विविध स्वरूप वाले हैं हनुमान
हनुमान जी के विविध मुद्राओं में चित्र देखने को मिलते हैं, जैसे-पर्वत उठाए हुए, लंका दहन करते हुए, श्री राम और लक्ष्मण को अपने कंधे पर लेकर उड़ते हुए, श्री राम के दरबार में भक्त के रूप में बैठे हुए, सूर्य को ग्रास बनाते हुए, लेटे हुए और प्रभु श्री राम के गले लगते हुए आदि इन सभी स्वरूपों का अपना-अपना महत्व है। भवन की दक्षिण दिशा में लाल रंग के बैठी हुई मुद्रा में लगाया गया हनुमान जी का चित्र सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। इससे दक्षिण दिशा से घर में आने वाली नकारात्मक ऊर्जा और बुरी ताकतें दूर होती हैं और घर में सुख, समृद्धि एवं शांति का प्रादुर्भाव होने लगता है।
भूत-प्रेत और बुरी आत्माओं से बचाव के लिए भवन के मुख्य द्वार पर पंचमुखी हनुमान जी का चित्र लगाया जा सकता है। वास्तु शास्त्र में मान्यता है कि पंचमुखी हनुमान जी का चित्र या प्रतिमा भवन में वास्तु दोषों का निवारण तो करती ही है, साथ ही वहां रहने वालों के जीवन में उन्नति के अवसर भी लाती है।