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EV: भारत को 2030 तक सार्वजनिक ईवी चार्जिंग मांग को पूरा करने के लिए ₹16,000 करोड़ के पूंजीगत व्यय की जरूरत

Mon, 16 Dec 2024 06:29 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत को इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के लिए देश की बढ़ती सार्वजनिक चार्जिंग मांग को पूरा करने और 2030 तक 30 प्रतिशत से ज्यादा इलेक्ट्रिफिकेशन (विद्युतीकरण) के मिशन को हासिल करने के लिए 16,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय की जरूरत है।
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EV charging station - फोटो : Freepik
भारत को इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के लिए देश की बढ़ती सार्वजनिक चार्जिंग मांग को पूरा करने और 2030 तक 30 प्रतिशत से ज्यादा इलेक्ट्रिफिकेशन (विद्युतीकरण) के मिशन को हासिल करने के लिए 16,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय की जरूरत है। सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। 

"इलेक्ट्रिक व्हीकल पब्लिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर: 2030 रोडमैप" पर फिक्की की रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों के लिए मौजूदा वित्तीय व्यवहार्यता 2 प्रतिशत से भी कम उपयोग दर के साथ कम बनी हुई है। और लाभप्रदता और मापनीयता हासिल करने के लिए, "हमें 2030 तक 8-10 प्रतिशत उपयोग का लक्ष्य रखना होगा।" 
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Electric Car - फोटो : iStock
फिक्की ने कहा, "उदाहरण के लिए, ऊर्जा खपत की परवाह किए बिना निश्चित शुल्क के साथ बिजली शुल्क की वर्तमान लागत संरचना और सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों पर कम उपयोग के कारण लाभ-हानि लक्ष्य हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो रहा है। उत्तर प्रदेश, दिल्ली और गुजरात जैसे राज्यों में कोई/कम निश्चित शुल्क नहीं है। लेकिन ऐसे अन्य राज्य भी हैं जहां निश्चित शुल्क ज्यादा हैं, जिससे व्यवहार्यता चुनौतीपूर्ण है।"

रिपोर्ट में भारत को स्वच्छ ऊर्जा और स्थिरता की ओर ले जाने के लिए नीति निर्माताओं, उद्योग जगत और सरकारी निकायों सहित प्रमुख हितधारकों से कार्रवाई करने का आह्वान किया गया है।
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Electric Vehicles Charging Station - फोटो : Freepik
इसमें पांच प्रमुख चुनौतियों को भी रेखांकित किया गया है, जिन्हें सार्वजनिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के लिए संबोधित करने की जरूरत है। इनमें सीमित वित्तीय व्यवहार्यता; डिस्कॉम या बिजली से संबंधित मुद्दे; भूमि से संबंधित मुद्दे; परिचालन संबंधी चुनौतियां; और मानकीकरण और अंतर-संचालन शामिल हैं।

रिपोर्ट में आगे सुझाव दिया गया है कि ईवी चार्जिंग सर्विस के लिए जीएसटी दरों को ईवी वैल्यू चेन में टैक्स के अनुरूप 18 प्रतिशत से 5 प्रतिशत तक मानकीकृत किया जाना चाहिए। इसने राज्यों में एक समान मूल्य निर्धारण के साथ दो-भाग टैरिफ से एकल-भाग टैरिफ में बदलाव का भी आह्वान किया। 

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Electric Rickshaw - फोटो : Lohia
रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की गई है कि राज्य इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर (E3W) को अपनाने को बढ़ावा दें। जैसे कि E3W खरीदने के लिए परमिट की जरूरत नहीं है; अंतरिम में, CNG थ्री-व्हीलर से E3W में स्थानांतरित होने के लिए उसी परमिट का उपयोग करें।

इसने चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर रोडमैप कार्यान्वयन को सक्षम और निगरानी करने के लिए उद्योग हितधारकों, राज्य और केंद्रीय प्राधिकरणों के प्रतिनिधित्व के साथ एक राज्य-स्तरीय सेल स्थापित करने का सुझाव दिया। 
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Electric Vehicles Charging Station - फोटो : Freepik
रिपोर्ट की एक अन्य महत्वपूर्ण सिफारिश में कहा गया है कि ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना। और संचालन के लिए विद्युत मंत्रालय के दिशा-निर्देशों को राज्य डिस्कॉम (वितरण कंपनियों) के लिए अनिवार्य बनाया जाना चाहिए। ताकि सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों (पीसीएस) की समय पर स्थापना सुनिश्चित की जा सके।

रिपोर्ट में आगे सुझाव दिया गया है कि 2015 से 2023-24 तक ईवी बिक्री के आधार पर, विश्लेषण किए गए 700 से ज्यादा शहरों में से, शीर्ष 40 और 20 राजमार्ग खंडों को सार्वजनिक चार्जिंग बुनियादी ढांचे को बढ़ाने के लिए प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
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Electric Vehicles Charging Station - फोटो : Freepik
इन शीर्ष 40 शहरों में अगले 3-5 वर्षों में ईवी पैठ में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। मौजूदा ईवी अपनाने की दर और अनुकूल राज्य नीतियों को देखते हुए। इसके अलावा, इन 40 प्राथमिकता वाले शहरों को जोड़ने वाले 20 राजमार्ग खंड वाहनों के ट्रैफिक में 50 प्रतिशत का योगदान करते हैं।
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