Electric Car
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क्या इलेक्ट्रिक वाहनों की तेज ग्रोथ भी नीतियों पर निर्भर है?
इलेक्ट्रिक वाहनों के बाजार को खड़ा करने में भी पूरी तरह से सरकारी मदद का ही हाथ रहा है:
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वित्तीय प्रोत्साहन: फेम (FAME) योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी, कम रजिस्ट्रेशन टैक्स और निर्माताओं को मिलने वाले प्रोत्साहनों (इंसेंटिव) ने ही ईवी को आर्थिक रूप से आकर्षक बनाया। अगर ये नीतियां नहीं होतीं, तो भारत में ईवी अपनाने की गति बहुत धीमी हो सकती थी।
सरकारी नीतियां बुरी नहीं हैं। इन्होंने पिछले 20 वर्षों में गाड़ियों को ज्यादा सुरक्षित, स्वच्छ और कम प्रदूषण फैलाने वाला बनाया है। लेकिन यह इस धारणा को जरूर खारिज करता है कि बाजार सिर्फ ग्राहक की मर्जी से चलता है। सच तो यह है कि ग्राहक केवल उन्हीं सीमाओं के भीतर अपनी पसंद चुनता है, जो नीतियां तय करती हैं। निर्माता पहले नियमों, टैक्स ढांचे और दक्षता लक्ष्यों को पूरा करने वाले वाहन बनाते हैं, और फिर शोरूम के भीतर ग्राहकों को आकर्षित करने की प्रतिस्पर्धा शुरू होती है।