इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने भारत के इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम (Ethanol Blending Programme) का मजबूती से बचाव किया है। हाल ही में इथेनॉल उत्पादन, विशेष रूप से चावल जैसी अधिक पानी की खपत वाली फसलों से जुड़े जल संकट पर जताई गई चिंताओं के बीच ISMA ने इस कार्यक्रम के परिणामों को "पूरी तरह से सकारात्मक" बताया है।
इथेनॉल कार्यक्रम की शुरुआत किन परिस्थितियों में हुई थी?
ISMA ने हालिया चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए इस नीति के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया:
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यह कार्यक्रम 2018 में उस समय शुरू किया गया था जब चीनी क्षेत्र भारी अतिरिक्त स्टॉक (ग्लट) की समस्या से जूझ रहा था।
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उस दौरान चीनी की कीमतें एक दशक के निचले स्तर पर पहुंच गई थीं।
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इथेनॉल नीति ने अतिरिक्त चीनी को इथेनॉल में बदलने का एक महत्वपूर्ण रास्ता खोला, जिससे बाजार में संतुलन बहाल हुआ।