वाहन चलाते समय लोग इंजन, सर्विस और माइलेज पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन टायर प्रेशर को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि, ऑटोमोटिव टायर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ATMA) का एक अध्ययन बताता है कि यही छोटी-सी लापरवाही देश को हर साल 42 करोड़ लीटर से ज्यादा पेट्रोल और 4,500 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान पहुंचा रही है।
ATMA की तकनीकी इकाई इंडियन टायर टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी (ITTAC) के अध्ययन के अनुसार, भारत में बड़ी संख्या में पैसेंजर वाहनों के टायर कंपनी द्वारा तय किए गए प्रेशर से कम हवा पर चल रहे हैं। इससे न केवल ईंधन की खपत बढ़ती है, बल्कि वाहन चलाने की लागत और सड़क सुरक्षा से जुड़े जोखिम भी बढ़ जाते हैं।