राष्ट्रीय राजधानी अपनी नई ईवी नीति लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। 2020 की ईवी नीति 8 अगस्त को खत्म हो गई और सरकार इसे आगे बढ़ाया था। परिवहन आयुक्त आशीष कुंद्रा ने कहा है कि नई ईवी नीति चार्जिंग बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और खरीद प्रोत्साहन के लिए वित्तपोषण के दायरे का विस्तार करने पर ध्यान केंद्रित करेगी, जिससे यात्रियों द्वारा ईवी अपनाने को प्रोत्साहित किया जाएगा।
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सोमवार को भारतीय जी20 सचिवालय के साथ इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (आईसीसीटी) द्वारा स्वच्छ परिवहन पर आयोजित एक शिखर सम्मेलन में बोलते हुए कुंद्रा ने कहा कि सरकार 2025 तक बस के बेड़े के कम से कम 80 प्रतिशत को इलेक्ट्रिक बनाने का लक्ष्य बना रही है। ईवी नीति नए वाहन सेगमेंट जैसे हल्के और मध्यम-ड्यूटी ट्रकों या मालवाहक वाहनों को भी लक्षित करेगी जो शहर के भीतर संचालन करते हैं। उन्होंने कहा, "उदाहरण के लिए, कचरा ढोने वाले वाहन या टैंकर या यहां तक कि स्कूल बसें।"
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राज्य सरकार डिलीवरी सर्विस बेड़े और सभी सरकारी आधिकारिक बेड़े के फुल ईवी परिवर्तन को भी इसी अवधि के दौरान पूरा करने का लक्ष्य रख रही है।
दिल्ली ईवी नीति पहली बार 2020 में कार्बन उत्सर्जन को कम करने और लोगों को बैटरी से चलने वाले वाहनों के इस्तेमाल के लाभों के बारे में जागरूक करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। हालांकि, व्यक्तिगत गतिशीलता बेड़े में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी अभी भी सीमित है।
दिल्ली ईवी सेल के मुताबिक, नीति लागू होने के बाद से शहर में 4,000 ईवी चार्जिंग पॉइंट जोड़े गए हैं। इसके परिचालन में 300 इलेक्ट्रिक बसें भी हैं और इस साल के आखिर तक 1,500 बसें जोड़ी जाएंगी। 2025 तक 8,000 इलेक्ट्रिक बसों का लक्ष्य दिल्ली को कार्बन फुटप्रिंट को कम करने और वाहन प्रदूषण को कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने में मदद करेगा।