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CAFE-3: क्या सस्ती कारें महंगी हो जाएंगी? जानें क्या हैं कैफे-3 नियम और क्यों हैं चर्चा में?

Mon, 23 Mar 2026 11:34 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

प्रस्तावित कॉर्पोरेट औसत ईंधन दक्षता (CAFE-3) के नियमों से एंट्री-लेवल कारों की कीमत 17% तक बढ़ सकती है, जो ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) के आधिकारिक अनुमानों से काफी ज्यादा है। जानें पूरी डिटेल्स।
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Auto Sales - फोटो : Adobe Stock

प्रस्तावित कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (CAFE-3) नियमों का उद्देश्य वाहनों के उत्सर्जन को कम करना है। लेकिन इंडस्ट्री का कहना है कि इन नियमों से एंट्री-लेवल (सस्ती) कारों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।

क्या सस्ती कारों की कीमत 17% तक बढ़ सकती है?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इंडस्ट्री सूत्रों का कहना है कि, CAFE-3 लागू होने पर एंट्री-लेवल कारों की कीमत में करीब 17 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है।
यह अनुमान ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) के आधिकारिक आंकड़ों से कहीं ज्यादा है।

जहां BEE ने तकनीकी अपग्रेड के लिए करीब 15,000 रुपये प्रति वाहन का अनुमान लगाया है। वहीं इंडस्ट्री का मानना है कि असल लागत 25,000 रुपये (करीब 7 प्रतिशत) तक पहुंच सकती है।
अगर फ्लेक्स-फ्यूल या कार्बन-न्यूट्रल विकल्प अपनाए जाते हैं, तो यह लागत 65,000 रुपये (करीब 17 प्रतिशत) तक जा सकती है। 

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Car Pollution - फोटो : Adobe Stock

क्या इतने खर्च के बाद भी उत्सर्जन लक्ष्य पूरे नहीं होंगे?
चौंकाने वाली बात यह है कि इतने खर्च के बाद भी कंपनियां तय उत्सर्जन लक्ष्य हासिल नहीं कर पाएंगी।

उदाहरण के तौर पर:

  • 740 किलोग्राम की एंट्री-लेवल कार का उत्सर्जन लगभग 83.43 g CO₂/km रहेगा

  • जबकि FY32 का लक्ष्य 62.04 g CO₂/km है

यानी करीब 21.39 g CO₂/km का अंतर बना रहेगा।
फ्लेक्स-फ्यूल विकल्प अपनाने पर भी लगभग 7.49 g CO₂/km का अंतर रहेगा।

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Auto Sales - फोटो : Adobe Stock

क्या कंपनियों पर दोहरी मार पड़ेगी?
इंडस्ट्री का कहना है कि कंपनियों को एक साथ दो तरह का बोझ उठाना पड़ सकता है:

  • नई टेक्नोलॉजी पर भारी खर्च

  • लक्ष्य पूरा न होने पर पेनल्टी

इससे लागत और बढ़ेगी, जिसका असर सीधे ग्राहकों पर पड़ेगा।

लागत इतनी ज्यादा क्यों बढ़ रही है?
असल खर्च केवल पार्ट्स तक सीमित नहीं है। इसमें शामिल हैं:

  • इंजीनियरिंग बदलाव

  • सप्लायर अपग्रेड

  • टेस्टिंग और वैलिडेशन

इंडस्ट्री का कहना है कि BEE के अनुमान में इन खर्चों को पूरी तरह शामिल नहीं किया गया है।

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Car Pollution - फोटो : Adobe Stock

क्या छोटी कारों का बाजार खत्म हो सकता है?
छोटी कारें सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी, क्योंकि यह सेगमेंट कीमत को लेकर बहुत संवेदनशील है और पहली बार कार खरीदने वालों के लिए एंट्री पॉइंट होता है।

एक्सपर्ट्स का मानना है:

  • कंपनियां छोटी कारों की बजाय एसयूवी पर ज्यादा ध्यान दे सकती हैं

  • भारत में यह ट्रेंड पहले से दिख रहा है

FY19 से FY25 के बीच छोटी कारों की बिक्री में करीब 62 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है।

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Auto Sales - फोटो : Adobe Stock

क्या बड़े वाहनों पर असर कम होगा?
हां, एसयूवी और बड़ी कारों पर असर अपेक्षाकृत कम होगा क्योंकि:

  • उनकी बेस कीमत पहले से ज्यादा होती है

  • उनमें कई तकनीकी फीचर्स पहले से मौजूद होते हैं


क्या GST छूट का फायदा खत्म हो जाएगा?
इंडस्ट्री का कहना है कि CAFE-3 के कारण बढ़ने वाली लागत, छोटी कारों पर दी गई जीएसटी छूट के फायदे को लगभग खत्म कर सकती है।
यानी जो राहत पहले मिली थी, वह अब बेअसर हो सकती है।

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Car Pollution - फोटो : Adobe Stock

इसका ऑटो इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ेगा?
अगर छोटी कारें महंगी होती रहीं, तो:

  • पहली बार कार खरीदने वाले ग्राहकों की संख्या घट सकती है

  • ऑटो मार्केट की ग्रोथ धीमी हो सकती है

  • प्रीमियम और एसयूवी सेगमेंट तेजी से बढ़ता रहेगा


कुल मिलाकर क्या संकेत हैं?
CAFE-3 नियम पर्यावरण के लिए जरूरी हैं। लेकिन इनकी लागत और व्यवहारिकता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अगर सही संतुलन नहीं बनाया गया, तो सस्ती कारें आम लोगों की पहुंच से बाहर हो सकती हैं और इंडस्ट्री का संतुलन बिगड़ सकता है।

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