दिल्ली को राजधानी में आने वाली एप-आधारित टैक्सियों पर अस्थायी प्रतिबंध लगाना पड़ सकता है। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि परिवहन विभाग को "सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार" एप-आधारित टैक्सियों पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया गया है।
दिल्ली इस समय बेहद जहरीली हवा में सांस ले रही है और इसके लिए कुछ हद तक दोष वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर थोपा गया है। हालांकि दिल्ली सरकार ने 13 नवंबर से 10 दिनों की अवधि के लिए ऑड-ईवन ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली लागू करने का एलान किया है। लेकिन इस पर ज्यादा स्पष्टता नहीं है कि एप-आधारित टैक्सियों को भी यहां एंट्री करने से प्रतिबंधित किया जाएगा या नहीं।
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एप से बुक होने वाली कैब।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अधिकारी अभी भी एक विस्तृत आदेश का इंतजार कर रहे हैं, जिसमें यह साफ होगा कि ओला और उबर जैसी एप-आधारित टैक्सियों की एंट्री पर प्रतिबंध इस वीकेंड से लागू होगा या ऑड-ईवन नियम की शुरुआत से।
राय ने संवाददाताओं से कहा, "अदालत ने कहा है कि दिल्ली के बाहर पंजीकृत टैक्सियों को दिल्ली में प्रवेश करने पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। परिवहन विभाग को दिल्ली के बाहर से एप-आधारित टैक्सियों को शहर में प्रवेश करने से प्रतिबंधित करने के निर्देश जारी किए गए हैं।" साथ ही उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत ने नारंगी नंबर प्लेट वाली डीजल टैक्सियों पर भी प्रतिबंध लगाने के लिए कहा है।
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Delhi Traffic
- फोटो : शुभम बंसल
उन्होंने कहा, "हमने पूछा है परिवहन विभाग यह जांच करेगा कि ऐसे कितने वाहन हैं। जीआरएपी दिशानिर्देशों के तहत, बीएस-III और बीएस-IV डीजल वाहनों पर पहले से ही प्रतिबंध है। और परिवहन विभाग को यह जांच करने के लिए कहा गया है कि कितने बीएस-VI डीजल वाहन हैं और यदि उन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और (यदि) ऑड-ईवन लागू किया जाता है तो इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।”
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Delhi Metro
- फोटो : For Reference Only
लेकिन कैब की एंट्री और आवाजाही को प्रतिबंधित करने से दिल्ली में यात्रियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, खासकर जब ऑड-ईवन नियम प्रभावी हो। कई लोग इस बात पर रोशनी डालते हैं कि दिल्ली की सड़कों पर कैब पर प्रतिबंध लगाने से निजी वाहनों का इस्तेमाल ज्यादा होगा। दिल्ली मेट्रो और डीटीसी बस बेड़े जैसे अन्य सार्वजनिक परिवहन विकल्पों पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
उबर ने अपनी ओर से इस मामले पर एक बयान जारी किया है। बयान में कहा गया है, "हालांकि हमें परिवहन विभाग से कोई आदेश नहीं मिला है, हम दोहराना चाहते हैं कि दिल्ली में उबर प्लेटफॉर्म पर सभी कारें सीएनजी या इलेक्ट्रिक हैं और साझा गतिशीलता ज्यादा लोगों को कम कारों में यात्रा करने में मदद करती है।"