भारत-यूरोप फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के बारे में बहुत बात हुई है। कुछ लोगों को ऐसी खुशफहमी भी हुई है कि इम्पोर्टेड कारों की कीमत आधी हो जाएगी। ऐसे में आपको शायद रियलिटी चेक की जरूरत है।
भारत-यूरोप मुक्त व्यापार समझौते (India-EU FTA) को लेकर यह चर्चा तेज है कि इससे यूरोप से आने वाली लग्जरी कारें अचानक सस्ती हो जाएंगी। लेकिन अगर आप कॉम्पैक्ट एसयूवी की कीमत में BMW या Mercedes-Benz घर लाने का सपना देख रहे हैं, तो जमीनी हकीकत समझना जरूरी है।
क्या सच में आधी कीमत पर मिलेंगी लग्जरी कारें?
समझौते के तहत यूरोप से आयातित कारों पर कस्टम ड्यूटी घटकर 10 प्रतिशत तक आने की बात है। सुनने में यह बड़ी राहत लगती है, लेकिन इसका असर हर लग्जरी कार पर नहीं पड़ेगा। वजह साफ है, यूरोपीय ब्रांड्स की भारत में बिकने वाली ज्यादातर कारें भारत में असेंबल होती हैं, सीधे आयात (CBU) नहीं।
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Mercedes-Benz GLC EV
- फोटो : Mercedes-Benz
BMW और Mercedes की लोकप्रिय कारें क्यों नहीं होंगी सस्ती?
भारत में बिकने वाली BMW और Mercedes-Benz की लगभग 95 प्रतिशत कारें लोकल असेंबली के तहत आती हैं। इसलिए इन पर आयात शुल्क में कटौती का फायदा नहीं मिलेगा।
यानी BMW X1 या Mercedes-Benz GLC जैसी लोकप्रिय एसयूवी की कीमतों में कोई बड़ी गिरावट देखने को नहीं मिलेगी।
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Audi RSQ8 Performance
- फोटो : Audi India
किन कारों को मिल सकता है असली फायदा?
इस डील का फायदा उन कारों को मिलेगा जो पूरी तरह आयातित (CBU) होती हैं। जैसे हाई-परफॉर्मेंस स्पोर्ट्स कारें या बेहद महंगी लग्जरी एसयूवी। ये गाड़ियां वैसे भी सीमित संख्या में बिकती हैं।
संभावना है कि Audi की RS सीरीज, AMG परफॉर्मेंस मॉडल्स और BMW की M रेंज की कीमतों में कुछ कमी दिखे।
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Land Rover Defender 130
- फोटो : Land Rover
कीमतें घटेंगी, लेकिन ‘लग्जरी’ ही रहेंगी
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि आयात शुल्क एक झटके में नहीं, बल्कि धीरे-धीरे घटेगा। इसे लागू होने में कई साल लग सकते हैं। ऊपर से एक्सचेंज रेट, लॉजिस्टिक्स और अन्य करों का असर भी रहेगा।
नतीजा यह कि कीमतें भले कुछ कम हों, लेकिन ये कारें फिर भी आम खरीदार की पहुंच से बाहर ही रहेंगी।
Defender जैसे मॉडल्स पर भी सीमित असर
कुछ मॉडल्स, जैसे Land Rover Defender, जो यूरोप (स्लोवाकिया) में बनती है, उन्हें सैद्धांतिक रूप से फायदा मिल सकता है। लेकिन अगर इनका भारत में असेंबली शुरू हो जाती है, तो शुल्क कटौती का असर और सीमित हो जाएगा।
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Jeep Wrangler Willys 41 Edition
- फोटो : Jeep India
असली बदलाव कहां दिख सकता है?
इस समझौते का सबसे बड़ा असर ऑटोमोबाइल सेगमेंट की विविधता पर पड़ सकता है। कंपनियों को भारत में CBU मॉडल्स के साथ प्रयोग करने की ज्यादा आजादी मिलेगी।
आने वाले वर्षों में भारतीय बाजार में एन्थूजियास्ट-फोकस्ड कारें और परफॉर्मेंस मॉडल्स की संख्या बढ़ सकती है, भले ही वे सस्ती न हों।
उम्मीदें सीमित, विकल्प बढ़ेंगे
इंडिया-ईयू एफटीए से लग्जरी कारें अचानक सस्ती नहीं होंगी, खासकर वे जो पहले से भारत में असेंबल हो रही हैं। हां, चुनिंदा आयातित मॉडल्स की कीमतों में कुछ नरमी आ सकती है और भारतीय कार बाजार में नई, दिलचस्प गाड़ियों की एंट्री जरूर देखने को मिल सकती है।