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कारें होंगी पहले से ज्यादा सुरक्षित: Global NCAP क्रैश टेस्ट के लिए कार कंपनियों को देना होगा ये फीचर

Thu, 03 Jun 2021 12:06 PM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Global NCAP Car Crash Rating India - फोटो : NCAP
कुछ साल पहले तक गाड़ियों के सेफ्टी फीचर्स को लेकर देश में जागरुकता की कमी थी। लेकिन जब टाटा नेक्सन को क्रैश टेस्ट में 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग्स मिली तो लोगों को इसकी अहमियत समझ में आई। आज शोरूम में जब लोग कार बुक कराने जाते हैं तो सबसे पहले उसकी क्रैश टेस्ट रेटिंग के बारे में पूछते हैं। वहीं अब क्रैश रेटिंग एजेंसी ग्लोबल NCAP अब नियमों को और कड़ा करने की तैयारी कर रही है। ग्लोबल NCAP की कोशिश है नियमों को कठोर बना कर कार निर्माता कंपनियों को सुरक्षित कारें बनाने के लिए मजबूर किया जाए। हालांकि इसके लिए भारत सरकार भी कंपनियों को खरीखोटी सुना चुकी है। फरवरी माह में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव गिरधर अरमाने ने कहा था कि भारत में ऑटोमोबाइल कंपनियां जानबूझ कर निचले स्तर के सुरक्षा मानक अपना रही हैं और उन्हें इस प्रैक्टिस को तुरंत रोकना होगा। साथ ही उन्होंने कहा था कि ऑटोमोबाइल कंपनियों को इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है और ऐसी कारों को तुरंत बेचना बंद किया जाना चाहिए, जिनमें सुरक्षा के पूर्ण इंतजाम नहीं हैं। उनका कहना था कि कुछ ही कंपनियों ने सेफ्टी रेटिंग्स सिस्टम को लागू किया है और कुछ निर्माता अपने टॉप वैरियंट्स में ही इनका इस्तेमाल कर रहे हैं।
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car electronic stability control - फोटो : For Refernce Only

लगाना होगा ये फीचर

रिपोर्ट्स के मुताबिक ग्लोबल NCAP अपने क्रैश टेस्ट रेटिंग सिस्टम में ईएससी यानी इलेक्ट्रॉनिक स्टैबिलिटी कंट्रोल को शामिल करने वाली है। जिसका सीधा सीधा मतलब यह है कि क्रैश टेस्ट रेटिंग में शामिल होने वाली कारों में अब ये फीचर अनिवार्य होगा। भारत में कई कार कंपनियां अपनी कारों में ये फीचर दे रही हैं। ग्लोबल NCAP का कहना है कि भारत में 2022 की दूसरी छमाही से कारों में ये फीचर टेस्ट रेटिंग के लिए अनिवार्य होगा। उनका कहना है कि ईएससी फीचर कई लोगों की जान बचा सकता है, क्योंकि दुनियाभर में मानवीय गलतियों को कम करके काफी लोगों की जान बचाई है।

 
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What is Electronic Stability Control (ESC) - फोटो : For Refernce Only

क्या है इस फीचर का फायदा

इलेक्ट्रॉनिक स्टैबिलिटी कंट्रोल यानी ESC फीचर का फायदा यह है कि यह कार के चारों पहियों को अलग-अलग ब्रेक लगाने में मदद करता है। जिससे गाड़ी की रफ्तार धीमी हो जाती है और हादसे की संभावना घट जाती है। वहीं इस फीचर के साथ एबीएस और ट्रेक्शन कंट्रोल सिस्टम भी साथ काम करता है जिससे स्टैबिलिटी बनी रहती है और टायर स्किड नहीं करते हैं। फिलहाल क्रैश टेस्ट में कार को 64 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलाया जाता है और सामने और साइड से टक्कर मारी जाती है। कार के अंदर डमी रखी जाती हैं, जिन्हें अडल्ट ऑक्यूपैंट्स और चाअल्ड ऑक्यूपैंट्स कहा जाता है।

 

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Hyundai Venue A-NCAP Crash Test side Impact - फोटो : A-NCAP

विदेश में 2014 से मौजूद

ESC का फीचर यूरोपियन मार्केट में साल 2014 से ही मौजूद है। लेकिन भारत में बजट कारें ज्यादा प्रसिद्ध है, दुखद बात यह है कि बजट कारों में इलेक्ट्रॉनिक स्टैबिलिटी कंट्रोल का फीचर नहीं आता है। ग्लोबल NCAP के मुताबिक आम तौर पर इलेक्ट्रॉनिक स्टैबिलिटी कंट्रोल फीचर की कीमत पांच हजार से भी कम होती है, लेकिन सीटबेल्ट्स की तरह यह कई लोगों की जानें बचा सकता है। यही वजह है कि इस फीचर को 2022 से क्रैश टेस्ट पैरामीटर में शामिल किया जा रहा है।

 
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MG ZS EV Euro NCAP Crash Test - फोटो : Euro NCAP

जल्द ही शामिल होंगे ये फीचर

वहीं ग्लोबल NCAP की तरह लैटिन NCAP भी क्रैश टेस्ट में कई नए फीचर शामिल करना चाहता है। इनमें एडवांस्ड सेफ्टी फीचर्स जैसे ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग, लेन असिस्ट, ब्लाइंड स्पॉ़ट डिटेक्शन, लेन डिपार्चर वार्निंग, स्पीड असिस्टेंस सिस्टम, लेन कीपिंग असिस्ट, रोड एज डिटेक्शन और एएफबी जैसे फीचर शामिल हैं। ये सभी बदलाव 2025-26 तक देखने को मिलेंगे।
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