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Strong Mars: कुंडली में मजबूत मंगल जीवन में दिलाता है अपार सफलता, जानें आपकी कुंडली में कैसा है ये ग्रह?

Fri, 27 Mar 2026 04:12 PM IST
Jyoti Mehra ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Effect Of Strong Mars: वैदिक ज्योतिष में मंगल को ऊर्जा, साहस और क्रियाशीलता का प्रतीक माना जाता है। आइए जानते हैं कि यदि किसी की कुंडली में मंगल मजबूत होते हैं, जो जीवन पर उसका क्या प्रभाव देखने को मिलता है।  
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कुंडली में मजबूत मंगल के लक्षण - फोटो : Amar Ujala
Why You Need A Strong Mars In Kundli: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में ग्रहों की स्थिति का मानव जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण ग्रह मंगल है। वैदिक ज्योतिष में मंगल को ऊर्जा, साहस और क्रियाशीलता का प्रतीक माना जाता है। खगोल विज्ञान के अनुसार, मंगल बाहरी ग्रहों में गिना जाता है, जैसे बृहस्पति और शनि।

मंगल को लाल ग्रह कहा जाता है, और यह बात आधुनिक विज्ञान से पहले ही कई वैदिक ग्रंथों में बताई जा चुकी थी। महर्षि पराशर और वराहमिहिर ने मंगल को लाल रंग का ग्रह बताते हुए इसे युद्ध, जोश और कर्म का कारक माना है। ज्योतिष में मंगल को राशि चक्र का योद्धा भी कहा जाता है।

मंगल व्यक्ति के अंदर मौजूद ऊर्जा और जुनून को दर्शाता है। ग्रहों में इसे सैनिक की उपाधि दी गई है, जो सूर्य (राजा) के आदेशों को पूरा करता है। यदि किसी की कुंडली में मंगल मजबूत हो, तो वह व्यक्ति खेल, सेना या साहस से जुड़े क्षेत्रों में आगे बढ़ सकता है। आइए जानते हैं कि यदि किसी की कुंडली में मंगल मजबूत होते हैं, जो जीवन पर उसका क्या प्रभाव देखने को मिलता है।  

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कुंडली में मजबूत मंगल के लाभ - फोटो : Freepik
कुंडली में मजबूत मंगल के लाभ
जिन लोगों का मंगल मजबूत होता है, वे सीधे और साफ बोलने वाले होते हैं। वे अपने मन की बात बिना झिझक कह देते हैं और कठिन परिस्थितियों में भी अपने वादे निभाते हैं। ऐसे लोग आत्मविश्वासी होते हैं, लेकिन कभी-कभी उनमें अहंकार भी देखा जाता है।

मंगल के प्रभाव वाले लोग चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरे काम पसंद करते हैं। वे आसान कामों की बजाय ऐसे क्षेत्रों में जाते हैं, जहां साहस और जोश की जरूरत होती है, जैसे सर्जन, इंजीनियर या सेना। वहीं, अगर कुंडली में मंगल कमजोर या अशुभ हो, तो व्यक्ति गलत दिशा में भी जा सकता है।
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मंगल का जन्म कैसे हुआ? - फोटो : adobe
मंगल लग्न का स्वामी
अगर मंगल लग्न का स्वामी हो तो व्यक्ति का शरीर चुस्त और फुर्तीला होता है। ऐसे लोग ऊर्जावान और उत्साही होते हैं, लेकिन जल्दी गुस्सा भी आ सकता है। वे दूसरों पर प्रभाव जमाने और खुद को साबित करने की कोशिश करते हैं।

मंगल का जन्म कैसे हुआ?
वेदों में मंगल को पृथ्वी का पुत्र कहा गया है, इसलिए यह जमीन-जायदाद और संपत्ति का भी कारक है। एक कथा के अनुसार, भगवान शिव के तांडव के दौरान उनके पसीने की एक बूंद पृथ्वी पर गिरी, जिससे मंगल का जन्म हुआ। मंगल को लोहितांग और अंगारक नाम से भी जाना जाता है।

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मंगल ग्रह के संबंध - फोटो : अमर उजाला
मंगल ग्रह के संबंध
राशि चक्र में मंगल मेष और वृश्चिक राशि का स्वामी है। यह मकर राशि में उच्च का और कर्क राशि में नीच का माना जाता है। मजबूत मंगल वाले लोग लाल रंग की चीजें ज्यादा पसंद करते हैं।

वैदिक ज्योतिष में मंगल कई चीजों का प्रतिनिधित्व करता है, जैसे सिर, रक्त, बुखार, गर्मी, धातु, आग, चोट, प्रतियोगिता, संघर्ष, छोटे भाई-बहन, लोहा, स्टील, खेल, पुलिस और साहसिक कार्य आदि।
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छठे भाव का कारक - फोटो : adobe stock
छठे भाव का कारक 
मंगल को छठे भाव का कारक भी माना जाता है, जो रोग, ऋण, शत्रु और चुनौतियों से जुड़ा होता है। इसलिए जिन लोगों पर मंगल का प्रभाव होता है, उनके जीवन में संघर्ष और प्रतिस्पर्धा अधिक हो सकती है, लेकिन वे इन चुनौतियों का सामना करने की क्षमता भी रखते हैं।




डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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