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ICE Cars: दिल्ली में ईवी रजिस्ट्रेशन 29% बढ़े, फिर भी ऑटो बाजार में पेट्रोल वाहनों का दबदबा कायम

Fri, 10 Apr 2026 10:17 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राष्ट्रीय राजधानी में 2025-26 में पिछले वर्ष की तुलना में इलेक्ट्रिक वाहनों के पंजीकरण में 29 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। जबकि पेट्रोल वाहनों के पंजीकरण में वृद्धि जारी रही।
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Delhi Traffic - फोटो : PTI

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 2025-26 के दौरान इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के रजिस्ट्रेशन में पिछले वर्ष की तुलना में 29 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, पेट्रोल वाहनों के रजिस्ट्रेशन में भी लगातार बढ़ोतरी जारी रही। यह जानकारी डाटा रिसर्च से जुड़ी एक संस्था के विश्लेषण से सामने आई है।

क्या EV खरीद और बढ़ने की संभावना है?
विशेषज्ञों का मानना है कि नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति और हालिया रुझान आने वाले वर्षों में ईवी खरीद में और वृद्धि का संकेत देते हैं।

आंकड़े क्या कहते हैं?
संस्था द्वारा सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के Vahan डैशबोर्ड के डेटा के विश्लेषण में पाया गया कि ईवी रजिस्ट्रेशन 2024-25 में 83,512 से बढ़कर 2025-26 में 1.07 लाख हो गया। इसी अवधि में ईवी हाइब्रिड वाहनों की संख्या भी 6,796 से बढ़कर 8,476 हो गई।

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Car Pollution - फोटो : Adobe Stock

क्या पारंपरिक ईंधन वाले वाहन भी बढ़े?
इसी समय पारंपरिक ईंधन वाले वाहनों में भी वृद्धि जारी रही। पेट्रोल और पेट्रोल-एथेनॉल वाहनों का रजिस्ट्रेशन 2024-25 में लगभग 5.30 लाख से बढ़कर 2025-26 में करीब 6.21 लाख हो गया। इससे स्पष्ट है कि स्वच्छ तकनीकों के बढ़ने के बावजूद प्रदूषण फैलाने वाले ईंधन आधारित वाहनों की हिस्सेदारी अभी भी काफी अधिक है।

अन्य ईंधन श्रेणियों में क्या बदलाव हुआ?
सीएनजी वाहनों का रजिस्ट्रेशन 25,330 से बढ़कर 32,224 हो गया, जो अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन विकल्पों की ओर झुकाव को दर्शाता है। इसके विपरीत, डीजल वाहनों की संख्या 12,007 से घटकर 11,498 रह गई, जो 2019 के बाद के सबसे निचले स्तरों में से एक है।

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Electric Car - फोटो : Freepik

हाइब्रिड और अन्य वाहनों का रुझान कैसा रहा?
फॉसिल हाइब्रिड वाहनों में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई, जो 15,804 से बढ़कर 32,902 हो गई। यानी यह संख्या दोगुने से भी अधिक हो गई। हालांकि ये अभी भी पारंपरिक ईंधन पर निर्भर हैं। वहीं पेट्रोल-सीएनजी वाहनों की संख्या 47,192 से घटकर 36,130 हो गई। ‘अन्य ईंधन’ श्रेणी में वाहन 20 से बढ़कर 23 ही हुए, यानी मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई।

भविष्य में पेट्रोल वाहनों का क्या होगा?
विशेषज्ञों का कहना है कि नीति समर्थन और उपभोक्ताओं की बदलती पसंद के चलते आने वाले वर्षों में पेट्रोल और पेट्रोल-एथेनॉल वाहनों की वृद्धि धीमी हो सकती है। क्योंकि लोग तेजी से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ रहे हैं।

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ट्रैफिक - फोटो : संवाद

विशेषज्ञों की क्या राय है?
संस्था के प्रमुख ने कहा कि डीजल रजिस्ट्रेशन में गिरावट आई है, जबकि पेट्रोल रजिस्ट्रेशन लगभग स्थिर रहे। इससे संकेत मिलता है कि ईवी अपनाने में वृद्धि के बावजूद पेट्रोल और सीएनजी वाहनों की हिस्सेदारी अभी तक ज्यादा प्रभावित नहीं हुई है।

उन्होंने कहा, “ईवी रजिस्ट्रेशन में तेज वृद्धि हुई है, लेकिन अभी तक इसने पेट्रोल और सीएनजी वाहनों की संख्या को कम नहीं किया है। हालांकि, नई ईवी नीति में बढ़े हुए प्रोत्साहनों के चलते भविष्य में पेट्रोल और सीएनजी वाहनों में धीरे-धीरे कमी और ईवी अपनाने में और वृद्धि देखी जा सकती है।”

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इलेक्ट्रिक स्कूटी - फोटो : Adobe Stock

नई EV नीति से क्या बदलाव आएंगे?
आगामी ईवी नीति से इलेक्ट्रिक वाहन अधिक किफायती बनने की उम्मीद है। और इससे लोग पुराने, प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को बदलने के लिए प्रेरित होंगे।

स्क्रैपेज पॉलिसी क्या है?
इस नीति की एक प्रमुख विशेषता स्क्रैपेज-लिंक्ड इंसेंटिव है। दिल्ली में रजिस्टर्ड BS-IV या उससे पुराने वाहनों के मालिकों को अधिकृत केंद्रों पर वाहन स्क्रैप करने पर वित्तीय लाभ मिलेगा। इस लाभ को पाने के लिए उन्हें स्क्रैपेज सर्टिफिकेट मिलने के छह महीने के भीतर नया ईवी खरीदना होगा। यह इंसेंटिव खरीदे गए ईवी के प्रकार पर निर्भर करेगा।

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Delhi Traffic - फोटो : PTI

क्या टैक्स में भी राहत मिलेगी?
सरकार ईवी खरीदारों के लिए टैक्स लाभ जारी रख सकती है। 30 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) तक की कीमत वाले इलेक्ट्रिक वाहनों को 31 मार्च 2030 तक रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में पूरी छूट मिल सकती है। हालांकि 30 लाख रुपये से अधिक कीमत वाले वाहनों को यह लाभ नहीं मिल सकता।

कुल वाहन रजिस्ट्रेशन का रुझान क्या रहा?
दिल्ली में कुल वाहन रजिस्ट्रेशन 2025-26 में 17.9 प्रतिशत बढ़कर 8.50 लाख यूनिट हो गया। जो पिछले वित्त वर्ष के लगभग 7.21 लाख यूनिट से अधिक है। यह कुल मांग में मजबूत वृद्धि को दर्शाता है।

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Electric Vehicles - फोटो : Freepik

किस श्रेणी का दबदबा बना हुआ है?
डेटा के अनुसार पेट्रोल और एथेनॉल मिश्रित वाहनों का दबदबा 73.1 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ बना रहा, जबकि ईवी की हिस्सेदारी 12.7 प्रतिशत रही। फॉसिल और ईवी हाइब्रिड मिलाकर करीब 4.9 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं। जो इलेक्ट्रिफाइड विकल्पों की ओर धीरे-धीरे बढ़ते रुझान को दिखाता है।

क्या पारंपरिक ईंधन वाले वाहन अब भी बढ़ रहे हैं?
इस बदलाव के बावजूद पारंपरिक ईंधन वाले वाहन संख्या के हिसाब से बढ़ते रहे। पेट्रोल और सीएनजी दोनों में स्थिर वृद्धि दर्ज की गई, जबकि डीजल की हिस्सेदारी बहुत कम रह गई।

EV अपनाने की गति कैसी है?
डेटा से यह भी पता चलता है कि ईवी अपनाने की गति कुल बाजार की तुलना में तेज है। जो मुख्य रूप से टू-व्हीलर और निजी फोर-व्हीलर सेगमेंट में मजबूत मांग के कारण है। 

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