दिल्ली में डीजल वाहनों पर 10 वर्ष तक ही चलाने की पाबंदी के बाद, मुंबई डीजल वाहनों को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने वाला अगला प्रमुख शहर हो सकता है। गुरुवार को बॉम्बे हाई कोर्ट ने कथित तौर पर वित्तीय राजधानी में खराब होती वायु गुणवत्ता के बीच डीजल वाहनों को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने का प्रस्ताव दिया। यह प्रस्ताव बेकरी द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली लकड़ी/कोयले से चलने वाली भट्टियों पर भी लागू होता है।
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बॉम्बे हाई कोर्ट ने शहर में बढ़ते वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के स्तर पर चिंता जताई। 10 जनवरी, 2025 को, मुंबई का AQI 148 था, जिसे खराब माना जाता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति जीएस कुलकर्णी की उच्च न्यायालय की पीठ ने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल पर जोर दिया।
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चरणबद्ध तरीके से हटें डीजल वाहन
बेंच ने प्रस्ताव दिया, "दिल्ली की नकल नहीं करनी है, लेकिन क्या हम सिर्फ सीएनजी से चलने वाले वाहनों को अनुमति देने और डीजल इंजनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने पर विचार कर सकते हैं?" अदालत शहर की खराब वायु गुणवत्ता का हवाला देते हुए 2023 की एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई कर रही थी।
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मामले में एमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता डेरियस खंबाटा ने इस बात पर रोशनी डाली कि बेकरी द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली भट्टियां मुंबई में वायु प्रदूषण में तीसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता हैं। इस बीच, निर्माण स्थल और लाल श्रेणी के उद्योग शीर्ष दो योगदानकर्ता कारक थे। उन्होंने निर्माण स्थलों से होने वाले प्रदूषण को संबोधित करने की तत्काल जरूरत पर भी जोर दिया। जो शहर में वायु प्रदूषण का प्रमुख स्रोत है।
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बॉम्बे हाई कोर्ट ने प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए डीजल वाहनों को चरणबद्ध तरीके से बंद करने का सुझाव दिया। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि लोगों को पेट्रोल या डीजल से चलने वाली कारों के बजाय सीएनजी या इलेक्ट्रिक कारों का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
अनियंत्रित निर्माण स्थल से होता प्रदूषण
बढ़ते प्रदूषण स्तर के कारण दिल्ली में डीजल वाहनों की लाइफ कम हो गई है। उच्च प्रदूषण स्तर के कारण वायु प्रदूषण को और कम करने के लिए राजधानी में BS3 और BS4 वाहनों पर प्रतिबंध लगाना भी जरूरी हो गया है।
मुंबई में प्रदूषण के खतरनाक स्तर को देखते हुए, यह कदम सही दिशा में उठाया गया लग सकता है। हालांकि, वित्तीय राजधानी पारंपरिक रूप से पेट्रोल से चलने वाला बाजार रही है। जहां डीजल से चलने वाले यात्री वाहनों का प्रतिशत बहुत कम है। शहर को अनियंत्रित निर्माण कार्यों पर भी रोक लगानी होगी। जिसने पिछले कुछ वर्षों में प्रदूषण के स्तर को बढ़ा दिया है। न्यायालय ने निर्माण स्थलों पर वास्तविक समय में प्रदूषण की निगरानी के विचार का समर्थन किया।