फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भारतीय क्यों खरीदना चाहते हैं Seltos, Hector और Hyundai Venue, ये है वजह!

Mon, 20 Jan 2020 03:58 PM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
Kia Seltos, MG Hector and Hyundai Venue - फोटो : AmarUjala
भारतीयों की कारों को लेकर पसंद बदल रही है। डेलॉयट की रिसर्च फर्म ने खुलासा किया है कि कार खरीदने वाले भारतीयों की टॉप लिस्ट में कनेक्टिंग कारें हैं। रिसर्च ने दावा किया है कार खरीदने वाले 80 फीसदी भारतीय सोचते हैं कि व्हीकल कनेक्टिविटी बढ़ने से उन्हें लंबे वक्त में फायदा होगा। वहीं जर्मनी में ऐसा सोचने वालों की संख्या केवल 36 फीसदी ही है। जबकि चीन, जापान और अमेरिका में यह आंकड़े 76, 49 और 46 फीसदी ही है।
विज्ञापन

2 of 5
Kia Seltos UVO - फोटो : kia

इन तीन कारों ने किया ‘कब्जा’

पिछले साल ऑटो सेक्टर पर ‘कब्जा’ जमाने वाली Kia Seltos, MG Hector और Hyundai Venue में एक दो चीजें समान थीं। पहली ये तीनों ही कारें एसयूवी सेगमेंट की थीं, और दूसरी ये तीनों ही कनेक्टिंग कारें थीं। इन तीनों ही गाड़ियों ने भारतीयों को जमकर लुभाया। एमजी हेक्टर पहलेr इंटरनेट कनेक्ट मिड साइज एसयूवी थी, जिसने टाटा हैरियर, जीप कंपास और महिंद्रा XUV500 को पीछे छोड़ दिया। 2019 की दूसरी छमाही में हेक्टर की तकरीबन 16 हजार यूनिट बिकी थीं, जबकि किआ सेल्टोस को लॉन्चिंग के पांच महीनों के भीतर ही एक लाख से ज्यादा बुकिंग मिलीं। वहीं वेन्यू को लॉन्चिंग के बाद 61 हजार बुकिंग मिलीं।
विज्ञापन

3 of 5
Connecting Cars - फोटो : Social Media

पांच तरह की कनेक्टिंग कारें

कनेक्टिंग कारों की खासियत होती है कि इनमें लगी खास डिवाइसेज के जरिये वे दूसरे वाहनों और सिस्टम से संपर्क स्थापित कर सकती है। वहीं इस फीचर से इंटरनेट और डाटा एक्सेस कर सकते हैं। दुनियाभर में पांच तरह की कनेक्टिंग टेक्नोलॉजी V2I (व्हीकल टू इंफ्रांस्ट्रक्चर),  V2V (व्हीकल टू व्हीकल), V2C (व्हीकल टू क्लाउंड), V2P (व्हीकल टू पेडेस्ट्रियन), V2X (व्हीकल टू एवरीथिंग) मिलती है।

4 of 5
Connecting Cars data Hack - फोटो : Kaspersky

डाटा की फिक्र

स्टडी में बताया गया है कि भारत में डाटा के गलत इस्तेमाल को लेकर भी लोग चिंतित हैं। 69 फीसदी लोग कनेक्टेड व्हीकल्स के बायोमीट्रिक डाटा की सुरक्षा को लेकर पऱेशान हैं, उनका कहना है कि बाहरी कंपनियों को यह डाटा शेयर करना बड़ी चिंता है। इसमें हार्ट रेट, ब्लड प्रेशर, ब्लड अल्कोहल लेवल जैसा डाटा भी शामिल है। स्टडी का कहना है कि डाटा सिक्योरिटी को लेकर जर्मनी (62 फीसदी) और अमेरिका (59 फीसदी) इसमें दूसरे-तीसरे नंबर पर हैं। वहीं दुनिया के सबसे बड़े बाजार चीन में 40 फीसदी लोग कनेक्टिंग वाहनों में डाटा सिक्योरिटी को लेकर चिंता जाहिर की।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
connected vehicle data sharing - फोटो : Social Media

चार फीसदी लोग नहीं चाहते शेयरिंग

बाहरी पार्टियों में इंश्योरेंस कंपनियां, सरकार, डीलर्स और ऑरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स शामिल हैं। स्टडी के मुताबिक 3022 लोगों में से 35 फीसदी का मानना है कि ऑरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) को बॉयोमीट्रिक डाटा शेयर करना सुरक्षित है, जबकि 15 फीसदी सरकार के साथ डाटा शेयर करना चाहते हैं। वहीं 10 फीसदी को डीलर्स के साथ डाटा शेयर करने में कोई परेशानी नहीं है। वहीं चार फीसदी लोग बॉयोमीट्रिक डाटा के शेयर करने के पक्षधर नहीं हैं।   
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें