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दूसरे राज्यों में वाहन खरीदना या बेचना बन सकता है सिर दर्द

Fri, 02 Nov 2018 01:08 PM IST
ऑटो डेस्क, अमर उजाला
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used cars
कार को खरीदने की खुमारी कभी कभी इतनी होती है कि हम नई कार न ले सके तो पुरानी कारों की ओर रुख कर लेते हैं। ऐसे में मन में हमेशा संशय भी बना रहता है कि कार अगर अपने राज्य में नहीं मिल रही है तो क्या दूसरे राज्यों से सेकेंड हैंड कार खरीदी जाए।

खरीद भी लें तो उसका डॉक्यूमेंट का क्या प्रोसेस होता है? इसके अलावा यह भी लोगों के मन में यह बात भी घर कर चुकी है कि दिल्ली-एनसीआर में कार थोड़ी कम कीमत पर मिल जाती है। ऐसे में दूसरे राज्यों के लोग भी दिल्ली-एनसीआर से कार लेने का मन बनाते हैं। अगर आप भी किसी दूसरे राज्य से कार खरीदने जा रहे हैं तो कुछ बाते जानने आपके लिए बेहद जरूरी है।
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buying new car
पुरानी कार खरीदते समय ध्यान रखें कि ऑनरशिप ट्रांसफर बेहद जरूरी है। यह इसलिए जरूरी है क्योंकि अगर इंश्योरेंस के डॉक्यूमेंट आपके या परिवार में किसी के नाम नहीं होंगे तो क्लेम करते समय परेशानी का सामना करना पड़ेगा और हो सकता है आपको चेकिंग के दौरान भी जेब ढीली करनी पड़े।
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Buying new Car
अगर आप अपनी कार दूसरे राज्य में बेच रहे हैं तो आपको भी ऑनरशिप ट्रांसफर का ध्यान रखना होगा, क्योंकि बाद में अगर कार से कोई एक्सिडेंट का क्रिमिनल गतिविधि होती है तो पुलिस सबसे पहले आपको संपर्क करेगी।

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car's trunk
बात करें, ऑनरशिप ट्रांसफर की तो अगर आप यूपी के रहने वाले हैं और दिल्ली से कार खरीदने का मन बना रहे हैं ऐसे में कार विक्रेता दिल्ली के RTO से एनओसी आपको देगा। यह एनओसी, कार की इनवॉइस और अन्य दस्तावेज आपको अपने RTO में जमा कराने होंगे।
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buying new car
आरटीओ में आपको रोड टैक्स भी देना होगा। यह रोड टैक्स कार की वर्तमान कीमत के अनुसार होता है। उदाहरण के तौर पर अगर सेकेंड हैंड कार की कीमत 6 लाख रुपए है तो इसके पुन: रजिस्ट्रेशन में करीब 40 हजार रुपए लग जाएंगे। 
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