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EV: ईंधन महंगा होने से रफ्तार पकड़ेगा ईवी मार्केट, वाहन निर्माता कंपनियों ने उत्पादन बढ़ाने के लिए संभाली कमान

Fri, 15 May 2026 04:19 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इलेक्ट्रिक गाड़ी बनाने वाली कंपनियां ईंधन की बढ़ती कीमतों से बढ़ी मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन बढ़ा रही हैं। और 15 मई को कीमतों में बढ़ोतरी से EV की तरफ झुकाव और बढ़ने की उम्मीद है।
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Tata Punch EV - फोटो : Tata Motors

ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की मांग में भारी तेजी आई है। 15 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के बाद वाहन निर्माताओं ने ईवी का उत्पादन बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं। माना जा रहा है कि इस मूल्य वृद्धि से ग्राहकों का रुझान इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ और ज्यादा मजबूत होगा।

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MG Windsor Electric Car - फोटो : JSW MG Motor India

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी क्यों हुई?

तेल विपणन कंपनियों (OMC) ने ईंधन की कीमतों में यह बदलाव एक लंबे अंतराल के बाद किया है:

  • दामों में इजाफा: ईरान युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में आए उछाल के असर को कम करने के लिए पेट्रोल और डीजल के दामों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। पिछले चार वर्षों में यह इस तरह की पहली बढ़ोतरी है।

  • पीएम की अपील का असर: यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नागरिकों से ऊर्जा संरक्षण और विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) बचाने के लिए ईंधन की खपत कम करने की अपील के कुछ दिनों बाद आया है। इसके साथ ही सीएनजी (CNG) के दाम भी 2 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ा दिए गए हैं।

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Bajaj Chetak 3001 Electric Scooter - फोटो : Chetak

दिग्गज वाहन निर्माता कंपनियों की उत्पादन को लेकर क्या योजना है?

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मांग को पूरा करने के लिए देश की बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों ने उत्पादन बढ़ाने की घोषणा की है:

  • Tata Motors: टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के एमडी और सीईओ शैलेश चंद्रा ने 14 मई को कंपनी के चौथी तिमाही (Q4) के नतीजों के बाद बताया कि पश्चिम एशिया संकट के बाद बुकिंग में 25-30 प्रतिशत का उछाल आया है। कंपनी इस महीने से अपना उत्पादन 10 प्रतिशत बढ़ा रही है। हालांकि यह वेंडर्स (आपूर्तिकर्ताओं) की क्षमता और उनके द्वारा उत्पादन बढ़ाने पर भी निर्भर करेगा।

  • Bajaj Auto और Hero MotoCorp: दोनों कंपनियां बढ़ते बाजार को देखते हुए ईवी उत्पादन बढ़ा रही हैं। बजाज ऑटो के कार्यकारी निदेशक राकेश शर्मा के अनुसार, चौथी तिमाही में ई-स्कूटर सेगमेंट 40 प्रतिशत बढ़ा था और अप्रैल में यह 60 प्रतिशत से अधिक की दर से आगे बढ़ रहा है। जो पेट्रोल (ICE) स्कूटरों की तुलना में काफी अधिक है।

  • Mahindra & Mahindra: महिंद्रा एंड महिंद्रा के कार्यकारी निदेशक और सीईओ राजेश जेजुरिकर ने विश्लेषकों से बातचीत में कहा कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से ईवी की बिक्री को उम्मीद से कहीं अधिक मजबूत बढ़ावा मिल सकता है।

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Mahindra XEV 9e - फोटो : Mahindra

किस सेगमेंट में ईवी का सबसे बड़ा असर देखने को मिलेगा?

विशेषज्ञों और विश्लेषकों के अनुसार, ईंधन के बढ़े दामों का असर अलग-अलग सेगमेंट पर अलग तरह से पड़ेगा:

  • कमर्शियल व्हीकल और थ्री-व्हीलर: सबसे ज्यादा असर कमर्शियल सेगमेंट में दिखेगा, जहां परिचालन लागत सीधे कमाई से जुड़ी होती है। इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर बाजार में, जहां ईवी की हिस्सेदारी पहले ही 50 प्रतिशत को पार कर चुकी है, सीएनजी और पेट्रोल के महंगे होने से अब इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की गति और तेज होगी। हाल के हफ्तों में पेट्रोल-सीएनजी थ्री-व्हीलर्स की मांग सुस्त रही है।

  • प्रीमियम पैसेंजर व्हीकल (कारें): 12-15 लाख रुपये या उससे महंगे सेगमेंट के खरीदारों पर इसका खास असर नहीं पड़ेगा। महिंद्रा के राजेश जेजुरिकर के मुताबिक, 10 लाख रुपये से ऊपर की एसयूवी और कंपनी की फ्लैगशिप ईवी BE 6 (कीमत करीब 19 लाख रुपये से शुरुआत) और XEV 9e (कीमत करीब 22 लाख रुपये से शुरुआत) खरीदने वाले ग्राहक मासिक ईंधन खर्च में 1,000 रुपये की बढ़ोतरी के कारण अपना फैसला नहीं टालते। क्योंकि वे पहले ही ईएमआई (EMI) का एक बड़ा हिस्सा तय कर चुके होते हैं।

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Vida VX2 Electric Scooter - फोटो : Vida

क्या चार्जिंग की चिंता दूर होने से भी ईवी को मदद मिल रही है?

वाहन निर्माताओं ने माना है कि देश में चार्जिंग से जुड़े बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार होना भी एक बड़ा सकारात्मक पहलू है:

  • शहरों में कोई डर नहीं: वाहन निर्माताओं का मानना है कि शहरों के भीतर गाड़ी चलाने वाले ग्राहकों को अब चार्जिंग की कोई चिंता नहीं है।

  • लंबी यात्राएं हुईं आसान: दक्षिण भारत जैसे बड़े विकास वाले क्षेत्रों में लंबी दूरी की यात्रा करने वाले ग्राहकों के मन से भी चार्जिंग का डर लगभग खत्म हो गया है। महिंद्रा जैसी कंपनियां प्रमुख मार्गों पर खुद के फास्ट चार्जर भी लगा रही हैं।


उद्योग जगत के कार्यकारियों का मानना है कि महंगे होते पेट्रोल-डीजल, बेहतर होते चार्जिंग नेटवर्क और बाजार में ईवी के कई नए विकल्पों की उपलब्धता मिलकर आने वाले महीनों में भारत के इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ने की रफ्तार को दोगुना कर देंगे। 

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