वैदिक ज्योतिष के अनुसार हर समय ग्रह-नक्षत्र अपनी चाल बदलते रहते हैं। इन ग्रहों की चाल बदलने से कभी शुभ तो कभी अशुभ योग का निर्माण होता रहता है। इस घटना से हमारे सभी तरह के मांगलिक कार्यों में इसका प्रभाव पड़ता है। वैदिक ज्योतिष में ग्रहों का अस्त और उदय होना एक महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है। 31 मई से शुक्र वृष राशि में रहते हुए अस्त हो रहा है जो 9 जून को उदय होगा। शुक्र के अस्त होने की अवधि में किसी भी तरहा कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किया जा सकता है। अस्त हुए शुक्र के दौरान न सिर्फ शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं बल्कि इस दौरान न तो किसी से विवाह,व्यापार, जमीन संबंधी सौदे और नौकरी के प्रस्ताव पर चर्चा करते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार साल में कुछ दिनों के लिए आकाश में कुछ ग्रह लुप्त हो जाते हैं। क्योंकि इस दौरान वे सूर्य के बहुत ही समीप पहुंच जाते हैं। इसे ही ग्रहों का अस्त कहा जाता है।