वास्तुशास्त्र में दिशाओं के अनुसार क्रिया-कलाप करने में हमेशा मनचाहे परिणाम प्राप्त होते हैं। आज बात करते हैं उत्तर-पूर्व दिशा की। उत्तर और पूर्व के बीच की दिशा को वास्तु में ईशान कोण कहा गया है। यह दिशा-क्षेत्र किसी भी ईमारत का सबसे पवित्र स्थान होता है जिसमें ईश्वर का निवास स्थान होता है। ऐसा माना जाता है कि घर के ईशान कोण को हमेशा साफ़ सुथरा रखना चाहिए जिससे घर में सुख-शांति,आरोग्य और लक्ष्मी का वास हो। भगवान शिव का एक नाम ईशान भी है और इनका स्थान उत्तर-पूर्व दिशा में होता है। इसलिए घर में भी इस दिशा को मंदिर या पूजा के लिए ही इस्तेमाल किया जाता है। वास्तु के अनुसार इस स्थान के लिए कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना जरूरी है।