भारत में रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए ईंधन की बढ़ती कीमतें हमेशा से चिंता का विषय रही हैं। सरकार ने अक्सर ईंधन दक्षता (फ्यूल एफिशिएंसी) को बढ़ावा देने के लिए नीतियां पेश की हैं। लेकिन आम उपयोगकर्ताओं पर इसका प्रभाव मिला-जुला रहा है। हाल ही में, केंद्र सरकार ने पेट्रोल में इथेनॉल के मिश्रण को मौजूदा 20 प्रतिशत के लक्ष्य से और अधिक बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा जारी एक मसौदे (ड्राफ्ट) के अनुसार, केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन का प्रस्ताव है। इसके तहत E85 (85 प्रतिशत इथेनॉल) और E100 (100 प्रतिशत इथेनॉल) को अलग ईंधन ग्रेड के रूप में अपनाने की तैयारी है। फिलहाल यह प्रस्ताव शुरुआती चरण में है और इस पर 30 दिनों के लिए जनता से सुझाव मांगे गए हैं।
हालांकि, ज्यादा इथेनॉल-मिश्रित ईंधन के लिए सरकार की पहल ऊपरी तौर पर काफी उम्मीद जगाने वाली लगती है। लेकिन क्या इससे भारत में कार मालिकों को सचमुच फायदा होता है? आइए पता लगाते हैं।