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28 साल पुरानी इस गाड़ी पर Indian Army का भरोसा आज भी बरकरार, नहीं करना चाहती रिटायर

Mon, 03 Jun 2019 02:28 PM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला
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Maruti Gypsy Indian Army - फोटो : सांकेतिक
लगता है भारतीय सेना को दशकों से उनके काफिले की शान रही मारुति जिप्सी से जुदाई रास नहीं आ रही है। मारुति जिप्सी की एक बार फिर से सेना में वापसी हो रही है। हालांकि मारुति ने जिप्सी के प्रोडक्शन को बंद करने का एलान पहले ही दिया है, लेकिन बावजूद इसके सेना अपनी ऑलटाइम फेवरेट जिप्सी से रिश्ता तोड़ने के लिए तैयार नहीं है।
 
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मारुति ने पहले मना किया

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Maruti Gypsy Indian Army-1.jpg - फोटो : HAL
मारुति ने अक्टूबर 2018 में एलान किया था कि वह अप्रैल 2019 से मारुति जिप्सी का उत्पादन बंद कर देगी। बावजूद इसके सेना ने मारुति को 3051 जिप्सी का आर्डर दिया है। हालांकि पहले तो मारुति ने जिप्सी का आर्डर पूरा करने में असहमति जताई, लेकिन सेना ने इसे अपनी जरूरत बताते हुए हर हाल में इस आर्डर को पूरा करना का अनुरोध किया।
 
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सेना में 30 हजार गाड़ियां

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Maruti Gypsy Hard Roof top - फोटो : Maruti
न्यूज रिपोर्ट्स के मुताबिक जिप्सी न बनाने के पीछे मारुति का तर्क था कि जिप्सी सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करती है, बावजूद इसके रक्षा मंत्रालय ने मारुति को सुरक्षा नियमों में छूट देते हुए आर्डर पूरा करने पर जोर दिया। गौरतलब है कि आर्मी में इस श्रेणी की तकरीबन 30 हजार गाड़ियां प्रयोग कर रही है, जिसमें से कुछ को धीरे-धीरे रिटायर किया जा रहा है।
 

सॉफ्ट टॉप मॉडल का वजन 985 किलोग्राम

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tata safari gs800
असल में सेना का जिप्सी का आर्डर फिर से देने के पीछे मुख्य वजह है कि इसका वजन मे हल्का होना। सेना जिप्सी के सॉफ्ट टॉप मॉडल का इस्तेमाल करती है, जिसका वजन केवल 985 किलोग्राम है, जबकि इसके हार्ड टॉप वर्जन का वजन 1020 किलोग्राम है। सेना मारुति जिप्सी को ज्यादातर कश्मीर और उत्तर-पूर्व के पहाड़ी इलाकों में इससेमाल करती है। हल्के होने की वजह से जिप्सी को कम चौड़े बर्फीले और कच्चे कठिन रास्तों पर चलाना आसान होता है। वहीं हल्की होने की वजह से इसे चॉपर से भी आसानी से एयरलिफ्ट किया जा सकता है।
 
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35 हजार जिप्सी सेना को डिलीवर

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Tata Safari Strom - फोटो : Team-BHP
वहीं कम वजनी होने के बावजूद जिप्सी 500 किग्रा का भार ढो सकती है और पहाड़ी इलाकों में रसद और हथियार पहुंचाना मुश्किल होता है, ऐसे में जिप्सी उनकी इस मुश्किल को काफी हद तक आसान कर देती है। मारुति जिप्सी का सेना में 1991 में इस्तेमाल शुरू किया गया था और अब तक 35 हजार जिप्सी सेना को डिलीवर हो चुकी हैं।
 
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गन बंद सफारी के ऊपर लगाना संभव नहीं

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Maruti Gypsy GUN on Top - फोटो : सांकेतिक
हालांकि सेना ने पहले मारुति जिप्सी का विकल्प ढूंढते हुए टाटा सफारी स्ट्रॉम को पसंद किया था। तकरीबन 5 साल के ट्रायल के बाद सेना ने जिप्सी की जगह टाटा सफारी स्ट्रॉम और महिन्द्रा स्कॉर्पियो को पसंद किया था। बाद में जब टाटा ने सफारी स्ट्रॉम की कम पैसो में बोली लगाई, तो सेना ने टाटा को 3192 टाटा स्ट्रॉम का आर्डर दिया, जिनमें से 90 प्रतिशत तक डिलीवर हो चुकी हैं। सेना में आने वाली सभी सफारी हार्ड टॉप मॉडल वाली हैं। सेना को अक्सर क्विक रेस्पॉन्स टीमें भेजनी होती हैं और रीकॉयलेस गन बंद सफारी के ऊपर लगाना संभव नहीं है। वहीं टाटा मोटर्स ने भी सफारी को मॉडिफाई करने से मना कर दिया।    
 
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मारुति जिप्सी में 16-वॉल्व MPFI G13BB पेट्रोल इंजन

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maruti suzuki Gypsy - फोटो : सांकेतिक
बावजूद इसके सफारी की जगह जिप्सी को चुनने की पीछे वजह है कि सफारी स्ट्रॉम बड़ा वाहन है और पहाड़ों पर रास्ते बेहद संकरे और छोटे होती हैं, ऐसे में हाइ एल्टीट्यूड एरिया में जिप्सी की जरूरत बढ़ जाती है। वहीं जिप्सी पर गन माउंट की जा सकती हैं। मारुति जिप्सी में 16-वॉल्व MPFI G13BB पेट्रोल इंजन आता है, जो 80 बीएचपी की पावर और 103 एनएम का टॉर्क जनरेट करता है।
 
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