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Road Accident: सड़क पर वाहन की दुर्घटना हो जाए तो क्या करें? इन छह सुरक्षा नियमों को अपनाने से बच सकती है जान

Tue, 17 Feb 2026 06:41 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत में कार एक्सीडेंट के बाद, सबसे पहली प्राथमिकता हमेशा सुरक्षा होती है - उसमें बैठे लोगों, सड़क पर चलने वाले दूसरे लोगों और ट्रैफिक फ्लो के लिए। सड़क दुर्घटना के तुरंत बाद के समय में शहर और हाईवे दोनों जगहों पर चोट के नतीजे, इमरजेंसी में मदद और सेकेंडरी टक्कर का खतरा तय करते हैं। 
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सड़क हादसा - फोटो : संवाद

भारत में सड़क हादसे के बाद शुरुआती कुछ मिनट बेहद निर्णायक होते हैं। यही समय चोटों की गंभीरता, आपातकालीन मदद और दोबारा टक्कर (सेकेंडरी एक्सीडेंट) के जोखिम को तय करता है। भीड़भाड़, मिश्रित ट्रैफिक और सीमित सड़क किनारे की जगह के कारण, छोटा हादसा भी खतरनाक बन सकता है। नीचे दिए गए 6 सेफ्टी स्टेप्स शहर, हाईवे और नए ड्राइवर्स, सबके लिए मददगार हैं।

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सड़क हादसा - फोटो : संवाद

1) क्या कोई घायल है? पहले जांच और प्राथमिक मदद करें

  • सबसे पहले खुद और यात्रियों की चोटों की जांच करें।

  • किसी के घायल होने पर तुरंत आपातकालीन नंबर 112 पर कॉल करें।

  • गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को बिना जरूरत हिलाएं नहीं, जब तक आग या तेज ट्रैफिक का तात्कालिक खतरा न हो।

  • सामान्य फर्स्ट-एड बड़ी मदद आने तक स्थिति बिगड़ने से रोक सकती है।

  • सरकार की पीएम राहत योजना के तहत सड़क हादसा पीड़ितों को 7 दिन तक 1.5 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज मिलता है।

  • गैर-गंभीर मामलों में 24 घंटे तक स्टेबलाइजेशन केयर और गंभीर मामलों में 48 घंटे से अधिक इलाज कवर होता है (जांच के बाद)।

 

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सड़क हादसा - फोटो : संवाद

2) क्या वाहन चलने लायक है? तो सुरक्षित जगह पर ले जाएं

  • अगर वाहन चल सकता है और कोई गंभीर रूप से घायल नहीं है, तो उसे रोड शोल्डर या नजदीकी सुरक्षित जगह पर ले जाएं।

  • लाइव लेन खाली करने से दूसरी टक्कर का जोखिम कम होता है। खासकर हाईवे और ब्लाइंड अर्बन स्ट्रेच पर। 

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सड़क हादसा - फोटो : ANI

3) ट्रैफिक को कैसे चेतावनी दें?

  • तुरंत हैजर्ड लाइट्स ऑन करें।

  • शहर में वाहन के पीछे 20-30 मीटर पर और हाईवे पर इससे ज्यादा दूरी पर रिफ्लेक्टिव वार्निंग ट्रायंगल या कोई दिखने वाला मार्कर रखें।

  • समय रहते चेतावनी मिलने से दूसरे ड्राइवर्स सुरक्षित तरीके से स्पीड कम कर पाते हैं या लेन बदल लेते हैं।

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सड़क हादसा - फोटो : अमर उजाला

4) आग का खतरा तो नहीं? इंजन बंद करें

  • टक्कर के बाद इग्निशन बंद कर दें ताकि फ्यूल और इलेक्ट्रिकल जोखिम घटे।

  • धुआं, ईंधन की गंध या फ्लूइड लीक दिखे तो लोगों को वाहन से दूर रखें।

  • आग की आशंका हो तो बोनट न खोलें- ऑक्सीजन आग को भड़का सकती है।

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निर्माणाधीन ओवरब्रिज पर बोल्डर से टकराई कार - फोटो : संवाद

5) यात्री ट्रैफिक से दूर हैं? सुरक्षित जगह पर रखें

  • यात्रियों को सड़क किनारे सुरक्षित स्थान या उपलब्ध बैरियर के पीछे ले जाएं।

  • वाहन के पास या लेन में खड़ा होना खतरनाक है, खासकर कम दृश्यता या तेज रफ्तार वाले इलाकों में।

  • नुकसान, वाहन की स्थिति, नंबर प्लेट और आसपास के दृश्य की स्पष्ट तस्वीरें लें। टाइम-स्टैम्प्ड सबूत क्लेम विवाद कम करता है।

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हाईवे पर खड़ी क्षतिग्रस्त कार - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

6) मदद और ट्रैफिक सपोर्ट कैसे बुलाएं?

  • वाहन न हिल पाए तो रोडसाइड असिस्टेंस/टोइंग या स्थानीय ट्रैफिक हेल्पलाइन से संपर्क करें।

  • व्यस्त सड़कों पर ट्रैफिक पुलिस की मदद से फ्लो सुरक्षित रखा जा सकता है।

  • जल्दी सहायता मिलने से जाम और खतरे की अवधि कम होती है।

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घटनास्थल पर क्षतिग्रस्त पड़ी कार तथा आसपास लोगों लगी भीड़ - फोटो : अमर उजाला

एक और जरूरी कदम क्या है?

  • अपनी इंश्योरेंस कंपनी को तुरंत सूचना दें। देरी से क्लेम में कटौती हो सकती है।

  • आधिकारिक हेल्पलाइन या ऐप से संपर्क करें और क्लेम रेफरेंस नंबर नोट करें।

भारत में ये सेफ्टी स्टेप्स क्यों खास मायने रखते हैं?
भारतीय सड़कों पर हादसे अक्सर घनी ट्रैफिक में होते हैं, जहां पैदल यात्री, दोपहिया और भारी वाहन साथ चलते हैं। सेकेंडरी एक्सीडेंट, पैदल यात्रियों का जोखिम और आग की आशंका, सब वास्तविक खतरे हैं। तुरंत सुरक्षा कदम उठाने से जिंदगियां बचती हैं, नुकसान घटता है और वाहन रिकवरी सुरक्षित होती है। कानूनी या इंश्योरेंस प्रक्रिया से पहले यही सबसे जरूरी है। 

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