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शारदीय नवरात्रि 2026 वास्तु उपाय: नवरात्रि में मुख्य द्वार पर करें ये 7 काम, मां लक्ष्मी की कृपा की है मान्यता

Wed, 07 Oct 2026 08:31 AM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ 11 अक्तूबर से होने जा रहा है। नवरात्रि में पूजा-पाठ के साथ घर के वास्तु का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। मुख्य द्वार पर कुछ खास उपाय करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। आइए जानते हैं मुख्य द्वार से जुड़े आसान वास्तु उपाय।
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शारदीय नवरात्रि 2026 - फोटो : amar ujala

शारदीय नवरात्रि 2026 का आरंभ 11 अक्तूबर से होने जा रहा है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा की पूजा के साथ घर की साफ-सफाई और सकारात्मक माहौल बनाए रखने पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वार को महत्वपूर्ण स्थान माना गया है, क्योंकि इसे घर में ऊर्जा के प्रवेश का प्रमुख माध्यम माना जाता है। मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान मुख्य द्वार को साफ-सुथरा और सकारात्मक ऊर्जा से युक्त रखने से घर का वातावरण बेहतर रहता है। वास्तु से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, इन दिनों मुख्य द्वार पर कुछ छोटे-छोटे उपाय किए जा सकते हैं। आइए जानते हैं नवरात्रि में मुख्य द्वार से जुड़े कौन से वास्तु उपाय किए जाते हैं।

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आम या अशोक के पत्तों का लगाएं तोरण - फोटो : instagram

आम या अशोक के पत्तों का लगाएं तोरण
नवरात्रि के पहले दिन मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों का तोरण लगाने की परंपरा है। वास्तु मान्यताओं में इन पत्तों को शुभ माना जाता है। माना जाता है कि इससे घर के वातावरण में सकारात्मकता बनी रहती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है।

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मुख्य द्वार पर बनाएं मां लक्ष्मी के चरण - फोटो : adobe stock

मुख्य द्वार पर बनाएं मां लक्ष्मी के चरण
नवरात्रि के दौरान मुख्य द्वार से घर के अंदर की ओर आते हुए मां लक्ष्मी के छोटे-छोटे चरण चिह्न बनाने की परंपरा भी है। इन्हें आमतौर पर रोली, कुमकुम या चावल के घोल से बनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, घर की ओर आते हुए चरण मां लक्ष्मी के आगमन और सुख-समृद्धि का प्रतीक माने जाते हैं।

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स्वास्तिक बनाना माना जाता है शुभ - फोटो : adobe stock

स्वास्तिक बनाना माना जाता है शुभ
नवरात्रि में मुख्य द्वार पर रोली या सिंदूर से स्वास्तिक बनाने की परंपरा भी है। हिंदू धर्म में स्वास्तिक को शुभता और मंगल का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बनाने से घर में सकारात्मकता और सौभाग्य का वातावरण बना रहता है।

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जल से भरा पात्र रखें - फोटो : Adobe Stock

जल से भरा पात्र रखें
मुख्य द्वार के पास मिट्टी या तांबे के पात्र में साफ पानी भरकर उसमें ताजे फूल या गुलाब की पंखुड़ियां डाल सकते हैं। वास्तु मान्यता के अनुसार, इसे घर के उत्तर या पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है। हालांकि, पानी को रोजाना बदलना और पात्र को साफ रखना जरूरी माना जाता है, ताकि वहां गंदगी या दुर्गंध न हो।

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शाम को मुख्य द्वार पर जलाएं दीपक - फोटो : adobe stock

शाम को मुख्य द्वार पर जलाएं दीपक
नवरात्रि में रोज शाम मुख्य द्वार के पास घी का दीपक जलाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दीपक की रोशनी शुभता और सकारात्मकता का प्रतीक मानी जाती है। दीपक ऐसी सुरक्षित जगह पर रखना चाहिए, जहां उसके आसपास पर्दे, कागज या कोई ज्वलनशील सामान न हो।

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मुख्य द्वार पर अंधेरा न रहने दें - फोटो : ai

मुख्य द्वार पर अंधेरा न रहने दें
वास्तु मान्यताओं के अनुसार, घर का मुख्य द्वार साफ और पर्याप्त रोशनी वाला होना चाहिए। खासकर नवरात्रि के दौरान शाम के समय मुख्य द्वार पर अंधेरा न रहने देने की सलाह दी जाती है। इसके लिए मुख्य द्वार के आसपास पर्याप्त रोशनी रखी जा सकती है। इससे प्रवेश स्थान साफ और व्यवस्थित भी दिखाई देता है।

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दरवाजे के सामने कचरे और बिखरे सामान से बचें - फोटो : freepik

दरवाजे के सामने कचरे और बिखरे सामान से बचें
नवरात्रि के दिनों में मुख्य द्वार के सामने कूड़ा-कचरा, पुराने सामान या बिखरे हुए जूते-चप्पल रखने से बचना चाहिए। धार्मिक और वास्तु मान्यताओं में साफ-सुथरे प्रवेश द्वार को शुभ माना जाता है। इसलिए रोजाना मुख्य द्वार और उसके आसपास की जगह की सफाई करें और अनावश्यक सामान को वहां जमा न होने दें।

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शारदीय नवरात्रि - फोटो : ai

नवरात्रि में क्यों खास माना जाता है मुख्य द्वार?
वास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार को घर का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। नवरात्रि जैसे धार्मिक पर्व पर इसकी साफ-सफाई और सजावट को शुभ माना जाता है। मान्यता है कि स्वच्छ और व्यवस्थित मुख्य द्वार से घर में सकारात्मक माहौल बना रहता है और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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