देव सूर्य मंदिर
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पौराणिक कथा- श्वेत कुष्ठ से मुक्ति और मंदिर का निर्माण
जनश्रुति के अनुसार, देव सूर्य मंदिर का निर्माण राजा ऐल ने करवाया था। कथा है कि राजा ऐल, जो एक समय श्वेत कुष्ठ रोग से पीड़ित थे, देव के वनप्रांतर में एक सरोवर के जल के संपर्क में आकर रोग मुक्त हो गए। इस चमत्कारिक घटना के बाद, उन्होंने रात को स्वप्न में भगवान भास्कर से मंदिर निर्माण और मूर्ति प्रतिष्ठा का निर्देश प्राप्त किया। राजा ऐल ने उसी निर्देश के अनुसार, सरोवर से मूर्ति को निकालकर एक भव्य मंदिर का निर्माण कराया, जिसे आज हम देव सूर्य मंदिर के रूप में जानते हैं।
देवशिल्पी विश्वकर्मा का अद्भुत निर्माण
इस मंदिर के निर्माण को लेकर यह भी मान्यता है कि इसका निर्माण देवशिल्पी विश्वकर्मा ने एक ही रात में अपने हाथों से किया था। इसके अद्भुत शिल्प और वास्तुकला से ऐसा प्रतीत होता है जैसे इसे किसी सामान्य शिल्पकार ने नहीं, बल्कि स्वयं देवताओं ने निर्मित किया हो। बिना किसी सीमेंट या चूने का उपयोग किए, विभिन्न आकारों के पत्थरों को जोड़कर बनाया गया यह मंदिर भारत में स्थापत्य कला का अनूठा उदाहरण है।