सड़क धंसी थी। उस समय नगर निगम का एक ट्रक उसमें फंस गया था। मरम्मत के बाद अधिकारियों ने दावा किया था कि भविष्य में ऐसी घटनाएं नहीं होंगी। लेकिन एक बार फिर सड़क धंसने की घटना ने इन दावों की पोल खोल दी है।
 
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स्मार्ट सिटी परियोजना की खुली पोल - फोटो : अमर उजाला
सड़क के नीचे कमजोर स्लैब, नाले से रिसता पानी
घटनास्थल की तस्वीरें और हालात साफ दिखा रहे हैं कि सड़क के नीचे का नाला बेहद कमजोर है। नाले के स्लैब में लोहे का सरिया तक नहीं डाला गया, जिससे उसकी मजबूती संदिग्ध हो गई। नाले के अंदर का पानी रिसता हुआ नजर आ रहा है, जो सड़क धंसने की मुख्य वजह मानी जा रही है।
 
900 करोड़ की परियोजना पर सवाल
मुजफ्फरपुर में 900 करोड़ रुपये की स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत कई सड़क और सीवरेज निर्माण कार्य चल रहे हैं। लेकिन बार-बार सड़क धंसने और मैनहोल ढक्कन टूटने जैसी घटनाओं ने इसकी गुणवत्ता को कठघरे में खड़ा कर दिया है। जानकारी के मुताबिक, सरैयागंज टावर से सिकंदरपुर और धर्मशाला चौक से इस्लामपुर तक बनाई गई सड़कों में कई जगह गड्ढे हो चुके हैं। वहीं, सीवरेज निर्माण के दौरान हुए हादसों में अब तक चार मजदूरों की जान जा चुकी है।
 
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स्मार्ट सिटी परियोजना की खुली पोल - फोटो : अमर उजाला
स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों की नाराजगी
स्मार्ट सिटी परियोजना के कार्यों से स्थानीय नागरिक और व्यापारी बेहद नाराज हैं। कपड़ा दुकानदार राहुल कुमार ने कहा कि सरैयागंज टावर क्षेत्र में सड़कें गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। इससे बार-बार ई-रिक्शा और ठेले पलट जाते हैं। स्थानीय संजीव कुमार ने बताया कि अधिकारियों के कार्यालय के पास ऐसी स्थिति है, तो अन्य जगहों की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है।
 
बार-बार मरम्मत के बावजूद सड़कें बदहाल
नगर निगम और स्मार्ट सिटी परियोजना के अधिकारी बार-बार मरम्मत कार्य कराते हैं, लेकिन उनकी गुणवत्ता इतनी खराब है कि सड़कें कुछ महीनों में ही धंस जाती हैं। निर्माण के दौरान मिट्टी सही तरीके से न बैठने और नालों की खराब स्थिति को बार-बार हादसों का कारण बताया जा रहा है।
 
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स्मार्ट सिटी परियोजना की खुली पोल - फोटो : अमर उजाला
क्या बड़ी दुर्घटना का है इंतजार?
बदहाल सड़कें और कमजोर सीवरेज सिस्टम बड़ी दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद स्मार्ट सिटी परियोजना और संबंधित एजेंसियों की लापरवाही थमने का नाम नहीं ले रही। लोगों का मानना है कि जब तक कोई बड़ी घटना नहीं होती, तब तक जिम्मेदार अधिकारियों की नींद नहीं खुलेगी।
 
कब सुधरेगा सिस्टम?
स्मार्ट सिटी परियोजना को लेकर लोगों में उम्मीद थी कि यह शहर को बेहतर बनाएगी। लेकिन लगातार हो रही घटनाओं ने इस परियोजना की साख पर बट्टा लगा दिया है। स्थानीय लोगों ने संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह है कि इस बार की घटना के बाद प्रशासन कोई ठोस कदम उठाता है या फिर मामले को दबा दिया जाता है।
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