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Blind Spots: ब्लाइंड स्पॉट क्या होते हैं और क्यों हैं ये इतने सारे एक्सीडेंट के जिम्मेदार? जानें और करें बचाव!

Sat, 13 Jun 2026 05:55 PM IST
Suyash Pandey ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीे

सार

Car Blind Spots Explained: कार चलाते समय ब्लाइंड स्पॉट सबसे बड़े सुरक्षा खतरों में से एक है। यह वह हिस्सा होता है जिसे ड्राइवर रियर-व्यू और साइड मिरर में नहीं देख पाता। लेन बदलते समय या मोड़ लेते समय इसी वजह से कई दुर्घटनाएं होती हैं। 
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क्या होता है ब्लाइंड स्पॉट - फोटो : एआई
सड़क पर कार चलाना अपने आप में एक बड़ी जिम्मेदारी है। ड्राइविंग के दौरान कई चुनौतियां सामने आती हैं, जिनमें से ब्लाइंड स्पॉट एक ऐसी छुपी हुई परेशानी है, जो अक्सर बड़े सड़क हादसों का कारण बनती है। अगर आप कार चलाते हैं, तो आपके लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि ब्लाइंड स्पॉट क्या है और इसे कैसे सुरक्षित बनाया जा सकता है। आइए, इसे बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं।


आखिर क्या होता है ब्लाइंड स्पॉट?

सीधे शब्दों में कहें तो, कार के आस-पास के वे हिस्से जो आपको अपनी कार के साइड मिरर (ORVM) या अंदर वाले शीशे (IRVM) में दिखाई नहीं देते, उन्हें ब्लाइंड स्पॉट कहते हैं। कई बार आपके ठीक बगल में या थोड़ा पीछे कोई बाइक, स्कूटर या दूसरी कार चल रही होती है, लेकिन शीशों में वो आपको नजर नहीं आती। ऐसी स्थिति में अगर आप अचानक लेन बदलते हैं या टर्न लेते हैं, तो एक्सीडेंट का खतरा काफी बढ़ जाता है।
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क्या होता है ब्लाइंड स्पॉट - फोटो : एआई

ब्लाइंड स्पॉट से बचने के 5 आसान तरीके

अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए ड्राइविंग के दौरान इन आसान टिप्स को जरूर फॉलो करें:


1. कार के शीशों की सही सेटिंग

ज्यादातर लोग अपने साइड मिरर को ऐसे सेट करते हैं कि उन्हें अपनी ही कार का पिछला हिस्सा ज्यादा दिखाई देता है, जो कि गलत है। 
सही तरीका: अपने साइड मिरर को थोड़ा बाहर की तरफ रखें ताकि आपकी कार का सिर्फ जरा सा हिस्सा दिखे और सड़क ज्यादा दिखाई दे। इससे आपको बगल से आने वाली गाड़ियां जल्दी और साफ नजर आएंगी।
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क्या होता है ब्लाइंड स्पॉट - फोटो : एआई

2. शोल्डर चेक की आदत डालें

यह ब्लाइंड स्पॉट से बचने का सबसे पुराना और असरदार तरीका है। जब भी आपको लेन बदलनी हो या टर्न लेना हो, तो शीशे देखने के बाद सिर्फ एक सेकेंड के लिए अपनी गर्दन को हल्का सा पीछे घुमाकर खिड़की के बाहर देखें। यह छोटी सी आदत आपको उन गाड़ियों को देखने में मदद करेगी, जो शीशे में नजर नहीं आ रही थीं।

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क्या होता है ब्लाइंड स्पॉट - फोटो : एआई

3. गाड़ियों की स्पीड को ट्रैक करें

ड्राइविंग करते समय अपने आस-पास चलने वाली गाड़ियों पर नजर रखें। अगर कोई गाड़ी आपके साइड मिरर से अचानक गायब हो जाए, लेकिन आपको अपनी खिड़की के बाहर भी नजर न आए, तो समझ लीजिए कि वह आपके ब्लाइंड स्पॉट में है। ऐसी स्थिति में भूलकर भी अचानक लेन न बदलें।
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क्या होता है ब्लाइंड स्पॉट - फोटो : एआई

4. हमेशा इंडिकेटर का इस्तेमाल करें

लेन बदलने या मुड़ने से कम से कम 3 से 5 सेकेंड पहले इंडिकेटर जरूर दें। इससे आपके आस-पास या आपके ब्लाइंड स्पॉट में चल रही गाड़ियां सतर्क हो जाएंगी। साथ ही, इस बात का भी ध्यान रखें कि आप खुद किसी बड़े ट्रक या कार के ब्लाइंड स्पॉट में लगातार न चलें; अपनी स्पीड में थोड़ा बदलाव करते रहें।
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क्या होता है ब्लाइंड स्पॉट - फोटो : एआई

5. तकनीक और अतिरिक्त शीशे का लें सहारा

आजकल की नई कारों में ब्लाइंड स्पॉट मॉनिटरिंग सिस्टम (BSM) आता है। जब भी कोई गाड़ी आपके ब्लाइंड स्पॉट में आती है, तो यह सिस्टम लाइट या बीप के जरिए आपको अलर्ट कर देता है। अगर आपकी कार में यह फीचर नहीं है, तो परेशान न हों। आप मार्केट से मात्र कुछ रुपयों में छोटे गोल कॉन्वेक्स मिरर (उत्तल दर्पण) खरीदकर अपने साइड मिरर के कोने पर लगा सकते हैं। ये छोटे शीशे आपके देखने के दायरे को काफी बढ़ा देते हैं और हादसों से बचाते हैं।
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