इथियोपिया ने गैसोलीन से चलने वाले निजी वाहनों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। लेकिन इलेक्ट्रिक वाहनों पर शिफ्ट करना उसके लिए इतना आसान नहीं होगा। जानें किन चुनौतियों का सामना कर रहा है अफ्रीका का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला देश।
इस साल की शुरुआत में जब इथियोपिया में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही थीं, तो अवागचेव सेलेशी ने इलेक्ट्रिक कार खरीदने का फैसला किया। यह सरकार के गैसोलीन से चलने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने के नए प्रयासों के अनुरूप था। लेकिन महीनों बाद, उन्हें संदेह है कि क्या उनका यह फैसला सही था।
उन्हें राजधानी अदीस अबाबा में बिजली की अनियमित आपूर्ति से लेकर स्पेयर पार्ट्स की कमी तक कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
पेश से सरकारी अधिकारी सेलेशी ने कहा, "मेरी कार को चार्ज करना एक चुनौती रही है। चीन से आयात किए जाने वाले स्पेयर पार्ट्स महंगे हैं। कुछ ही मैकेनिक हैं जो ऐसी कारों को ठीक कर पाते हैं। और ऐसी कारों की रीसेल कीमत बहुत कम है।"
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Electric Car
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इथियोपिया की ईवी चुनौती
सेलेशी की परेशानियां इथियोपिया के लिए व्यापक चुनौतियों की ओर इशारा करती हैं। जनवरी में, पूर्वी अफ्रीकी देश गैर-इलेक्ट्रिक निजी वाहनों के आयात पर प्रतिबंध लगाने वाला दुनिया का पहला देश बन गया।
इस निर्णय से उन अधिकारियों पर दबाव कम हुआ है जो ईंधन की लागत को सब्सिडी देने के लिए विदेशी मुद्रा खर्च करते हैं। लेकिन यह इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति बढ़ते उत्साह को भी दर्शाता है। क्योंकि दुनिया जलवायु परिवर्तनकारी उत्सर्जन को कम करने के लिए अधिक हरित प्रौद्योगिकियों (ग्रीन टेक्नोलॉजी) की मांग कर रही है।
इस महीने की शुरुआत में, इथियोपिया की सरकार ने ईंधन की कीमत में 8 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की थी। यह अफ्रीका के दूसरे सबसे अधिक आबादी वाले देश में सभी ईंधन सब्सिडी को धीरे-धीरे खत्म करने की योजना के तहत किया गया था।
अधिकारियों ने इथियोपिया में गैर-इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लागू करने में कुछ सफलता का दावा किया है। और अब हर महीने देश में 100,000 से ज्यादा इलेक्ट्रिक कारें आयात की जा रही हैं।
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हाइड्रो-पावर पर जोर
आधिकारिक लक्ष्य 2030 तक मासिक आयात आंकड़ा बढ़ाकर 5 लाख करना है। उस समय तक, नील नदी पर इथियोपिया द्वारा बनाया गया एक बड़ा नया बांध पूरी क्षमता से बिजली उत्पादन करने लगेगा।
इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद ने इस साल की शुरुआत में एक टेलीविजन संबोधन में कहा था कि ग्रैंड रेनेसां डैम एक साल के भीतर 5,000 मेगावाट से ज्यादा बिजली पैदा करना शुरू कर देगा। अधिकारियों का कहना है कि ऐसी क्षमता इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने का समर्थन करेगी।
फिलहाल, 5 मिलियन (50 लाख) से ज्यादा लोगों की आबादी वाले अदीस अबाबा शहर में बहुत से लोगों को संदेह है कि देश बिना किसी और जरूरी बुनियादी ढांचे और सेवाओं के इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को हासिल कर सकता है।
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ईवी की मरम्मत बनी चुनौती
कुछ गैरेज मालिक जो टूटी हुई इलेक्ट्रिक कारों को ठीक कर सकते हैं, उनका कहना है कि वे बहुत ज्यादा परेशान हैं। जबकि ग्राहकों का कहना है कि प्रतिस्पर्धा की कमी के कारण उनसे ज्यादा पैसे लिए जा रहे हैं।
अदीस अबाबा के एक मैकेनिक योनास टैडेल ने कहा, "इथियोपिया में दो या तीन गैरेज हैं जो नई ऊर्जा वाहनों की मरम्मत कर सकते हैं। और कई उपभोक्ताओं को इस बात की जानकारी नहीं है कि ऐसे वाहनों की देखभाल कैसे की जाए।" उन्होंने कहा, "मैकेनिक के रूप में, हमारे पास ऐसी कारों को ठीक करने के लिए उपकरण, स्पेयर पार्ट्स और जानकारी का भी अभाव है।"
कई इलेक्ट्रिक वाहन अब गैरेज और पार्किंग में खड़े हैं और उन्हें चीन से आने वाले पुर्जों का इंतजार है।
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EV charging
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इथियोपिया का ईवी पर निवेश
इथियोपिया के परिवहन मंत्री बरेओ हसन बरेओ ने कहा है कि उनका मानना है कि देश हरित अर्थव्यवस्था की विरासत के साथ एक आदर्श राष्ट्र बन सकता है। जिसमें इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता देना एक प्रमुख हिस्सा है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने बताया कि सरकार सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों में निवेश करेगी। और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए स्थानीय स्तर पर ईवी बैटरी बनाने वाला प्लांट बनाने की योजना है।
निजी प्रयासों में इथियोपिया में इलेक्ट्रिक वाहन बनाने के लिए ओलंपियन हैले गेब्रेसेलासी और दक्षिण कोरियाई कार निर्माता ह्यूंदै के बीच सहयोग शामिल है, जो अब नाकाम हो गया है। माना जाता है कि सामग्री की सोर्सिंग को लेकर यह प्रयास फेल हो गया।
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Electric Vehicles Charging Station
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ईवी की आई बाढ़
अदीस अबाबा में रहने वाले अर्थशास्त्री सैमसन बरहेन ने कहा कि खराब बुनियादी ढांचे के बावजूद स्थानीय बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की अचानक बाढ़ आ गई है। जिससे ग्राहकों के लिए इसे सहजता से अपनाना मुश्किल हो रहा है। कुछ ईवी लगभग 20,000 डॉलर में बिकते हैं।
बरहेन ने कहा, "बुनियादी ढांचे की कमी, ईवी रखरखाव में विशेषज्ञ मैकेनिकों की कमी और चीनी ब्रांडों की बाढ़ के कारण बहुत कम लोग इलेक्ट्रिक कार खरीदने का जोखिम उठाने को तैयार हैं। जिनकी विस्तृत जानकारी और दीर्घकालिक मौजूदगी संदिग्ध है।"
लेकिन उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि इथियोपिया अगले दशक में अपनी औद्योगिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करते हुए अपेक्षित 500,000 ईवी को बिजली प्रदान करने में सक्षम है।
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सेकंड हैंड कार बाजार में तेजी
कुछ इथियोपियाई पहले से ही इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल छोड़ रहे हैं। और गैसोलीन से चलने वाले वाहनों का सेकेंड हैंड कारोबार जारी है। इथियोपिया में कम से कम 1.2 मिलियन (12 लाख) वाहन हैं, और उनमें से सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा इलेक्ट्रिक है।
व्यवसायी यारेड एलेमायेहू ने एक चीन निर्मित इलेक्ट्रिक वाहन खरीदा, जिसका इस्तेमाल वह टैक्सी सर्विस के लिए करना चाहता था। वह जानता था कि कार में मैकेनिकल खराबी है, लेकिन उसे विश्वास था कि इसे ठीक किया जा सकता है। एक मैकेनिक ने इस पर असहमति जताई।
उम्मीद पर खरी नहीं उतर रही ईवी
आखिर में, उसने कार को घाटे में बेच दिया और 20,000 डॉलर के बराबर कीमत वाली एक टोयोटा कोरोला खरीदी। यह 2007 में बनी एक कार है जो उसे ज्यादा विश्वसनीय लगी। कार की इस कीमत में गैसोलीन वाहनों पर लगाए गए भारी टैक्स शामिल थे। टैक्स वाहन के आयात की लागत से ज्यादा हो सकते हैं।
उन्होंने कहा, "अपनी पुरानी इलेक्ट्रिक कार को चार्ज करने के अलावा, वह बार-बार खराब हो जाती थी। गैराज में ओवरचार्जिंग होती थी, और गैराज में वाहनों की लाइन लगने से हम परेशान हो जाते थे।"
टैक्सी ड्राइवर डेरेजे हेलू, जिन्होंने इस साल की शुरुआत में अपनी चीनी निर्मित ई-स्टार इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदी थी, वे उससे बहुत उम्मीदें लगाए हुए थे। उन्होंने कहा कि उनकी उम्मीदें धराशायी हो गईं।
उन्होंने कहा, "ऐसी कार के साथ, मुझे डर है कि अगर मैं अदीस अबाबा से दूर चला गया, जहां कोई चार्जिंग स्टेशन नहीं है, तो मैं फंस सकता हूं।"