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देवराज इंद्र ने अपने पुत्र के लिए बनवाया था दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर !

Thu, 02 Jan 2020 11:02 AM IST
रुस्तम राणा अनीता जैन, वास्तुविद एवं लेखिका
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अंकोरवाट मंदिर, कंबोडिया - फोटो : Social media
हमारे देश के प्राचीन मंदिर अपनी भव्यता एवं धार्मिक महत्ता के लिए दुनियाभर में जाने जाते हैं। लेकिन फिर भी क्या आप जानते हैं कि विश्व का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर भारत में नहीं है। भारत से 4800 कि.मी. दूर एक ऐसा देश जहां पर है विश्व का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर परिसर तथा विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक स्मारक भी । जी हाँ, हम बात कर रहे हैं ऐसे ही एक विशालकाय हिन्दू मंदिर की। यह मंदिर है अंकोरवाट मंदिर जो कम्बोडिया के अंकोर में स्थित है। इसका पुराना नाम यशोधपुर था। मीकांक नदी के किनारे सिमरिप शहर में बसे इस मंदिर को टाइम मैगज़ीन ने दुनिया के पांच आश्चर्यजनक चीज़ों में शुमार किया था। इसका फैलाव सैंकड़ों वर्ग मील में है।
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अंकोरवाट मंदिर, कंबोडिया - फोटो : Social media
यह मंदिर जगत के पालनहार विष्णु भगवान को समर्पित है। जबकि इससे पूर्व के शासकों ने यहां बड़े-बड़े शिव के मंदिरों का निर्माण करवाया था।इंडोनेशिया के निवासी इस मंदिर को पानी में डूबा हुआ मंदिर का बगीचा भी कहते है। अंकोरवाट का यह हिन्दू मंदिर इतना ख़ास है कि यह कम्बोडिया राष्ट्र का राष्ट्रीय प्रतीक है, जिसकी तस्वीर को यहां के राष्ट्रीय ध्वज पर अंकित किया गया है। यह मंदिर मेरु पर्वत का प्रतीक भी माना जाता है। 
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अंकोरवाट मंदिर, कंबोडिया - फोटो : Social media
इस मंदिर की दीवारों पर रामायण एवं महाभारत जैसे पवित्र धार्मिक ग्रंथों के प्रसंगों का चित्रण शिल्पकारों ने बहुत ही सुन्दर ढंग से किया हुआ है। जगह-जगह अप्सराओं के नृत्य मुद्रा में भित्ति चित्र हैं व असुर और देवताओं के मध्य हुए समुद्र मंथन जैसे दृश्यों को दीवारों पर चित्रित किया गया है। विश्व का लोकप्रिय पर्यटन स्थल होने के साथ ही इस मंदिर को 1992 में यूनेस्को ने विश्व विरासत में भी शामिल किया है ।  

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अंकोरवाट मंदिर, कंबोडिया - फोटो : Social media
आखिर किसने बनवाया यह मंदिर?
इस मंदिर का निर्माण राजा सूर्यवर्मन द्वितीय ने सं 1112  से 1153  के बीच कराया था। मंदिर का कार्य सूर्यवर्मन द्वितीय ने प्रारम्भ किया था  परन्तु इसका समापन धरणीन्द्रवर्मन  के शासन काल में हुआ था ।  देवालय की रक्षा के लिए चारों तरफ एक विशाल खाई बनाई गई थी जिसकी लम्बाई ढाई मील और चौड़ाई 650  फ़ीट है । दूर से देखने पर यह खाई सुन्दर झील के समान दिखती है । अगर हम किवदंतियों पर चर्चा करें तो इस मंदिर  के बारे में कहा जाता है कि स्वयं देवराज इंद्र ने महल के तौर पर अपने पुत्र के लिए इस मंदिर का निर्माण एक ही रात में अपनी आलौकिक शक्तियों के द्वारा किया था । 
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अंकोरवाट मंदिर, कंबोडिया - फोटो : Social media
मंदिर की यह भी है खासियत 
  • यह मंदिर एक ऊंचे और बड़े चबूतरे पर स्थित है जिसमें तीन खंड हैं, प्रत्येक में सुन्दर मूर्तियां हैं और प्रत्येक खंड से ऊपर के खंड तक पहुंचने के लिए सीढियां हैं । 
  • प्रत्येक खंड में आठ गुम्बज हैं,जिनमें से  प्रत्येक गुम्बज की ऊंचाई 180 फीट है ।
  • मुख्य मंदिर तीसरे खंड की चौड़ी छत पर स्थित है जिसका शिखर 213 फीट ऊँचा है और यह पूरे क्षेत्र को गरिमामंडित किए हुए हैं। 
  • इस प्रकार की भव्य और विशालकाय धार्मिक स्मारक संसार के किसी अन्य स्थान पर नहीं मिलती है। भारत से संपर्क के बाद दक्षिण-पूर्वी एशिया में कला, वास्तु कला तथा स्थापत्य कला का जो विकास हुआ,उसका यह मंदिर उत्कृष्ट उदाहरण है । 
  • अंकोरवाट मंदिर का भ्रमण करने विदेशों से आए पर्यटकों में पिछले वर्ष सर्वाधिक संख्या चीनी पर्यटकों की रही। लगभग 667, 285 चीनी पर्यटक अंकोरवाट पहुंचे थे।  
  • साथ ही इस मंदिर का नाम गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है।  
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