वर्तमान बाइक और कारों में जो एक फीचर्स लगभग अनिवार्य रूप से आने लगा है वो डेटाइम रनिंग लाइट (DRL) है। DRL एक प्रकार की लाइट होती हैं जो वाहन के आगे की तरफ लगाई जाती हैं। यह इंजन स्टार्ट करने से और बंद करने तक लगातार जलती रहती हैं।
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DRL daytime running lights
क्या है DRL लगाने का मकसद
डीआरएल से आपके वाहन की विजिबिलिटी बढ़ती है। यह हेडलाइट की तरह रास्ता दिखाने में मदद तो नहीं करती, हालांकि सामने से आने वाले चालक को आपका वाहन नोटिस में जरूर आ जाता है। इससे दुर्घटना होने की संभावनाएं कम हो जाती हैं।
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DRL daytime running lights
डेटाइम रनिंग लाइट (DRL) या ऑटो हेडलैंप ऑन (AHO) पहले सिर्फ विकसित देशों में अनिवार्य थे, जिसे अप्रैल से भारत में भी लागू कर दिया गया था। डीआरएल का इजाद 40 साल पहले सुंदरता बढ़ाने के लिए किया गया था।
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DRL के फायदे
इससे ना सिर्फ वाहन चालकों बल्कि पैदल यात्रियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है।
सेफ्टी के साथ वाहन को स्टाइलिश भी बनाती है।
बेहतर विजिबिलिटी मिलती है।
DRL के नुकसान
इससे वाहन की बैटरी ज्यादा खर्च होती है।
यूरोपियन बाजार में DRL इसलिए लाई गई थी क्योंकि आमतौर पर धुंध जमा रहती है। हालांकि भारत का मौसम ऐसा नहीं है।