वैदिक ज्योतिष में चंद्र ग्रह का महत्वपूर्ण स्थान है।
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चंद्रमा से प्रभावित
चंद्रमा शरीर के बाईं आंख, गाल, मांस, रक्त, बलगम, वायु, स्त्री में दाईं आंख, पेट, भोजन नली, गर्भाश्य, अण्डाशय, मूत्राशय, चंद्र कुण्डली में कमजोर हो तो व्यक्ति को ह्रदय रोग, फेफड़े, दमा, आतिसार, दस्त गुर्दा, बहुमूत्र, पीलिया, गर्भाशय के रोग, महावारी में अनियमितता, कफ से जुड़े रोग होते हैं। अगर चंद्रमा कृष्ण पक्ष का नीच या शत्रु राशि में हो तथा अशुभ ग्रहों से दृष्ट हो तो चंद्रमा निर्बल हो जाता है। ऐसी अवस्था में निद्रा व आलस्य घेरे रहता है। व्यक्ति मानसिक तौर पर बेचैन, मन चंचलता से भरा रहता है मन में भय व्याप्त रहता है।