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Second Hand Cars: भारत में 2030 तक पुरानी कारों की बिक्री सालाना एक करोड़ के पार हो जाएगी, रिपोर्ट में खुलासा

Fri, 24 Jan 2025 04:29 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारतीय सेंकड हैंड कार (यूज्ड-कार) बाजार 2030 तक सालाना 1 करोड़ बिक्री का आंकड़ा पार कर जाएगा। और शहरी और छोटे शहरों दोनों में इसकी बिक्री बढ़ेगी। 
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Second Hand Cars - फोटो : Adobe Stock
भारतीय सेंकड हैंड कार (यूज्ड-कार) बाजार 2030 तक सालाना 1 करोड़ बिक्री का आंकड़ा पार कर जाएगा। और शहरी और छोटे शहरों दोनों में इसकी बिक्री बढ़ेगी। CARS24 (कार्स 24) की एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। 

'गियर ऑफ ग्रोथ: द 2024 इंडियन यूज्ड-कार मार्केट रिपोर्ट' के अनुसार, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और दिल्ली देश में यूज्ड-कार बूम को आगे बढ़ा रहे हैं।
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Used Cars - फोटो : Freepik
कार्स 24 के सह-संस्थापक गजेंद्र जांगिड़ ने कहा, "बाजार के कैलेंडर वर्ष 2023 में 4.6 मिलियन बिक्री से बढ़कर कैलेंडर वर्ष 2030 तक 10.8 मिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। जो 13 प्रतिशत की प्रभावशाली CAGR के साथ आगे बढ़ेगा।"

उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे ग्राहकों की प्राथमिकताएं ज्यादा किफायती और भरोसेमंद विकल्पों के लिए बदल रही हैं। वैसे-वैसे नई कार बाजार के मुक़ाबले पुरानी कारों के बाजार में तेजी देखी जा रही है।
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Second Hand Cars - फोटो : Freepik
एसयूवी की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा
रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में 16.7 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ एसयूवी पुरानी कारों के बाजार पर हावी रहेगी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इनका स्पेशियस डिजाइन, बहुमुखी प्रतिभा और प्रीमियम अपील इन्हें शहरी और ग्रामीण दोनों ही बाजारों में पसंदीदा बनाती है।

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Second Hand Cars Resale Value - फोटो : Freepik
रिपोर्ट में कहा गया है कि मारुति सुजुकी स्विफ्ट मेट्रो और नॉन-मेट्रो दोनों शहरों में सबसे ज्यादा मांग वाला मॉडल बन गया है। 

इसके अलावा, ह्यूंदै सैंट्रो, टाटा टियागो एनआरजी और मारुति वैगन आर जैसे मॉडलों ने लगातार बेहतरीन रीसेल वैल्यू दी है। जिससे बजट के प्रति जागरूक और मूल्य-संचालित खरीदारों के बीच उनकी लोकप्रियता मजबूत हुई है।
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Second Hand Cars - फोटो : Adobe Stock
रिपोर्ट के अनुसार, नई कारों के लिए फाइनेंसिंग (वित्तपोषण) में खासी बढ़ोतरी देखी गई है। जो 2010 में 60 प्रतिशत से बढ़कर 2024 में 84 प्रतिशत हो गई है। जो व्हीकल ओनरशिप (वाहन स्वामित्व) के लिए लोन पर उपभोक्ताओं की बढ़ती निर्भरता को उजागर करती है।
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Second Hand Cars - फोटो : PTI
रिपोर्ट में इस बात पर रोशनी डाली गई है कि कोविड के बाद के दौर में उपभोक्ता की प्राथमिकताओं में महत्वपूर्ण बदलाव देखा गया है। जिसमें 12 प्रतिशत कार खरीदार साझा परिवहन के बजाय सुविधा और सुरक्षा के लिए पर्सनल मोबिलिटी (व्यक्तिगत गतिशीलता) को प्राथमिकता दे रहे हैं।
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