अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को एलान किया कि जल्द ही यूरोप से आने वाले उत्पादों पर 25 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी लगाई जाएगी। ट्रंप ने एक बार फिर यूरोपीय संघ (ईयू) पर आरोप लगाया कि वह अमेरिकी कारें और कृषि उत्पाद नहीं खरीदता। हालांकि यह दावा पूरी तरह सही नहीं है।
मूडीज के अनुसार, 2024 में अमेरिका में बेची जाने वाली यूरोपीय कारों का आधा हिस्सा आयात किया गया था, जो लगभग 7.85 लाख कारों के बराबर है, जिनकी कीमत 44 अरब डॉलर थी। अगर 25 प्रतिशत टैरिफ लागू होता है, तो कार निर्माता कंपनियों को या तो अपनी लागत का एक हिस्सा खुद वहन करना होगा या फिर कारों की कीमतें बढ़ानी होंगी।
लेकिन एक अन्य अमेरिकी विश्लेषक ने फरवरी की शुरुआत में कहा था कि 25 प्रतिशत टैरिफ से कोई भी लाभ खत्म हो जाएगा।
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Porsche Taycan GTS Electric Car
- फोटो : Porsche
जर्मनी की कंपनियों पर होगा सबसे ज्यादा असर
जर्मन कार निर्माताओं के लिए यह फैसला बड़ा झटका साबित हो सकता है, क्योंकि वे अमेरिका में अपने अधिकतर प्रीमियम मॉडल्स का निर्यात करते हैं। जर्मन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स फेडरेशन (VDA) ने इसे "उत्तेजना भड़काने वाला कदम" बताया और कहा कि इससे अमेरिकी ग्राहकों के लिए यूरोपीय कारें महंगी हो जाएंगी।
Volkswagen (फॉक्सवैगन) अपनी सभी Audi (ऑडी) और Porsche (पोर्शे) गाड़ियां अमेरिका के बाहर बनाता है। हालांकि, ऑडी लंबे समय से अमेरिका में एक फैक्ट्री लगाने पर विचार कर रहा है।
BMW (बीएमडब्ल्यू) और Mercedes (मर्सिडीज) यूरोप से सेडान कारों का निर्यात करते हैं। लेकिन अमेरिका में उनके एसयूवी मॉडल्स की फैक्ट्री भी हैं। अमेरिका में बनने वाली BMW X5 और Mercedes GLE जैसी एसयूवी पर यह टैरिफ नहीं लगेगा। लेकिन अगर अन्य देशों ने जवाबी टैरिफ लगाए तो उनका एक्सपोर्ट प्रभावित हो सकता है।
मर्सिडीज के वित्तीय निदेशक के अनुसार, अतिरिक्त कस्टम ड्यूटी से कंपनी को 1 अरब यूरो तक का नुकसान हो सकता है।
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Volvo EX40 Electric SUV
- फोटो : Volvo Cars
Volvo और Aston Martin का क्या होगा?
चीनी-स्वीडिश कंपनी Volvo (वोल्वो) के लिए भी यह एक बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि उसकी 20 प्रतिशत कमाई अमेरिका से होती है। वोल्वो के सीईओ जिम रोवन ने कहा कि अगर टैरिफ लागू होते हैं, तो कंपनी को अपने उत्पादन या सप्लाई चेन को दूसरी जगह स्थानांतरित करने पर विचार करना पड़ सकता है। वोल्वो के सीईओ जिम रोवन ने फरवरी की शुरुआत में कहा था, "यह उथल-पुथल भरा होगा, यह 2025 की चुनौती का हिस्सा होगा।"
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Aston Martin Vantage V8
- फोटो : Aston Martin
उन्होंने कहा, "हमें यह देखने के लिए इंतजार करना होगा कि इसका क्या नतीजा निकलता है, लेकिन हम यह देखने के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं कि क्या हमें उत्पादन को स्थानांतरित करने या आपूर्तिकर्ताओं को दुनिया के विभिन्न भागों में स्थानांतरित करने की जरूरत है।"
दूसरी ओर, ब्रिटिश लग्जरी ब्रांड Aston Martin (एस्टन मार्टिन) का कहना है कि महंगे सेगमेंट की कारों के ग्राहक आमतौर पर कीमतों में बढ़ोतरी को ज्यादा महत्व नहीं देते। इसलिए उन पर इसका ज्यादा असर नहीं होगा।
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Maserati Grecale SUV
- फोटो : Maserati
Stellantis के लिए नई मुश्किलें
Stellantis (स्टेलेंटिस) की स्थिति बाकी कंपनियों से थोड़ी अलग है। यह कंपनी 2021 में इटालियन-अमेरिकन ग्रुप Fiat-Chrysler (फिएट-क्रिशलर) और फ्रेंच कंपनी PSA (पीएसए) के विलय से बनी थी।
स्टेलेंटिस ज्यादातर अमेरिकी मॉडल ही अमेरिका में बेचता है। लेकिन यह कुछ Fiat 500, Maserati और Alfa Romeo जैसी यूरोपीय कारों का भी आयात करता है।
कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती कनाडा-अमेरिका-मेक्सिको फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (CUSMA) का कमजोर होना हो सकता है। क्योंकि इससे इन तीन देशों के बीच वाहनों और उनके पार्ट्स की आवाजाही मुश्किल हो जाएगी।
ट्रंप को Stellantis का समर्थन?
हालांकि स्टेलेंटिस के चेयरमैन जॉन एल्कान ने ट्रंप के कुछ विचारों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका में नौकरियों को बढ़ावा देने के लिए अमेरिका में बिना किसी स्थानीय कंटेंट के आयात होने वाली 40 लाख कारों पर कड़े नियम लागू करने चाहिए।
गौरतलब है कि जापान और दक्षिण कोरिया अमेरिका में गाड़ियों का निर्यात करने वाले दूसरे और तीसरे सबसे बड़े देश हैं, जिनमें Toyota (टोयोटा) और Hyundai (ह्यूंदै) जैसी कंपनियां शामिल हैं।
अगर ट्रंप की नीति लागू होती है, तो यह न सिर्फ यूरोपीय कार निर्माताओं बल्कि एशियाई कंपनियों के लिए भी एक नई चुनौती बन सकती है।