फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जल्द बदल लें अपनी खराब ड्राइविंग की आदतें, नहीं तो इंश्योरेंस प्रीमियम पड़ सकता है जेब पर भारी

Thu, 28 Nov 2019 08:58 AM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 7
car insurance
मोटर वाहन बीमा का प्रीमियम तय करते समय कंपनियां अमूमन उसकी बाजार कीमत और इंजन की क्षमता को ध्यान में रखती हैं। आने वाले दिनों में इस प्रीमियम पर वाहन चलाने के तरीके और जोखिम उठाने का भी असर पड़ेगा। भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI)  ने इसके लिए ‘टेलीमैटिक्स फॉर मोटर इंश्योरेंस सिस्टम’ से गाड़ियों पर  नजर रखी जाएगी।
 
विज्ञापन

शामिल हो सकते हैं तीन नए मानक

 
  • वाहन का इस्तेमाल
  • कुल कितने किलोमीटर चला
  • वाहन चलाने का तरीका
  • वाहन चालक को होगा लाभ
विज्ञापन

टेलीमैटिक्स सिस्टम है क्या?

बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) ने वाहन बीमा क्षेत्र के कई नियमों में बदलाव का मसौदा तैयार किया है। इसमें टेलीमैटिक्स सिस्टम भी शामिल है। अब आप सोचेंगे कि टेलीमैटिक्स सिस्टम है क्या। इसके तहत ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) के जरिये वाहनों पर नजर रखी जाएगी।
 

रियल टाइम डाटा तैयार होगा

इसके जरिये ड्राइवर की वाहन चलाने की आदतों का रियल टाइम डाटा तैयार किया जाएगा। वाहन का प्रीमियम तय करते समय कंपनियां इस डाटा के आधार पर राशि कम या ज्यादा कर सकती हैं। मसलन, अगर एक ही क्षमता और बाजार मूल्य की कार को कोई व्यक्ति सावधानीपूर्वक बिना जोखिम उठाए चलाता है, तो उसे तेज रफ्तार और खतरनाक ढंग से कार चलाने वाले की तुलना में कम प्रीमियम अदा करना होगा। बीमा नियामक का मानना है कि इस कदम से लोग सावधानीपूर्वक वाहन चलाने की ओर प्रोत्साहित होंगे और सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी।
 
विज्ञापन

किन आदतों की होगी रिकॉर्डिंग

ड्राइविंग के आधार पर होने वाले इंश्योरेंस को यूजेज बेस्ड इंश्योरेंस नाम दिया गया है। टेलिमैटिक्स डिवाइसेस से जुटाए गए डाटा में तेजी से अक्सेलरेटर दबाना, कार का कुल कवर डिस्टेंस, तेजी से ब्रेक लगाना, गाड़ी को नुकसान के कारण, कोनों पर तेजी से ड्राइविंग, तेजी से दिशा बदलना और एयरबैग्स का फंक्शन जैसे पैटर्न शामिल किए जाएंगे।
 
विज्ञापन

क्या होगा फायदा

फिलहाल मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी की गणना इंश्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू से होती है। जिसमें गाड़ी का मॉडल, निर्माण वर्ष, इंजन कैपेसिटी और ज्योग्राफिकल जोन शामिल है। लेकिन टेलीमैट्रिक्स आने के बाद अग आप ठीक से गाड़ी चलाते हैं, तो आपको कम प्रीमियम चुकाना होगा। वहीं इस टेक्नोलॉजी की मदद से व्हीकतल ट्रैकिंग और रोडसाइड असिस्टेंस में भी मदद मिलेगी।   
विज्ञापन
विज्ञापन

डाटा के लिए बनेगा स्टोरेज

इरडा के अनुसार, टेलीमैटिक्स को लागू करने के लिए अलग-अलग से सोर्सेज से से डाटा एकत्र कर एक ही पूल में जमा करना होगा। इसके लिए सेंट्रल पूल बनाने का प्रस्ताव है, जिसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी इंश्योरेंस इंफॉरमेशन ब्यूरो ऑफ इंडिया (आईआईबीआई) पर रहेगी। वर्तमान में बीमा कंपनियों के लिए डाटा स्टोरेज का काम आईआईबीआई ही करता है और टेलीमैटिक्स सिस्टम में भी एकत्र किए डाटा तक बीमा कंपनियों की पहुंच यही नियंत्रित करेगा।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें