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Chinese EV: चीन के 'पायरेट बिजनेस मॉडल' से खतरे में पश्चिमी कार कंपनियां, BYD ने टेस्ला को पछाड़ा

Thu, 16 Jul 2026 10:06 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

चीन की इलेक्ट्रिक वाहन (EV) निर्माता BYD एक बार फिर वैश्विक चर्चा के केंद्र में है। यूरोपीय मीडिया संस्थान Politico की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कंपनी ने जिस कारोबारी रणनीति के दम पर वैश्विक EV बाजार में तेजी से बढ़त हासिल की है, वह पश्चिमी देशों के ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।
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China EV Threat - फोटो : Amar Ujala

चीनी ऑटोमोबाइल उद्योग के तेजी से बढ़ते कदमों ने पश्चिमी देशों की नींद उड़ा दी है। यूरोपीय मीडिया संस्थान 'पोलिटिको' (Politico) की एक नई और सनसनीखेज रिपोर्ट ने दावा किया है कि चीन की दिग्गज इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) निर्माता कंपनी BYD (बीवाईडी) ने एक तथाकथित 'पायरेट बिजनेस मॉडल' (समुद्री डाकू जैसा कारोबारी मॉडल) के दम पर वैश्विक ईवी बाजार में पहला स्थान हासिल कर लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन की यह रणनीति यूरोप और उत्तरी अमेरिका के घरेलू ऑटो उद्योगों के अस्तित्व के लिए एक बड़ा खतरा बन गई है। 
 

क्या हैं BYD के वो चौंकाने वाले आंकड़े जिन्होंने टेस्ला को पीछे छोड़ दिया?

इस रिपोर्ट में BYD की अकल्पनीय रफ्तार को दर्शाने वाले कुछ बेहद महत्वपूर्ण आंकड़े जारी किए गए हैं:

  • बिक्री का नया रिकॉर्ड:
    BYD ने साल 2025 में दुनिया भर में लगभग 46 लाख वाहनों की बिक्री की है।

  • प्योर इलेक्ट्रिक वाहनों का दबदबा:
    इस कुल बिक्री में से 22.6 लाख गाड़ियां पूरी तरह से बैटरी से चलने वाली इलेक्ट्रिक कारें थीं।

  • टेस्ला को पछाड़ा:
    इन आंकड़ों के साथ चीनी कंपनी ने दिग्गज अमेरिकी ब्रांड टेस्ला (Tesla) को पीछे छोड़ दिया है। जिसने इसी अवधि में लगभग 16 लाख वाहनों की डिलीवरी की थी।

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2026 BYD Atto 3 - फोटो : BYD

क्या है चीनी कंपनियों का वह 'पायरेट बिजनेस मॉडल' जिससे डरा हुआ है पश्चिम?

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि BYD की यह अभूतपूर्व सफलता किसी सामान्य व्यापारिक रणनीति का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह एक खास 'पायरेट मॉडल' पर टिकी है। इस रणनीति को "कॉपी, एब्जॉर्ब, सब्सिडाइज, स्केल, डंप और डोमिनेट" (नकल करो, सोखो, सब्सिडी पाओ, उत्पादन बढ़ाओ, बाजार में खपाओ और राज करो) के छह चक्रों में समझाया गया है:

  • नकल करना और सोखना:
    BYD ने अपने शुरुआती दौर में जापानी कार निर्माताओं के डिजाइनों की हूबहू नकल की। इसके बाद, रिवर्स इंजीनियरिंग (तकनीक को खोलकर समझना) के जरिए उन्होंने बैटरी, मोटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, पावरट्रेन और सेमीकंडक्टर्स का खुद से उत्पादन करना शुरू कर दिया।

  • सब्सिडी और वर्टिकल इंटीग्रेशन:
    खुद के पुर्जे बनाने की इस काबिलियत को चीनी सरकार की भारी सब्सिडी, राज्य के समर्थन और चीन के विशाल घरेलू बाजार का साथ मिला। जिससे कंपनी ने बेहद तेजी से अपना विस्तार किया।

  • डंप और डोमिनेट:
    अपने विशाल उत्पादन और कम लागत के दम पर अब ये चीनी कंपनियां यूरोप और अन्य क्षेत्रों के बाजारों में बेहद सस्ते इलेक्ट्रिक वाहनों की बाढ़ ला रही हैं, यानी इन ईवी को डंप कर रही हैं। ताकि वहां के बाजार पर कब्जा किया जा सके।

रिपोर्ट की गंभीर चेतावनी: "अगर पूरा पश्चिम एकजुट नहीं हुआ, तो इसका अंत बहुत बुरा होगा। BYD सिर्फ एक कार निर्माता कंपनी नहीं है- यह बैलेंस शीट के साथ चल रहा एक समुद्री डाकू का जहाज (पायरेट शिप) है, जो एक समय में एक सस्ती ईवी बेचकर यूरोप और अमेरिका दोनों के औद्योगिक आधार को खोखला कर रहा है।"

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BYD Denza Z Electric Supercar - फोटो : BYD

पश्चिमी कार निर्माताओं को चीन में कैसे मिली शिकस्त?

रिपोर्ट में चीनी बाजार की उस कड़वी सच्चाई का भी जिक्र किया गया है जिसे विदेशी कंपनियों ने मुनाफे के लालच में नजरअंदाज किया था:

  • 'शैतान का सौदा':
    चीन ने विदेशी कार निर्माताओं को अपने विशाल उपभोक्ता बाजार तक पहुंच तो दी, लेकिन इसके बदले में उनसे जबरन तकनीक का हस्तांतरण करवाने का सौदा किया।

  • फॉक्सवैगन (Volkswagen) का बुरा हाल:
    इस समझौते का खामियाजा जर्मनी की दिग्गज कंपनी फॉक्सवैगन को भुगतना पड़ रहा है। पिछले एक दशक में चीन से होने वाली फॉक्सवैगन की कमाई में 80 प्रतिशत से अधिक की भारी गिरावट आई है।

  • ऐतिहासिक छंटनी की तैयारी:
    इस मंदी के कारण फॉक्सवैगन साल 2030 तक जर्मनी में 35,000 नौकरियों में कटौती करने जा रही है। कंपनी जर्मनी में अपने चार कारखानों को बंद करने और दुनिया भर में करीब 1 लाख नौकरियों को खत्म करने पर विचार कर रही है। यह एक ऐसा पुनर्गठन है जो कभी अकल्पनीय माना जाता था।

  • दिग्गजों पर दबाव:
    BYD और अन्य चीनी कार निर्माता यूरोप में लगातार अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। जिससे फॉक्सवैगन के साथ-साथ मर्सिडीज-बेंज और बीएमडब्ल्यू (BMW) जैसी पारंपरिक दिग्गज कंपनियों पर भारी दबाव बन गया है।

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BYD Seagull - फोटो : BYD

इस चीनी घुसपैठ पर पश्चिमी देशों की क्या प्रतिक्रिया रही है?

चीनी ईवी की इस सुनामी को रोकने के लिए पश्चिमी देश अपने-अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। लेकिन उनमें एकजुटता की कमी दिखाई दे रही है:

  • यूरोपीय संघ (EU) का सुस्त रवैया:
    यूरोपीय संघ के अधिकारियों ने चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों पर 17 प्रतिशत का काउंटरवेलिंग ड्यूटी (प्रतिकारी शुल्क) लगाने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, रिपोर्ट का आरोप है कि आपसी व्यापार और चीनी निवेश खोने के डर से यूरोपीय देशों की प्रतिक्रिया बिखरी हुई नजर आ रही है।

  • उत्तरी अमेरिका में पिछले दरवाजे से एंट्री:
    अमेरिकी बाजार के कड़े नियमों से बचने के लिए चीनी ऑटो कंपनियां अब कनाडा और मेक्सिको को एंट्री पॉइंट (प्रवेश द्वार) के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं। वे सीधे अमेरिका जाने के बजाय फिलहाल वहां डीलर नेटवर्क तैयार करने, ग्राहकों की पसंद को समझने और नियामकीय मंजूरी मिलने का इंतजार कर रही हैं।

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