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महज 10 सालों में कारों से ऐसे गायब हुए ये फीचर जैसे ‘गधे के सिर से सींग’, जानकर आप भी कहेंगे Oh No!

Sat, 11 Jul 2020 02:28 PM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Auto Expo 2020 Renault Symbioz - फोटो : For Refernce Only
पिछले एक दशक में कारों में कई बदलाव देखने को मिले हैं। कारों में आ रहे फीचर्स में लगातार चेंज देखने को मिल रहा है। हालांकि बदलाव प्रकृति का नियम है, याद कीजिए वो वक्त, जब आप 7-8 साल पहले नई कार लेने गए थे और उस समय फीचर्स देख कर आप फिदा हो गए थे। यहां तक कि उनके लिए अपनी जेब भी हल्की करने को तैयार थे। मौजूदा दौर में वे दशक पुराने फीचर्स आपको अतीत की याद दिलाते हैं। उस दौर में ज्यादातर फीचर मैनुअल होते थे, जो कम खर्चीले भी थे। जानते हैं कुछ ऐसे ही दशकों पुराने फीचर्स के बारे में जो जल्द ही आने वाले सालों में इतिहास बन जाएंगे...
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Car Plant - फोटो : for Reference Only

मजबूत बॉडी

तकरीबन दस साल पहले कार की मजबूती पर ध्यान दिया जाता था। उस समय की कारें मजबूत बॉडी की होती थीं। लेककिन अब कारें न केवल वजन में हल्की हैं, बल्कि ज्यादा माइलेज और बेहतर परफॉरमेंस वाली भी हैं। वहीं ये प्रदूषण भी कम करती हैं। अंदाजा इसी से लगा सकते हैं 10 साल पहले आने वाली स्विफ्ट का वजन 965 से 1060 किग्रा होता था, जो अब घट कर 855 से 985 किग्रा तक रह गया है। ऐसा मारुति के नए Heartect प्लेटफॉर्म की वजह से हुआ।
 
 
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car ashtray with lighter - फोटो : For Refernce Only

एशट्रे और सिगरेट लाइटर

80 और 90 के दशक में कारों में ये दोनों चीजें बेहद कॉमन थीं। कार निर्माता कंपनियां इन फीचर्स को टॉप वैरिएंट्स में जरूर शामिल करती थीं। वहीं ग्राहक भी इन फीचर्स के न होने पर नाक भौं सिकोड़ लिया करते थे। उस दौरान ककंपनियां न केवल आगे बल्कि पीछे की सीटों के लिए दरवाजों में एशट्रे देती थीं। लेकिन अब कंपनियां आपके स्वास्थ्य के प्रति सचेत हो गई हैं उनकी जगह कपहोल्डर ने ले ली है। कार स्मोकिंग के शौकीन अब रिमुवेबल एशट्रे का इस्तेमाल करते हैं।
 
 

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Car steering - फोटो : For Refernce Only

हाइड्रॉलिक पावर स्टीयरिंग

एक वक्त था जब कारों में कॉमन स्टीयिरिंग हुआ करते थे, बाद में टॉप वैरिएंट्स में हाइड्रॉलिक स्टीयरिंग आने लगे जो उनके मुकाबले ज्यादा सुविधाजनक थे। लेकिन उसके बाद कंपनियों ने कॉस्टिंग कम रखने और जद्दोजहद से बचने के लिए इलेक्ट्रॉनिक पावर स्टीयरिंग देने शुरू कर दिए। हालांकि ये हाइड्रॉलिक के मुकाबले ज्यादा सुविधाजनक हैं, बशर्ते जब तक खराब न हों।
 
 
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Boot space - फोटो : for Reference Only

फुल साइज स्पेयर व्हील

पहले कंपनियां गाड़ियों में चारों टायर्स के साइज के मुताबिक स्पेयर टायर देती थीं, लेकिन अब कम बूट स्पेस के चलते हल्के और छोटे साइज के टायर दे रही हैं। जो लोग 5-टायर रोटेशन करना पसंद करते हैं, उन्हें इससे प्रॉब्लम होती है। यहां तक कि अगर इमरजेंसी में कार पंचर हो जाए और आपको स्पेयर व्हील लगाना पड़े, तो आप पहले जैसी रफ्तार पर कार नहीं चला सकते। कुल मिलाकर ये कि आजकल की गाड़ियों में आ रहे स्पेयर टायर केवल इमरजेंसी के लिए हैं।
 
 
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manual car window - फोटो : For Refernce Only

मैनुअल विंडो

आजकल लोवर या एंट्री लेवल बेस मॉडल्स में अभी भी पीछे की तरफ मैनुअल विंडो दी जाती हैं। लेकिन एक वक्त था, जब कारों में मैनुअल विंडो ही मिलते थे। हालांकि उनमें दिक्कत भी कम होती थी। लेकिन अब ऑटोमैटिक विंडो ने उनकी जगह ले ली है। हालंकि इससे बैटरी की परफॉरमेंस पर असर पड़ता है।
 
 
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Ford Endeavour - फोटो : For Reference Only

एसयूवी में टेलगेट पर लगे स्पेयर व्हील

एक वक्त था जब एसयूवी की पहचान उसके टेलगेट पर लगे स्पेयर व्हील से होती थी। इस लुक से एसयूवी हैवी भी लगती थी। उस समय इनका लोगों में उतना क्रेज था कि लोग ऑफ्टर मार्केट टेलगेट पर स्पेयर व्हील लगवाया करते थे। हालांकि उनके चोरी होने का डर भी रहता था। अभी भी कुछ कंपनियां टेलगेट पर स्पेयर व्हील दे रही हैं, लेकिन ज्यादातर कार निर्माता अब बूट स्पेस या अंडर बॉडी स्पेयर व्हील्स दे रही हैं।
 
 

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Car Fuel Tank - फोटो : For Refernce Only

बड़े फ्यूल टैंक

पुरानी गाड़ियों में बड़ा फ्यूल टैंक मिलता था, जो आमतौर पर 45 लीटर तक का होता था। लेकिन अब ज्यादा माइलेज और हाईवे पर पेट्रोल पंपों की लाइनें हैं, तो तेल की कोई दिक्कत नहीं होती है। कंपनियों ने भी स्पेस बचाने के लिए कम क्षमता वाली टंकी देना शुरू कर दिया है। टाटा अल्टॉज में 37 लीटर फ्यूल टैंक मिलता है, जबकि बोल्ट में 44 लीटर का था। वहीं ह्यूंदै ऑरा में 37 लीटर तो ह्यूंदै एक्सेंट में 43 लीटर फ्यूल टैंक था। नई वैगन आर में 32 लीटर श्रपुरानी 35 लीटर) स्विफ्ट/डिजायर में 37 लीटर (पहले 42 लीटर), जबकि क्विड में 28 लीटर का फ्यूल टैंक मिलता है।   
 
 

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Infotainment system - फोटो : For Refernce Only

ऑक्स पोर्ट

आज से तकरीबन 10 साल पहले कारों में ऑक्स पोर्ट मिलते थे, लेकिन नए टाइप के टचस्क्रीन वाले इंफोटेनमेंट सिस्टम में ये नदारद हैं। शुरुआत में सीडी प्लेयर का जमाना था, उसके बाद यूएसबी पोर्ट आने शुरू हुए और उसी दौरान ऑक्स पोर्ट मोबाइल फोन को कनेक्ट करने के लिए आते थे। लेकिन अब इंफोटेनमेंट सिस्टम ब्लूटुथ सपोर्ट वाले हैं और एपल कारप्ले और एंड्रॉयड ऑटो को सपोर्ट करते हैं। कई वाहन निर्माताओं ने ऑक्स पोर्ट की जगह अतिरिक्त यूएसबी पोर्ट देना शुरू कर दिया है। ताकि स्मार्टफोन चार्जिंग में कोई दिक्कत न हो।
 
 

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2020 hyundai Creta - फोटो : For Refernce Only

बैजिंग

पहले कंपनियां कारों के पीछे मॉडल के साथ उसका वैरिएंट भी लिखती थीं, जिसे देखते ही पता चल जाता था कि कार मैनुअल है या ऑटोमैटिक, साथ ही डीजल पर चलती है या पेट्रोल पर। कुल मिलाकर लंबी-चौड़ी बैजिंग कार की जान होती थी। लेकिन अब कंपनियों ने लागत घटाने के लिए केवल मॉडल का नाम देना शुरू कर दिया है। अब आसानी से वैरिएंट का नाम जानना मुश्किल हो गया है।
 
 
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folding sedan seats Toyota corolla - फोटो : For Refernce Only

फोल्डिंग रिअर सीट्स

पुरानी सेडान कारों जैसे टोयोटा कोरोला में पीछे की सीटों को फोल्ड करने की सुविधा होती थी, ताकि जरूरत पड़ने पर बूट स्पेस को बढ़ाया जा सके। इसका बहुत फायदा भी होता था। ज्यादा लगेज भी आसानी रखा जाता था, वही अब कंपनियों ने कॉस्ट कटिंग के चलते सेडान कारों में फोल्डिंग सीट की सुविधा देनी बंद कर दी है। नई एलांट्रा और सिविक में फिक्स्ड सीटें मिलती हैं। केवल हैचबैक, क्रॉसओवर और एसयूवी में ही फोल्डिंग सीटें आती हैं।
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