1982 से भारतीय बाजार में मारूति उद्योग के जरिए अपना कारोबार शुरू करने वाली मारुति आखिर क्यूं सबसे आगे है? विदेशी बाजारों में अभी भी अपना अस्तित्व तलाश रही मारुति सुजुकी में आखिर ऐसा क्या है जो भारतीयों को इसका कायल बनाए हुए है? ये ऐसे सवाल हैं जिसका जवाब हर कोई जानना चाहता है। आइए आज आपको इन सवालों के जवाब हम दिए देते हैं और पांच ऐसी बातें जानते हैं जिसके वजह से मारूति भारतीय बाजार में सबसे अव्वल बनी हुई है। हाल ही में मारूति सुजुकी ने भारत में महज एक साल में 15 लाख कार बनाने का रिकॉर्ड बनाया है।
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मारूति सुजुकी की नई इग्निस।
- फोटो : Amar Ujala
इमोशन से जुड़ा रिश्ता
हम भारतीय भावनात्मकता को बहुत तवज्जो देते हैं। भारतीय बाजार में आम लोगों की कार बनकर उभरी मारूति सुजुकी एक ऐसा समय था जब कार का मतलब मारूति बन चुकी थी। 1983 में गुड़गांव के मारूति उद्योग प्लांट से जब पहली मारूति 800 निकली थी तो लोगों ने उत्सव मनाया था। उस समय इस कार की कीमत लगभग 66 हजार रुपये थी। पूरे देश के गांव-गांव तक इस कार की रीच पहुंच गई। एक वजह ये भी है जो हमें मारूति से अलग नहीं कर पाता।
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मारूति सुजुकी की नई इग्निस।
- फोटो : Amar Ujala
आफ्टर सेल सर्विस
किसी भी बाजार में सफलता की सबसे बड़ी गारंटी देता है उसका सेल्स नेटवर्क। अगर आप देश के किसी इंटीरियर से भी गुजर रहे हों और आपके मारुति कार है और वह खराब हो जाती है तो महज कुछ किलोमीटर में ही आपकी कार ठीक करने वाला एक मेकैनिक मिल जाएगा और उसके पुर्जे भी मिल जाएंगे। अब ऐसे में आप बहुत बढ़िया कार बनाते हैं लेकिन उसके खराब होने पर आप फंस जाएं तो अच्छी कार रखकर क्या करेंगे। पहली बार कार खरीदने वाले अधिकतर ग्राहक कुछ नया प्रयोग करने के बजाए आंख बंद करके मारूति का उत्पाद खरीद लेते हैं।
बजट में उपलब्ध कारें
मारुति ने भारत में हमेशा जमाने के साथ कदम ताल मिलाया है। सन् 2009 में मारूति 800 को महानगरों में बेंचना बंद करके कंपनी ने इसकी जगह नई तकनीकि व नए इंजन वाले ऑल्टो पर फोकस रखा और थोड़े-थोड़े समय के अंतर पर अपनी इस कार को भी अपग्रेड किया। अब ऑल्टो 800 बन गई है और जो सिर्फ थोड़े पैसे खर्च करके ज्यादा शक्ति वाली कार चाहता है उसके लिए ऑल्टो के10 उपलब्ध है। एंट्री लेवल कार सेगमेंट में कंपनी की ये दोनों ही कारें काफी अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं।
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मारूति सुजुकी की नई इग्निस।
- फोटो : Amar Ujala
प्रोडक्शन प्लांट
अगर आपके पास कार खरीदने वालों की लाइन लगी हो और आप डिलीवरी न दे पाओ तो यह भी एक नेगेटिव पहलू होता है। मारूति सुजुकी इस मामले में सबसे आगे है और इस समय कंपनी के 3 मैन्युफैक्चरिंग प्लाांट हैं - गुड़गांव, मानेसर और गुजरात। वर्तमान में गुजरात प्लांट की क्षमता 2.5 लाख यूनिट्स है। गुड़गांव में 7 लाख यूनिट्स व मानेसर में लगभग 8 लाख यूनिट्स का निर्माण (सालाना) किया जाता है। कंपनी गाड़ियों की मांग समय पर पूरा कर लेती है।
खुद से खुद की प्रतिस्पर्धा
मारूति सुजुकी की बाजार रणनीति यहां पर काफी कारगर साबित हो रही है। अगर कोई ग्राहक कार खरीदने के इरादे से मारूति के शोरूम में पहुंच गया तो उसकी मुराद वहीं पूरी हो जाती है। क्योंकि कंपनी ने अपनी ही कारों में ढेर सारे प्रतिस्पर्धी मॉडलों को खड़ा कर रखा है। उदाहरण के तौर पर स्विफ्ट पसंद नहीं आई तो बलेनो का विकल्प है बलेनो से थोड़ा अलग हटकर चाहिए तो ब्रेजा मिल जाएगी। यही वो वजहें हैं जिनके कारण मारूति नंबर वन बनी हुई है और अभी भी कंपनी के पास 50 फीसदी से अधिक बाजार हिस्सेदारी है।