Tesla (टेस्ला) भारत में एक मैन्युफेक्चरिंग प्लांट लगाने और यहां कारोबार स्थापित करने की संभावना की जांच कर रही है। ऐसे में भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक कार निर्माता को टेक्नोलॉजी की दिग्गज कंपनी Apple (एपल) की राह पर चलने के लिए कहा है। ताकि इसमें शामिल किसी भी चीनी आपूर्तिकर्ता के साथ साझेदारी करने के लिए स्थानीय फर्मों को ढूंढा जा सके। रॉयटर्स की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी ऑटो प्रमुख एक स्थानीय मैन्युफेक्चरिंग प्लांट स्थापित करने के बारे में कई हफ्तों से भारत सरकार और अधिकारियों के साथ चर्चा कर रहा है, जो संभावित रूप से बहुप्रतीक्षित 20 लाख रुपये की कार का उत्पादन करेगा।
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Tesla Car Plant
- फोटो : Tesla
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नई दिल्ली में सरकारी अधिकारियों के साथ बैठक में, टेस्ला के अधिकारियों ने भारत सरकार को सूचित किया कि वह अपनी सप्लाई चेन को बढ़ावा देने के लिए चीन के कुछ विक्रेताओं को स्थानीय स्तर पर एक आधार स्थापित करना चाहेगी। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि जवाब में, सरकारी अधिकारियों ने टेस्ला को बताया कि 2020 में दोनों देशों के बीच सीमा टकराव के बाद से चीनी कंपनियों की गहन जांच के कारण भारत में पूर्ण स्वामित्व वाली चीनी कंपनियों के लिए मंजूरी देना मुश्किल हो सकता है। इससे यह भी पता चलता है कि भारतीय अधिकारियों ने एक समाधान का सुझाव दिया जिसमें टेस्ला एपल के दृष्टिकोण का अनुकरण करेगा। हाल के महीनों में अमेरिकी तकनीकी दिग्गज ने स्थानीय जॉइन्ट-वेंचर (संयुक्त उद्यम) पार्टनर मिलने के बाद चीनी आपूर्तिकर्ताओं को भारत लाने के लिए मंजूरी हासिल की है।
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एलन मस्क से मिले पीएम मोदी
- फोटो : Social Media
टेस्ला और इसके सीईओ एलन मस्क ने भारत में स्थानीय मैन्युफेक्चरिंग प्लांट लगाने में दिलचस्पी दिखाई है। साथ ही, उम्मीद है कि कंपनी भारत में अपनी अब तक की सबसे सस्ती कार का उत्पादन करेगी, जिसे देश में बेचा जाएगा और अन्य विदेशी बाजारों में भी निर्यात किया जाएगा। हालांकि, अन्य जटिलताओं के साथ, टेस्ला के लिए एक बड़ी चिंता चीनी आपूर्तिकर्ताओं को भारत में लाना है, खास तौर पर जब भारत-चीन भू-राजनीतिक संबंधों में तनाव पसरा हुआ है।
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Tesla car
- फोटो : Tesla
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि टेस्ला के सीईओ एलन मस्क कंपनी के सबसे बड़े विदेशी आधार चीन से आगे विस्तार करना चाहते हैं, जहां विस्तार के लिए नियामक मंजूरी मिलने में देरी हो रही है। भारत इसके लिए विकल्पों में से एक प्रमुख दावेदार के रूप में आया, क्योंकि देश ने एशिया में नए टेस्ला प्लांट की मेजबानी में अपनी दिलचस्पी दिखाई है। हालांकि, अगर टेस्ला को भारत में एक प्लांट लगाना है और सस्ती ईवी का उत्पादन करने के लिए लागत पर नियंत्रण रखना है तो चीनी आपूर्तिकर्ताओं का मुद्दा गंभीर होने वाला है।
जब इलेक्ट्रिक वाहनों की बात आती है, तो भारत में बैटरी सेल जैसे प्रमुख ईवी घटकों के लिए स्थानीय आपूर्तिकर्ता नहीं हैं। यहां तक कि भारत की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक कार निर्माता टाटा मोटर्स भी चीन से अपनी ईवी बैटरी सेल आयात कर रही है। टेस्ला कथित तौर पर अपने चीनी विक्रेता आधार के लिए एक अलग इकोसिस्टम की मांग कर रहा है। लेकिन यह सिर्फ केस-टू-केस आधार पर उन अनुमोदनों का लाभ उठा सकता है यदि कोई भारतीय जॉइन्ट-वेंचर पार्टनर है।