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EV: संसदीय समिति ने ईवी नीति में बदलाव की सिफारिश की, सब्सिडी बढ़ाने और कमियों को दूर करने की बात कही

Thu, 19 Mar 2026 11:00 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

उद्योग पर बनी एक संसदीय स्थायी समिति ने इलेक्ट्रिक दो-पहिया और तीन-पहिया वाहनों के लिए मांग प्रोत्साहन को मार्च 2028 तक बढ़ाने की सिफारिश की है। और साथ ही सामर्थ्य संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए इलेक्ट्रिक यात्री वाहनों हेतु लक्षित उपभोक्ता सब्सिडी का प्रस्ताव भी रखा है।
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Electric Scooter - फोटो : Chetak
संसदीय स्थायी समिति (उद्योग) ने इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा देने के लिए कई अहम सिफारिशें की हैं। समिति ने सुझाव दिया है कि इलेक्ट्रिक दोपहिया और तीनपहिया वाहनों पर मिलने वाली सब्सिडी को मार्च 2028 तक बढ़ाया जाए। 

इसके साथ ही, समिति ने पहली बार इलेक्ट्रिक कारों के लिए उपभोक्ता सब्सिडी शुरू करने की जरूरत पर भी जोर दिया है, ताकि उनकी ऊंची कीमत को कम किया जा सके। 

ये सिफारिशें भारी उद्योग मंत्रालय के FY27 के अनुदान की मांगों पर समिति की 332वीं रिपोर्ट का हिस्सा हैं। इन नतीजों का विश्लेषण करते हुए एक नोट में, नोमुरा ने कहा कि प्रस्तावित उपाय ईवी को अपनाने की गति को तेज कर सकते हैं। साथ ही चुनिंदा ओरिजिनल इक्यूप्मेंट मैन्युफेक्चर्र (OEM) और कंपोनेंट बनाने वालों के लिए भविष्य की संभावनाओं को भी बेहतर बना सकते हैं। 
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Electric Vehicles - फोटो : Freepik
EV अपनाने में अभी क्या समस्याएं हैं?
समिति ने पाया कि भारत में ईवी अपनाने की रफ्तार सभी सेगमेंट में समान नहीं है।
  • दोपहिया और तीनपहिया सेगमेंट में तेजी
  • लेकिन इलेक्ट्रिक बस, ट्रक और एम्बुलेंस में धीमी प्रगति
इस असंतुलन को दूर करने के लिए समिति ने सुझाव दिया कि:
  • धीमे सेगमेंट में तय समयसीमा के साथ काम हो
  • ई-बसों की तैनाती तेज की जाए
  • ट्रक और एम्बुलेंस के लिए स्पष्ट रोडमैप बने
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Electric Vehicles - फोटो : Adobe Stock
क्या इलेक्ट्रिक कारों के लिए सब्सिडी जरूरी है?
हां, समिति का मानना है कि इलेक्ट्रिक कारों की सबसे बड़ी समस्या उनकी ऊंची शुरुआती कीमत है।
इसलिए समिति ने सुझाव दिया है कि:
  • एक लक्षित और समयबद्ध सब्सिडी योजना लाई जाए
  • यह बैटरी क्षमता, माइलेज और कीमत के आधार पर तय हो
इससे आम ग्राहकों के लिए ईवी खरीदना आसान हो सकता है और पेट्रोल-डीजल गाड़ियों की तुलना में लागत संतुलन बेहतर हो सकेगा।

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Electric Vehicles Charging Station - फोटो : Freepik
PLI स्कीम को लेकर क्या चिंताएं जताई गई हैं?
समिति ने ऑटो सेक्टर की प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना को लेकर भी चिंता जताई है।
मुख्य समस्याएं:
  • बजट और वास्तविक उपयोग में अंतर
  • शुरुआती वर्षों में कम उपयोग
  • सख्त पात्रता शर्तें
समिति ने सुझाव दिया कि:
  • बजट को वास्तविक प्रोजेक्ट प्रगति से जोड़ा जाए
  • नियमों को थोड़ा लचीला बनाया जाए, खासकर नए ईवी स्टार्टअप्स के लिए
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Ather 450S Electric Scooter - फोटो : Ather Energy
किन कंपनियों को फायदा हो सकता है?
ग्लोबल ब्रोकरेज नोमुरा के अनुसार, इन सिफारिशों से कई कंपनियों को फायदा मिल सकता है:
  • Ather Energy (स्टार्टअप सेगमेंट)
  • Mahindra & Mahindra
  • Tata Motors
साथ ही, ऑटो कंपोनेंट कंपनियां जैसे:
  • Sona BLW Precision Forgings
  • Uno Minda
को भी बढ़ती ईवी मांग का लाभ मिल सकता है।
 
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Kinetic DX Electric Scooter - फोटो : Kinetic
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर क्या सुझाव दिए गए हैं?
समिति ने यह भी कहा कि देश में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अभी पर्याप्त नहीं है।
मुख्य सुझाव:
  • निजी निवेश को बढ़ावा दिया जाए
  • चार्जिंग नेटवर्क के लिए नई सब्सिडी नीति बनाई जाए
  • बैटरी मैन्युफैक्चरिंग (ACC PLI) पर बेहतर निगरानी हो
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा
समिति की सिफारिशें दिखाती हैं कि भारत में ईवी सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं।
अगर इन सुझावों को लागू किया जाता है, तो:
  • ईवी अपनाने की रफ्तार बढ़ेगी
  • कीमतें कम हो सकती हैं
  • घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती मिलेगी
कुल मिलाकर, यह कदम भारत को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा सकता है।

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