भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) (NHAI) ने पूरे भारत में नेशनल हाईवे (राष्ट्रीय राजमार्गों) पर कुल 13,795 ब्लैक स्पॉट की पहचान की है। इन ब्लैक स्पॉट में से, देश भर में 9,525 ब्लैक स्पॉट पर अल्पकालिक सुधार उपाय पूरे किए गए हैं। जबकि 4,777 ब्लैक स्पॉट पैच को स्थायी रूप से ठीक किया गया है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में यह जानकारी दी है।
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लोकसभा में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी।
- फोटो : PTI
गडकरी ने आगे बताया कि कर्नाटक से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर सबसे ज्यादा 1,217 ब्लैक स्पॉट हैं। जिसके बाद आंध्र प्रदेश और तेलंगाना का नंबर आता है। आंध्र प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों पर कुल 1,202 ब्लैक स्पॉट की पहचान की गई है। जबकि तेलंगाना में यह संख्या 1,121 है।
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National Highway in Karnataka
- फोटो : X@nitin_gadkari
मंत्री ने आगे कहा कि सरकार ने इन ब्लैक स्पॉट पर तत्काल अल्पकालिक सुधार उपायों के लिए कदम उठाए हैं। जिसमें रोड मार्किंग (सड़क चिह्नों), साइनेज, क्रैश बैरियर, रोड स्टड, डेलिनेटर की स्थापना, अनधिकृत खुले मीडियन को बंद करना, ट्रैफिक को शांत करने के उपाय आदि शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि साइट जांच के अनुसार ऐसे ब्लैक स्पॉट पर सड़क ज्यामितीय सुधार, जंक्शन सुधार, कैरिजवे का स्पॉट चौड़ा करना, अंडरपास और ओवरपास का निर्माण आदि जैसे दीर्घकालिक सुधार उपाय भी किए गए हैं। गडकरी ने कहा कि ये कदम स्थायी सुधार उपायों के रूप में उठाए गए हैं।
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Highway
- फोटो : iStock
इससे पहले, दिसंबर 2023 में, मंत्री ने लोकसभा को सूचित किया था कि देश के राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में तमिलनाडु में सबसे ज्यादा 748 ब्लैक स्पॉट हैं। उन्होंने तब कहा था कि सरकार ने देश में पूरे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में कुल 5,803 ब्लैक स्पॉट की पहचान की है। जिसमें तमिलनाडु के बाद पश्चिम बंगाल और तेलंगाना में क्रमशः 701 और 485 ब्लैक स्पॉट हैं।
राष्ट्रीय राजमार्गों पर ब्लैक स्पॉट क्या है?
राष्ट्रीय राजमार्गों पर कुछ स्थानों को निश्चित संख्या में दुर्घटनाओं के आधार पर ब्लैक स्पॉट के रूप में पहचाना जाता है, जिसमें मौतें और गंभीर चोटें शामिल हैं। ब्लैक स्पॉट राष्ट्रीय राजमार्गों पर वे स्थान माने जाते हैं, जो लगभग 500 मीटर का क्षेत्र है। जहां पिछले तीन वर्षों के दौरान और कम से कम पांच सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं, जिसकी वजह से 10 मौतें हुई हैं। इन क्षेत्रों को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा ब्लैक स्पॉट के रूप में चिह्नित किया जाता है। NHAI और MoRTH मुख्य रूप से राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास, संचालन और रखरखाव के लिए जिम्मेदार हैं।