देश के कई राज्यों में वाहनों पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाए जाने के बावजूद वाहन चोरी के मामलों में कमी नहीं आ रही है। वाहन चोरी की वारदात लगातार बढ़ी है। वहीं अब सरकार ने एक ऐसी टेक्नोलॉजी को अनुमति दी है, जिससे वाहन चोरी की घटनाओं पर लगाम लगेगी। केंद्र सरकार ने गाड़ियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए मोटर वाहन और उनके कलपुर्जों पर MicroDot Identifiers (माइक्रोडॉट आइडेंटिफायर) यानी पहचान चिह्न लगाने को लेकर अधिसूचना जारी की है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि माइक्रोडॉट से वाहनों की सुरक्षा बढ़ेगी। इससे संबंधित मसौदा इस साल जुलाई में जारी किया गया था। मसौदे पर मिले सुझावों और आपत्तियों पर गौर करने के बाद सरकार ने अधिसूचना जारी की है।
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MicroDot Identifiers
क्या होता है माइक्रोडॉट
सरकार ने वाहन चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए MicroDot Identifiers टेक्नोलॉजी को लागू करने के अधिसूचना जारी की है। इन माइक्रोडॉट का इस्तेमाल वाहनों पर किया जाएगा। दिखाई न देने वाले माइक्रोडॉट अब वाहनों और उनके पुर्जों पर लगाए जाएंगे जिससे चोरी रोकने के साथ ही नकली कलपुर्जों की पहचान हो सकेगी। माइक्रोडॉट और चिपकाने वाले पदार्थ वाहनों और कलपुर्जों पर स्थायी रूप से मौजूद रहेंगे जिन्हें हटाया नहीं जा सकता। इस टेक्नोलॉजी के तहत यूनिक नंबर और व्हीकल आइडेंटिफिकेशन नंबर वालें लेजर बेस्ड हजारों छोटे-छोटे माइक्रोडॉट्स को कार की पूरी बॉडी पर स्प्रे किया जाएगा। इंजन पर भी इन माइक्रोडॉट्स का स्प्रे किया जाएगा। इन नैनो माइक्रोडॉट्स का साइज 0.5 एमएम होगा।
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car theft
इस स्प्रे की खासियत होगी कि इन डॉक्ट्स को हटाना या खत्म करना मुश्किल होगा। साथ ही, इन डॉट्स को अल्ट्रावॉयलेट लाइट के जरिए देखा जा सकेगा। इस टेक्नोलॉजी के लागू होने के बाद कार चोरों को चोरी करना मुश्किल होगा। हालांकि दक्षिणी अफ्रिका में सितंबर 2012 से और अमेरिका में इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल पहले से ही किया जा रहा है। इस टेक्नोलॉजी के जरिए चोरी हुए वाहनों और उनके मालिकों के बारे में चुटकियों में पता लगाया जा सकेगा। यहां तक कि कार पुर्जे पुर्जे भी अलग कर दिए जाएं, तो भी कार की डिटेल्स पता लगाई जा सकती हैं।
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car theft
देश की ऑटोमोबाइल टेक्निकल स्टैंडर्ड्स का आंकलन करने वाली संस्था CMVR-TSC ने भी इसके टेक्नलॉजी के स्टैंडर्ड्स को लेकर बैठक की थी, जिसमें इसे मंजूरी दी गई। मंत्रालय ने कहा कि अधिसूचना के मुताबिक वाहनों, उनके पुर्जों, कंपोनेंट्स, असेंबलीज और सब-असेंबलीज पर माइक्रोडॉट्स लगाने वाली कंपनियों को ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स (एआईएस)-155 का पालन करना होगा।
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कार चोरी
वहीं सरकार ने इस टेक्नोलॉजी की कीमतों को भी मंजूरी दे दी है। सरकार का मामना है कि जैसे-जैसे यह टेक्नोलॉजी विस्तृत रूप लेगी, कीमतें भी उसी के मुताबिक कम होती चली जाएंगी। इस टेक्नोलॉजी की कीमत 1000 रुपये से कम रखी जा सकती है।
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खबरों के मुताबिक चार पहिया वाहनों जैसे कार, ट्रक, बसों के लिए 10 हजार माइक्रोडॉट्स की आवश्यकता होगी, वहीं दो पहिया वाहनों के लिए 5000 माइक्रोडॉट्स की जरूरत होगी। वहीं इनकी लाइफसाइकिल 15 सालों तक होगी। भारत में माइक्रोडॉट्स मैन्यूफैक्चरर कम के कम 10 अल्फा न्यूमरिक करैक्टर इस्तेमाल करेंगे।
2016 के आकड़ों के मुताबिक 2.14 लाख वाहन हर साल वाहन चोरी होते हैं और अकेले दिल्ली में ही 38,664 वाहनों की चोरी होती, जो सबसे ज्यादा है। वहीं दिल्ली के बाद उत्तर प्रदेश में 34,480 और महाराष्ट्र में 22,435 वाहन चोरी होते हैं। वहीं पुलिस केवल माह में चोरी हुए केवल 30 वाहन ही खोज पाती है।