होंडा कार्स और निसान मोटर, दो वैश्विक ऑटो प्रमुख कंपनियां दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार निर्माता समूह बनाने के लिए हाथ मिलाने के लिए तैयार हैं। इसने ऑटोमोटिव जॉइन्ट वेंचर्स (संयुक्त उपक्रमों) को भी सुर्खियों में ला दिया है। यहां हम आपको ऐसी पांच प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों के विलय के बारे में बता रहे हैं, जिन्होंने दुनिया को हिलाकर रख दिया। जबकि इनमें से कुछ कामयाब विलय साबित हुए, वहीं कुछ असफल रहे।
होंडा कार्स और निसान मोटर, दो वैश्विक ऑटो प्रमुख कंपनियां दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार निर्माता समूह बनाने के लिए हाथ मिलाने के लिए तैयार हैं। होंडा और निसान ने एक अन्य जापानी ऑटो दिग्गज मित्सुबिशी के साथ मिलकर एक नई होल्डिंग कंपनी स्थापित करने के लिए चर्चा शुरू कर दी है। जिसके तहत तीनों ऑटो निर्माता वैश्विक बाजार के लिए कारें बनाएंगे।
इस गठबंधन के गठन के पीछे मुख्य उद्देश्य चीनी कार निर्माताओं की बढ़ती चुनौतियों से निपटना है, खासकर इलेक्ट्रिक कार सेगमेंट में। पिछले कुछ वर्षों में, BYD, Nio आदि जैसी चीनी वाहन निर्माता अन्य वैश्विक वाहन निर्माताओं को चुनौती देने वाली प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभरी हैं।
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Nissan Motor and Honda Cars
- फोटो : Nissan Motor, Honda Cars
इस नए ऑटोमोटिव गठबंधन के गठन के साथ, होंडा, निसान और मित्सुबिशी जैसी कार निर्माता कंपनियां आने वाले वर्षों में अपने कारोबार को आगे बढ़ाने का लक्ष्य बना रही हैं। साथ ही, इसने ऑटोमोटिव जॉइन्ट वेंचर्स (संयुक्त उपक्रमों) को भी सुर्खियों में ला दिया है। यहां हम आपको ऐसी पांच प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों के विलय के बारे में बता रहे हैं, जिन्होंने दुनिया को हिलाकर रख दिया। जबकि इनमें से कुछ कामयाब विलय साबित हुए, वहीं कुछ असफल रहे।
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Maserati Gran Turismo Trofeo MC20 Cielo
- फोटो : Maserati
स्टेलेंटिस
Stellantis (स्टेलेंटिस) 2021 में इतालवी-अमेरिकी समूह Fiat Chrysler Automobiles (फिएट क्रिसलर ऑटोमोबाइल्स) (FCA) और French PSA Group (फ्रेंच PSA समूह) के विलय के जरिए अपने गठन के बाद से सबसे बड़े ऑटोमोबाइल मैन्युफेक्चरिंग समूहों में से एक बना हुआ है। 2023 तक, स्टेलेंटिस बिक्री के हिसाब से टोयोटा, फॉक्सवैगन समूह और ह्यूंदै मोटर समूह के बाद दुनिया का चौथा सबसे बड़ा वाहन निर्माता समूह था।
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Ram 2500 Pickup Truck
- फोटो : Ram Trucks
स्टेलेंटिस समूह के पास Abarth (अबार्थ), Alfa Romeo (अल्फा रोमियो), Chrysler (क्रिसलर), Citroen (सिट्रोएन), Dodge (डॉज), DS (डीएस), Fiat (फिएट), Jeep (जीप), Lancia (लैंसिया), Maserati (मासेराती), Opel (ओपल), Peugeot (प्यूजो), Ram Trucks (राम ट्रक्स) और Vauxhall (वॉक्सहॉल) जैसे प्रमुख कार निर्माता ब्रांड हैं। विलय के समय, स्टेलेंटिस के पास लगभग 300,000 कर्मचारी, 30 देशों में विनिर्माण सुविधाएं और 130 से ज्यादा देशों में वाहनों की बिक्री करती थी।
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Maruti Suzuki Dzire 2024
- फोटो : Amar Sharma
सुजुकी और टोयोटा
Suzuki (सुजुकी) और Toyota (टोयोटा) ने कोई संयुक्त उद्यम नहीं बनाया, लेकिन कई परियोजनाओं पर सहयोग करने के लिए हाथ मिलाया। Suzuki Motor Corporation (सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन) और Toyota Motor Corporation (टोयोटा मोटर कॉर्पोरेशन) ने 2017 में एक व्यापारिक गठबंधन के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। जिसके तहत दोनों कंपनियां एक-दूसरे के साथ वाहन आर्किटेक्चर, विशिष्ट मॉडल और तकनीक, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में साझा करने के लिए सहमत हुईं। भारत इस गठबंधन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जहां टोयोटा ग्लैंजा, अर्बन क्रूजर टैसर, रुमियन और अर्बन क्रूजर हाइडर जैसी मारुति सुजुकी की रीब्रांडेड कारें बेचती है। दूसरी ओर, मारुति सुजुकी इनविक्टो बेचती है, जो एक रीब्रांडेड टोयोटा कार है।
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Renault Night and Day Limited Edition
- फोटो : Renault
रेनो और निसान
Renault (रेनो) और Nissan (निसान) ने 1999 में हाथ मिलाकर रेनो-निसान अलायंस बनाया। जो वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख ऑटोमोटिव जॉइन्ट वेंचर बन गया। इसका गठन ऐसे समय में हुआ था जब वैश्विक ऑटो उद्योग तेजी से एकीकरण के दौर से गुजर रहा था। डेमलर-क्रिसलर विलय सहित कई ऑटो कंपनियों ने दुनिया को हिलाकर रख दिया। रेनो-निसान अलायंस में, फ्रांसीसी ऑटो दिग्गज ने निसान के बकाया स्टॉक का 36.8 प्रतिशत 3.5 अरब डॉलर में खरीदा। और जापानी ऑटो ओईएम ने वित्तीय रूप से सक्षम होने पर रेनो को खरीदने की कसम खाई। 2001 में, कंपनी के दिवालिया होने के बाद, निसान ने रेनो में 15 प्रतिशत हिस्सेदारी ली, जिसने बदले में निसान में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 43.4 प्रतिशत कर दी। बाद में 2002 में, अलायंस ने दोनों कंपनियों के बीच 50-50 स्वामित्व देखा।
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Ford Car
- फोटो : Ford
महिंद्रा और फोर्ड
Mahindra (महिंद्रा) और Ford (फोर्ड) ने 2019 में भारत और उभरते बाजारों में विकास और लाभप्रदता को बढ़ावा देने के लिए एक जॉइन्ट वेंचर का एलान किया। इस जॉइन्ट वेंचर का मकसद भारत में फोर्ड-ब्रांडेड कारों के साथ-साथ दुनिया भर के उच्च-विकास वाले उभरते बाजारों में फोर्ड और महिंद्रा-ब्रांडेड कारों का विकास, विपणन और वितरण करना था। यह जॉइन्ट वेंचर सितंबर 2017 में फोर्ड और महिंद्रा के बीच किए गए रणनीतिक गठबंधन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। और इसके 2020 के मध्य तक चालू होने की उम्मीद थी। हालांकि, 2021 में जॉइन्ट वेंचर को बंद कर दिया गया और यह गठबंधन कभी शुरू नहीं हुआ।
निसान और मित्सुबिशी मोटर्स
जापानी ऑटोमेकर Mitsubishi Motors (मित्सुबिशी मोटर्स) 2016 में रेनो-निसान अलायंस में शामिल हुई थी। जब उसने फ्यूल एफिशिएंसी (ईंधन अर्थव्यवस्था) के आंकड़ों में हेराफेरी करने की बात स्वीकार की थी, जिसके बाद वह मुश्किल दौर से गुजर रही थी। साथ ही, मित्सुबिशी को कारों की बिक्री में गिरावट का सामना करना पड़ रहा था। 2.3 अरब डॉलर के सौदे के जरिए मित्सुबिशी को शामिल करने के बाद, अलायंस प्रति वर्ष एक करोड़ वाहन बनाने में सक्षम हो गया। जिससे ऑटोमोटिव दुनिया में तीसरा स्थान हासिल किया, जो सिर्फ टोयोटा मोटर्स और फॉक्सवैगन समूह से पीछे और जनरल मोटर्स से आगे था।