Maruti Suzuki S-Presso (मारुति सुजुकी एस-प्रेसो) ने हाल के दिनों में ग्लोबल एनसीएपी क्रैश टेस्ट में जीरो रेटिंग मिलने के बाद काफी आलोचना का शिकार बनी। इस रिपोर्ट के बाद यह बहस शुरू हो गई है कि इस समय बाजार में उपलब्ध भारतीय कारें कितनी सुरक्षित हैं।
ग्लोबल एनसीएपी क्रैश टेस्ट में मारुति एस-प्रेसो के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद कार निर्माता मारुति सुजुकी और टाटा मोटर्स के बीच एक ट्विटर पर वार-पलटवार चलता रहा। बता दें कि भारत में टॉप 10 सबसे सुरक्षित कारों की सूची में कम से कम 6 कारें टाटा मोटर्स की हैं।
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Maruti Suzuki S-Presso
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हालांकि, सुजुकी ऑटो दक्षिण अफ्रीका ने अफ्रीकी राष्ट्र में बिक रही एस-प्रेसो कारों के बारे में सुरक्षा चिंताओं को दूर किया है। इसने एक प्रकाशन की हालिया रिपोर्ट का हवाला दिया जहां सुजुकी ऑटो दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रीय ब्रांड प्रबंधक ब्रेंडन कारपेंटर ने दावा किया कि वहां उपलब्ध सुजुकी एस-प्रेसो भारत में बिक रहे मॉडल से ज्यादा सुरक्षित है, जिसे ग्लोबल एनसीएपी द्वारा परीक्षण किया गया था।
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- फोटो : Amar Ujala
रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा, "जो मॉडल क्रैश टेस्ट में इस्तेमाल किया गया था, वह भारत में बिकने वाला मॉडल है जो विशेष रूप से भारतीय बाजार के लिए बनाया गया है। उस विशेष मॉडल में केवल ड्राइवर की तरफ एक एयरबैग की सुविधा है और इसमें फ्रंट सीटबेल्ट भी नहीं है, जिसमें लोड सीमाओं के साथ प्री-टेंशनर्स की सुविधा होती है।"
कारपेंटर ने यह भी कहा, "दक्षिण अफ्रीका में, एस-प्रेसो रेंज में ड्राइवर और यात्री एयरबैग स्टैंडर्ड मिलते हैं, साथ ही फ्रंट सीटबेल्ट जिसमें लोड लिमिटर्स के साथ प्री-टेंशनर शामिल हैं। अतिरिक्त एयरबैग और सीटबेल्ट एनहैंसमैंट स्थानीय मॉडल को अधिक सुरक्षित गाड़ी बनाते हैं। एस-प्रेसो अच्छा मूल्य प्रदान करता है, लेकिन सुरक्षा की कीमत पर नहीं।"
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मारुति सुजुकी एस-प्रेसो ग्लोबल एनसीएपी द्वारा आयोजित सुरक्षा रेटिंग्स के लेटेस्ट परीक्षण में एक भी स्टार हासिल नहीं कर पाई। एस-प्रेसो, एडल्ट ऑक्यूपेंट प्रोटेक्शन के लिए परीक्षण में नाकाम रही, मुख्यतः क्योंकि इस कार में सिर्फ ड्राइवर-साइड एयरबैग स्टैंडर्ड मिलता है। एयरबैग और उनके द्वारा दी जाने वाली सुरक्षा ग्लोबल एनसीएपी द्वारा किए गए परीक्षणों में एक कार कैसे प्रदर्शन करती है, इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जैसे, क्रैश टेस्ट के दौरान एस-प्रेसो के अंदर रखे डमी के गर्दन और छाती के हिस्से में महत्वपूर्ण प्रभाव देखा गया।
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टेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक, "ड्राइवर की छाती के लिए खराब सुरक्षा दिखी और यात्री के सीने के लिए कमजोर सुरक्षा दिखाई दी। चालक के घुटनों के लिए मामूली सुरक्षा दिखाई दी, क्योंकि वे ट्रैन्स्पेशिया ट्यूब द्वारा समर्थित डैशबोर्ड के पीछे खतरनाक संरचनाओं से प्रभावित हो सकते हैं, जबकि यात्री के घुटनों के लिए अच्छी सुरक्षा दिखाई देती है।"
परीक्षण के परिणामों में आगे कहा गया है कि फ्रंट सीटबेल्ट में प्रीटेंशनर्स नहीं हैं और पीछे की सीट पर बीच में बैठने वाले यात्री को तीन-बिंदु सीटबेल्ट नहीं मिलता है। चाइल्ड रेस्ट्रेंट सिस्टम (CRS) के लिए कोई ISOFIX एंकर भी नहीं है।