बहुत पहले के समय से ही हमारे शास्त्रों आदि में दैनिक दिनचर्या और बात व्यवहार से संबंधित कुछ नियमों के बारे में बताया गया है। लोग बहुत पहले समय से ही कुछ बातों को मानते चले आ रहे हैं। महिलाओं के साज-श्रंगार से जुड़ी भी कुछ मान्यताएं हैं जिन्हें लोग बहुत पहले से मानते रहे हैं। इसी विषय में महिलाओं के केश संवारने से संबंधित कुछ बातें हैं जिन्हें ध्यान में रखना चाहिए। माना जाता है कि यदि इन बातों का ध्यान न रखा जाए तो नुकसान उठान पड़ सकता है। तो चलिए जानते हैं कि महिलाओं को केश संवारते समय किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए।
विज्ञापन
2 of 6
(प्रतीकात्मक तस्वीर)
ज्यादातर महिलाएं इस बात पर ध्यान नहीं देती हैं लेकिन भी खड़े होकर अपने केश नहीं संवारना चाहिए। महिलाओं को हमेशा अपने केश किसी उचित स्थान पर बैठकर आराम से संवारना चाहिए। मान्यता है कि यदि कोई महिला खड़े होकर बाल संवारती है तो उसके सौभाग्य में कमी आती है।
विज्ञापन
3 of 6
(प्रतीकात्मक तस्वीर)
कुछ महिलाएं शाम के समय साज-श्रंगार करती हैं लेकिन इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि सूर्यास्त के बाद कभी भूलकर भी बालों में कंघी नहीं करनी चाहिए। सूर्यास्त से पहले ही केशों को संवार लेना चाहिए। कहा जाता है कि सूर्य ढलने के बाद अंधेरा छाने लगता है जिससे नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव बढ़ जाता है। इसलिए रात के समय कभी केश न संवारे।
अक्सर कुछ महिलाएं रात में सोते समय अपने बालों को खोल लेती हैं, लेकिन यह बिलकुल शुभ नहीं माना जाता है। माना जाता है कि इससे आपके ऊपर नकारात्मकता हावी हो सकती है। रात के समय बालों को हमेशा बांधकर, चोटी को गूथकर रखना चाहिए।
विज्ञापन
5 of 6
(प्रतीकात्मक तस्वीर)
आज के समय में कई तरह से बालों की साज-सज्जा की जाती है। कई तरह की डिजाइनर चोंटियां और जूड़े आदि बनाए जाने लगे हैं। आज के समय में जिगजैग मांग का प्रचलन बहुत बढ़ चला है। समुद्रशास्त्र के अनुसार महिलाओं को इस तरह से टेढ़ी मांग नहीं निकालनी चाहिए। महिलाओं को हमेशा स्पष्ट मांग निकालनी चाहिए।
सिर की त्वचा में खुजली स्वाभाविक सी क्रिया है। जब बालों में खुजली हो तो कभी भूलकर भी दोनों हाथों से सिर को नहीं खुजलाना चाहिए। मान्यता है कि इससे घर में धन संबंधित किल्लत का सामना करना पड़ता है। घर में दरिद्रता का वास होने लगता है।