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जल्द ही पानी से चलेंगी गाड़ियां, धुआं नहीं बल्कि छोड़ेंगी ऑक्सीजन

Tue, 17 Dec 2019 02:25 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Hyundai Nexo (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सांकेतिक
पेट्रोल या डीजल की बजाए जल्द ही हाइड्रोजन से चलने वाली गाड़ियों की संख्या बढ़ सकती है। यूएनएसडब्ल्यू की अगुवाई वाली वैज्ञानिकों की टीम ने हाइड्रोजन ऊर्जा को बनाने के लिए बहुत सस्ता और सुलभ समाधान ढूंढ लिया है। यह नई खोज वायु प्रदूषण की मार झेल रहे भारत जैसे देशों के लिए बहुत कारगर समाधान साबित हो सकती है। 

पानी से हाइड्रोजन को किया अलग 

ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित न्यू साउथ वेलस यूनिवर्सिटी (यूएनएसडब्ल्यू), ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी और स्वाइनबर्न यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने हाइड्रोजन को पानी से अलग करने का सफल प्रयोग किया है।  वैज्ञानिकों ने हाइड्रोजन को सोखने के लिए पानी में से ऑक्सीजन को अलग किया।
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Hyundai Nexo (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Social Media
इसे लोहा और निकल जैसी कम लागत वाली धातुओं को उत्प्रेरक के तौर पर इस्तेमाल करके प्राप्त किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में हाइड्रोजन को निकालने में बहुत कम ऊर्ज की जरूरत होती है। यह शोध नेचर कम्युनिकेशंस पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। 
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hydrogen

सस्ती धातुओं का हुआ इस्तेमाल 

हाइड्रोजन को पानी से अलग करने की इस प्रक्रिया में लोहा और निकल जैसी धातुओं का इस्तेमाल होता है। यह धरती पर ज्यादा मात्रा में पाए जाते हैं। अब तक 'वाटर-स्प्लिटिंग' प्रक्रिया में रूथेनियम, प्लैटिनम और इरिडियम जैसी कीमती धातुओं का इस्तेमाल होता था। अब इनकी जगह पर लोहा और निकल जैसी सस्ती धातु का प्रयोग होगा, जो अब इस प्रक्रिया में उत्प्रेरक के रूप में काम आएंगी। 

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Hyundai Nexo (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सांकेतिक
यूएनएसडब्ल्यू स्कूल ऑफ केमिस्ट्री के प्रोफेसर चुआन झाओ कहते हैं कि पानी के विभाजन में दो इलेक्ट्रोड पानी में एक इलेक्ट्रिक को चार्ज करते हैं, जो हाइड्रोजन को ऑक्सीजन से अलग कर देता है और इस ऊर्जा को ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : JEEP
झाओ कहते हैं कि इस प्रक्रिया में बहुत कम ऊर्जा खर्च होती है। इस उत्प्रेरक पर एक छोटा नैनोस्केल इंटरफेस होता है, जहां लोहे और निकल परमाणु स्तर पर मिलते हैं, जो पानी के विभाजन के लिए एक सक्रिय भाग बन जाता है। यह वह भाग है जहां हाइड्रोजन को ऑक्सीजन से अलग किया जा सकता है और ईंधन के रूप में सोखा जा सकता है। ऑक्सीजन को वातावरण में छोड़ दिया जाता है। 
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