फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Vehicle Headlights: हैलोजन, जेनॉन, एलईडी और मैट्रिक्स लाइट्स को लेकर नहीं है जानकारी? तो यहां जानें इनका मतलब

Tue, 12 Nov 2024 06:41 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हेडलाइट में बहुत तरह की टेक्नोलॉजी विकसित हो गई हैं। आज के जमाने के मॉडर्न वाहनों में पाई जाने वाले हेडलाइट्स में मैट्रिक्स, एलईडी, प्रोजेक्टर, जेनॉन और हैलोजन लाइट शामिल हैं। इनमें हर एक के अपने अनोखे फायदे, नुकसान और सर्वोत्तम उपयोग हैं। जानें पूरी डिटेल्स।
विज्ञापन
1 of 6
Car Headlights - फोटो : Amar Ujala
कार में हेडलाइट बहुत महत्वपूर्ण कंपोनेंट होता है। शाम ढलते ही इसकी जरूरत सबसे ज्यादा हो जाती है। आजकल कारों में तरह-तरह की नई हेडलाइट्स देखने को मिलती हैं। हेडलाइट में बहुत तरह की टेक्नोलॉजी विकसित हो गई हैं। आज के जमाने के मॉडर्न वाहनों में पाई जाने वाले हेडलाइट्स में मैट्रिक्स, एलईडी, प्रोजेक्टर, जेनॉन और हैलोजन लाइट शामिल हैं। इनमें हर एक के अपने अनोखे फायदे, नुकसान और सर्वोत्तम उपयोग हैं। यहां हम आपको इन हेडलाइट्स के टाइप को समझने में आपकी मदद करने के लिए पूरी डिटेल्स दे रहे हैं।
विज्ञापन

2 of 6
Halogen Car Headlights - फोटो : Freepik
हैलोजन लाइट
हैलोजन हेडलाइट्स सबसे पारंपरिक हैं और आमतौर पर कारों में पाई जाती हैं। वे एक फिलामेंट को गर्म करके रोशनी पैदा करते हैं और सामान्य बल्बों की तरह काम करते हैं। इस बल्ब का फायदा यह है कि वे सस्ती हैं और उन्हें बदलना आसान है। साथ ही वे हर जगह उपलब्ध और सस्ते पार्ट्स हैं। हालांकि इन बल्बों की सीमाओं की बात करें तो यह अन्य तरह के बल्बों की तुलना में कम चमक, कम लाइफ और उच्च ऊर्जा खपत और पीली रोशनी शामिल है। ये सड़क को उतनी बढ़िया तरह से रोशन नहीं करती हैं।
विज्ञापन

3 of 6
Modern Car Headlights - फोटो : Freepik
जेनॉन एचआईडी लाइट
जेनॉन या एचआईडी (हाई-इंटेंसिटी डिस्चार्ज) हेडलाइट्स इलेक्ट्रोड के बीच इलेक्ट्रिक आर्क बनाकर रोशनी पैदा करते हैं। ये बल्ब जेनॉन गैस से भरे होते हैं, जो उन्हें हैलोजन लाइट की तुलना में बहुत ज्यादा चमकदार बनाता है। वे बहुत चमक और साफ सफेद रोशनी पैदा करते हैं। जो रात की ड्राइव के लिए आदर्श हैं और हैलोजन की तुलना में ज्यादा ऊर्जा-कुशल हैं। ये बल्ब हैलोजन की तुलना में ज्यादा समय तक चलते हैं, लेकिन इन्हें बदलने में बहुत अधिक खर्च होता है। अगर बीम को ठीक से एडजस्ट नहीं किया जाता है, तो इस तरह की रोशनी सामने से आने वाली ट्रैफिक को भी देखने में बाधा पैदा कर सकती है। जेनॉन लैंप को चालू होने के बाद पूरी चमक तक पहुंचने में थोड़ा समय लगता है। और इसे ऑपरेट करने के लिए एक अलग बैलेस्ट की जरूरत होती है।

4 of 6
Led Carheadlights - फोटो : Freepik
एलईडी (लाइट एमिटिंग डायोड) लाइट्स
एलईडी हेडलाइट्स में छोटे, चमकीले एलईडी की एक सीरीज का इस्तेमाल किया जाता है। वे अपने लंबे जीवनकाल, चमक और एनर्जी एफिशिएंसी की वजह से तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। ये बल्ब कभी-कभी वाहन से भी अधिक समय तक चलते हैं। हालांकि अच्छी गुणवत्ता वाले एलईडी बल्बों की शुरुआती लागत अधिक होती है। और वे गर्मी के प्रति संवेदनशील होते हैं, जिसके लिए कूलिंग कंपोनेंट्स की जरूरत होती है। हेडलैंप हाउसिंग में इन-बिल्ट होने पर इन सेटअप को हैलोजन लाइट की तुलना में बदलना ज्यादा जटिल होता है।
विज्ञापन

5 of 6
Projector Car Headlights - फोटो : Freepik
प्रोजेक्टर लाइट्स
प्रोजेक्टर हेडलाइट्स किसी खास तरह के बल्ब नहीं होते, बल्कि एक डिजाइन स्टाइल हैं। इसका मतलब एक लेंस हैं जो लाइट बीम को फोकस और निर्देशित करता है। यह सुनिश्चित करता है कि बीम ठीक उसी जगह जाए जहां इसकी आवश्यकता है। प्रोजेक्टर लाइट्स में हैलोजन, एलईडी या जेनॉन बल्ब हो सकते हैं। यह निर्माताओं को आने वाले ट्रैफिक के लिए चकाचौंध को कम करने और बाद में ट्रैफिक मानदंडों का अनुपालन करने की अनुमति देता है। हालांकि, इन बल्बों की सीमाएँ स्टैंडर्ड रिफ्लेक्टर हाउसिंग की तुलना में ज्यादा जटिल और महंगी हैं। प्रोजेक्टर लेंस को बदलना कभी-कभी ज्यादा चुनौतीपूर्ण भी हो सकता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
Matrix Car Headlights - फोटो : Freepik
मैट्रिक्स लाइट्स
मैट्रिक्स हेडलाइट्स सबसे मॉडर्न एलईडी सिस्टम हैं। जिन्हें कई सेगमेंट में विभाजित किया गया है जो स्वतंत्र रूप से चालू या बंद हो सकते हैं। यह बीम को डायनैमिक रूप से आकार देने की अनुमति देता है। सेंसर अन्य कारों का पता लगाते हैं और अन्य ड्राइवरों के लिए चकाचौंध को रोकने के लिए बीम को ऑटोमैटिक तरीके से एडजस्ट करते हैं। जबकि बाकी क्षेत्रों को पर्याप्त रूप से रोशन करते हैं। ये सेटअप इंटेलिजेंट लाइट डिस्ट्रीब्यूशन के साथ बेहतर सुरक्षा की ओर ले जाते हैं। ये सेटअप ज्यादातर हाई-एंड कारों पर ही देखे जाते हैं और इनका निर्माण बहुत महंगा होता है। इस सिस्टम की सर्विसिंग भी उतनी ही जटिल है। और इसके लिए प्रशिक्षित इंजीनियरों के एक समूह की जरूरत होती है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें