अच्छा इंजन ऑयल आसानी से नहीं होता लीक
वहीं एक अच्छा इंजन ऑयल आपकी इंजन सील और गैसकेट्स को ठीक रखता है और आसानी से लीक नहीं होता। बाजार में आमतौर पर तीन तरह के इंजन ऑयल इस्तेमाल होते हैं। इनमें मिनरल ऑयल, सेमी-सिंथेटिक ऑयल और फुली सिंथेटिक ऑयल शामिल हैं। लेकिन इन तीनों का ग्रेड अलग-अलग है। हर इंजन के लिए अलग-अलग इंजन ऑयल इस्तेमाल करना होता है, जिसके बारे में जानकारी आप अपनी कार कंपनी की डीलरशिप से जुटा सकते हैं। इसके अलावा गाड़ी के साथ आने वाली बुकलेट में भी इंजन ऑयल के ग्रेड के बारे में जानकारी होती है।
मिनरल इंजन ऑयल
ये असल में परिष्कृत पेट्रोलियम ऑयल्स होते हैं और विस्तृत तापमान में काम करने में सक्षम होते हैं। बाजार में आने वाली ज्यादातर कारों और बाइक्स में मिनकल इंजन ऑयल का इस्तेमाल होता है। यह न केवल बेहद सस्ते होते हैं बल्कि फिक्शन से पैदा होने वाली गर्मी से सुरक्षा के लिए पर्याप्त लुब्रिकेशन और प्रोटेक्शन भी देते हैं। वहीं यह सामान्य तापमान में बेहतर काम करते हैं, अगर तापमान ज्यादा ठंडा या ज्यादा गर्म हो तो यह अप्रभावी हो जाता है। सेमी-सिंथेटिक या फुली सिंथेटिक के मुकाबले ये सस्ता होता है।
सेमी-सिंथेटिक ऑयल
जैसा कि नाम से स्पष्ट है कि यह मिनरल और फुली-सिंथेटिक के बीच का इंजन ऑयल है, जिसमें सिंथेटिक ऑयल की थोड़ी मात्रा मिनरल ऑयल में मिलाई जाती है। जिससे कीमत में बिना कोई बढ़ोतरी हुए ऑयल की गुणवत्ता बढ़ जाती है। यह ऑयल कम तापमान में भी बेहतरीन चिपचिपाहट देता है, वहीं उच्च तापमान में अच्छा प्रतिरोध देता है। वहीं सेमी-सिंथेक इंजन ऑयल मिनरल ऑयल से अच्छा होता है, लेकिन फुली सिंथेटिक ऑयल से बेहतर नहीं है।
फुली-सिंथेटिक ऑयल
फुली-सिंथेटिक इंजन ऑयल्स को बेहतरीन लुब्रिकेशन के लिए जाना जाता है, वहीं इनकी पररफॉरमेंस भी शानदार होती है। वहीं फुली सिंथेटिक इंजन ऑयल वाले वाहन ज्यादा माइलेज भी देते हैं। जहां मिनरल ऑयल को मूल अणुओं में तोड़ कर उसकी अशुद्धियों को बाहर निकाल दिया जाता है। वहीं फुली सिंथेटिक ऑयल में खास अणु होते हैं, जो बेहतर लुब्रिकेशन देते हैं। यह ऑयल अधिकतम और न्यूनतम तापमान पर भी बेहतरीन कार्य करता है। लेकिन इस ऑयल को बनाना महंगा पड़ता है, जिसके चलते ये बाकी दोनों से महंगा है।
ऐसे लगाएं पता
इसके अलावा बाजार में कुछ और तरह के भी इंजन ऑयल मिलते हैं, जिनकी विस्कोसिटी (चिपचिपाहट) ग्रेड से उनकी परफॉरमेंस के बारे में पता लगाया जा सकता है। कम विस्कोसिटी यानी कि यह पतला होगा और इंजन में तेजी से जगह बना सकता है। वहीं ज्यादा विस्कोसिटी का मतलब है ज्यादा मोटा या भारी, वहीं यह इंजन में धीरे-धीरे जगह बनाएगा। वहीं इसमें इंजन के पुर्जो की सुरक्षा के लिए एक खास सुरक्षा लेयर भी होती है।
मल्टीग्रेड इंजन ऑयल्स
आजकल यह काफी पॉपुलर है और मौजूदा वाहनों में इसका जमकर इस्तेमाल किया जाता है। इसमें हर प्रकार के मौसम में इस्तेमाल किया जा सकता है। इनका विस्कोसिटी ग्रेड दो अंकों में होता है, उदाहरण के लिए 10W50, इसका मतलब है कि 10 डिग्री न्यूनतम तापमान और 50 डिग्री अधिकतम तापमान। इसकी तरह से इनकी नंबर लिखे होते हैं। इनमें W का मतलब विंटर से होता है। अगर नंबर कम होता है, तो इसका फ्लो बेहतर होगा। 5W30 का फ्लो 20W40 से बेहतर होगा।
मोनोग्रेड इंजन ऑयल
ये इंजन ऑयल के तापमान में भी काम करते हैं। ज्यादातर पुराना वाहनों में इनका इस्तेमाल होता है। इनमें भी दो प्रकार के होते हैं कम विस्कोसिटी और हाई विस्कोसिटी। कम विस्कोसिटी इंजन ऑयल का ग्रेड 0 से 25 तक होता है जैसे 10W। हाई विस्कोसिटी ग्रेड में W नहीं होता है, और इन्हें गर्मियों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।