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Ethanol: पेट्रोल में इथेनॉल का बढ़ता स्तर! क्या वाकई कम होगा कार मालिकों का खर्च? जानें E85 और E100 के मायने

Sat, 02 May 2026 10:29 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हालांकि, ज्यादा इथेनॉल-मिश्रित ईंधन के लिए सरकार की पहल ऊपरी तौर पर काफी उम्मीद जगाने वाली लगती है। लेकिन क्या इससे भारत में कार मालिकों को सचमुच फायदा होता है? आइए पता लगाते हैं।
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पेट्रोल पंप - फोटो : AI

भारत में रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए ईंधन की बढ़ती कीमतें हमेशा से चिंता का विषय रही हैं। सरकार ने अक्सर ईंधन दक्षता (फ्यूल एफिशिएंसी) को बढ़ावा देने के लिए नीतियां पेश की हैं। लेकिन आम उपयोगकर्ताओं पर इसका प्रभाव मिला-जुला रहा है। हाल ही में, केंद्र सरकार ने पेट्रोल में इथेनॉल के मिश्रण को मौजूदा 20 प्रतिशत के लक्ष्य से और अधिक बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा जारी एक मसौदे (ड्राफ्ट) के अनुसार, केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन का प्रस्ताव है। इसके तहत E85 (85 प्रतिशत इथेनॉल) और E100 (100 प्रतिशत इथेनॉल) को अलग ईंधन ग्रेड के रूप में अपनाने की तैयारी है। फिलहाल यह प्रस्ताव शुरुआती चरण में है और इस पर 30 दिनों के लिए जनता से सुझाव मांगे गए हैं। 

हालांकि, ज्यादा इथेनॉल-मिश्रित ईंधन के लिए सरकार की पहल ऊपरी तौर पर काफी उम्मीद जगाने वाली लगती है। लेकिन क्या इससे भारत में कार मालिकों को सचमुच फायदा होता है? आइए पता लगाते हैं।

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E20 पेट्रोल से पुरानी गाड़ी पर हो रहा असर - फोटो : AI

E20 ईंधन क्या है और इसके क्या फायदे हैं?

E20 ईंधन 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण है।

  • प्राकृतिक स्रोत: यह एक नवीकरणीय, पौधों पर आधारित ईंधन है।

  • आयात में कमी: इसका उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और कार्बन उत्सर्जन को घटाना है।

  • इंजन पर प्रभाव: इथेनॉल की उच्च ऑक्टेन रेटिंग (108-110) दहन की गुणवत्ता में सुधार करती है। और इंजन नॉकिंग को कम करती है। भारत ने इसी साल अप्रैल में देशव्यापी E20 रोलआउट का एलान किया है।

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E20 पेट्रोल डिस्पेंसर (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : AI

नये प्रस्तावित E85 और E100 ईंधन क्या हैं?

सरकार का नया प्रस्ताव पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा को बड़े स्तर पर बढ़ाने पर केंद्रित है:

  • E85 और E100: इसका मतलब है कि कारें पूरी तरह से या मुख्य रूप से इथेनॉल पर चलेंगी।

  • फ्लेक्स-फ्यूल इंजन: इस बदलाव के लिए केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में बदलाव प्रस्तावित हैं। ताकि उच्च इथेनॉल सांद्रता के अनुकूल वाहन और 'फ्लेक्स-फ्यूल इंजन' का उपयोग संभव हो सके।

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E20 - फोटो : Amar Ujala

इस कदम के संभावित प्रभाव और चुनौतियां क्या हो सकती हैं?

उच्च इथेनॉल मिश्रण अपनाने के विचार के कई व्यापक निहितार्थ हो सकते हैं:

  • संसाधनों पर दबाव: इथेनॉल उत्पादन, विशेष रूप से गन्ने से, भारी मात्रा में जल संसाधनों की मांग करता है। इससे कई क्षेत्रों में जल संकट बढ़ सकता है।

  • खाद्य सुरक्षा: ईंधन के लिए खाद्य फसलों के बढ़ते उपयोग से भोजन की उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ सकता है।

  • तकनीकी समस्या: इथेनॉल की प्रकृति संक्षारक होती है, जिसके कारण इंजन के डिजाइन में बदलाव और बेहतर सामग्री की जरूरत होगी।


यह भी पढ़ें - Ethanol: इथेनॉल उत्पादन से जल संकट की चिंताओं के बीच ISMA ने गिनाए लाभ, बताया इसे 'पूरी तरह सकारात्मक' कदम

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E20 - फोटो : Amar Ujala

क्या इससे कार मालिकों का ईंधन खर्च कम होगा?

हालांकि, देखने में यह कदम किफायती लग सकता है क्योंकि इथेनॉल पेट्रोल से सस्ता है, लेकिन हकीकत काफी जटिल है:

  • माइलेज में गिरावट: इथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में कम ऊर्जा होती है। इसका मतलब है कि उच्च इथेनॉल मिश्रण पर चलने वाले वाहन, शुद्ध पेट्रोल वाले वाहनों की तुलना में कम माइलेज देंगे।

  • प्रति किलोमीटर लागत: भले ही प्रति लीटर कीमत कम हो, लेकिन माइलेज कम होने के कारण 'प्रति किलोमीटर लागत' में कोई खास कमी नहीं आएगी। बल्कि कुछ मामलों में यह बढ़ भी सकती है।

  • गाड़ियों की कीमत: वर्तमान में अधिकांश गाड़ियां E20 तक के लिए अनुकूल हैं। E85 या E100 पर चलने के लिए फ्लेक्स-फ्यूल इंजन की जरूरत होगी, जिससे गाड़ियों की शुरुआती कीमत बढ़ सकती है।

  • अप्रत्यक्ष खर्च: बुनियादी ढांचे के अपग्रेड और ईंधन मूल्य निर्धारण तंत्र से जुड़े अन्य अप्रत्यक्ष खर्च भी बढ़ सकते हैं।

कुल मिलाकर, पेट्रोल में उच्च इथेनॉल मिश्रण तेल आयात कम करने और स्वच्छ गतिशीलता का समर्थन करने में मददगार हो सकता है। लेकिन निकट भविष्य में कार मालिकों के लिए 'ईंधन बचत' के रूप में इसके लाभ सीमित रहने की संभावना है।

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