एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (एटीएमएस) को लागू करने के बाद से बंगलूरू-मैसूर एक्सप्रेसवे पर सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या में काफी कमी आई है। और सितंबर के बाद से ऐसी कोई मौत नहीं हुई है।
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Bengaluru-Mysuru National Highway
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एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (एटीएमएस) (उन्नत यातायात प्रबंधन प्रणाली) के कार्यान्वयन के बाद 117 किलोमीटर लंबे बंगलूरू-मैसूर एक्सप्रेसवे पर दुर्घटना के कारण होने वाली मौतों की संख्या में काफी कमी आई है। और सितंबर के बाद से ऐसी कोई मौत नहीं हुई है।
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Bengaluru-Mysuru National Highway
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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को लोकसभा को बताया कहा कि इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (आईटीएस) को एटीएमएस के रूप में लागू किया जा सकता है या यह व्यापक (वाहन से लेकर सब कुछ) वी2एक्स संचार का हिस्सा हो सकता है।
उन्होंने कहा, "इसका मकसद एटीएमएस के क्रियान्वयन से दुर्घटनाओं, ट्रैफिक उल्लंघनों और घटना प्रतिक्रिया समय को कम करना है। सरकार राजमार्गों और एक्सप्रेसवे में एटीएमएस समाधान को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना बना रही है।"
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National Highway
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बंगलूरू-मैसूर एक्सप्रेसवे भारत का एकमात्र ऐसा रोड है, जहां एटीएमएस का काम पूरा हो चुका है। गडकरी ने कहा कि बंगलूरू-मैसूर एक्सप्रेसवे में एटीएमएस की स्थापना से पहले और बाद में दुर्घटना के आंकड़ों की समीक्षा की गई। और पाया गया कि जुलाई, 2024 में एटीएमएस के लागू होने के बाद मृत्यु दर में कमी आई है।
गडकरी ने बताया कि जुलाई में इस सड़क पर दुर्घटनाओं में छह मौतें हुईं, जो अगस्त में घटकर दो हो गईं और उसके बाद शून्य हो गईं।
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National Highway
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2023 में इस सड़क पर दुर्घटनाओं में 188 मौतें हुईं - मई (29) और जून (27) में सबसे ज्यादा मौतें दर्ज की गईं। मार्च और अप्रैल 2023 में 20-20 मौतें दर्ज की गईं।
इस साल जनवरी में 12 मौतें हुईं। मार्च और जून में हर महीने नौ मौतें हुईं। फरवरी और जुलाई में छह-छह मौतें हुईं। मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि अप्रैल और मई में तीन-तीन लोगों की मौत हुई।
अलाथुर के सांसद के राधाकृष्णन ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से देश भर में नेशनल हाईवे पर लगाए गए आईटीएस के आंकड़ों के बारे में पूछा था।
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Ring Road
- फोटो : Adobe Stock
गडकरी ने यह भी कहा कि दिल्ली और हरियाणा में 58 किलोमीटर लंबे द्वारका एक्सप्रेसवे, उत्तर प्रदेश में 180 किलोमीटर लंबे दिल्ली-आगरा ई-वे और उत्तर प्रदेश में ही 103 किलोमीटर लंबे लखनऊ रिंग रोड के लिए यह टेक्नोलॉजी प्रदान की गई है।
दिल्ली और हरियाणा में 75 किलोमीटर लंबे यूईआर-II, कर्नाटक में 80 किलोमीटर लंबे बंगलूरू रिंग रोड और उत्तराखंड में 825 किलोमीटर लंबे चारधाम संपर्क के लिए बोली प्रक्रिया चल रही है।
गडकरी ने कहा कि ऊपर बताए गए हाईवे के अलावा, सरकार ने दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, ट्रांस-हरियाणा एक्सप्रेसवे, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे और अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे जैसी हाईवे प्रोजेक्ट के हिस्से के रूप में एटीएमएस को लागू किया है और कर रही है।